ज्योति स्ट्रक्चर्स के खिलाफ याचिका खारिज

अद्वैत राव पलेपू | मुंबई Apr 06, 2018 09:49 PM IST

नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के मुंबई पीठ ने ज्योति स्ट्रक्चर्स लिमिटेड के खिलाफ एफ जे एल्सनर ट्रेडिंग गैम्बी की तरफ से दाखिल याचिका खारिज कर दी। ज्योति स्ट्रक्चर्स बिजली पारेषण के क्षेत्र में टर्नकी समाधान मुहैया कराती है। अगस्त 2017 में सबसे पहले इसे भारतीय स्टेट बैंक ने एनसीएलटी में संदर्भित किया था। एफ जे एल्सनर ने शुरू में बंबई उच्च न्यायालय में याचिका दी थी, जिसके बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को 12 सबसे बड़े दबाव वाले खाते तो दिवालिया प्रक्रिया के लिए एनसीएलटी भेजने का निर्देश दिया था।

 
कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (सीआईआरपी) के तहत नियुक्त किए गए इन्सॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल को कंपनी की वित्तीय व परिचालन से जुड़ी देनदारी तय करनी होती है, लेनदारों की समिति को दावे की विस्तृत जानकारी देनी होती है, जिसका भुगतान होना है। इसके अलावा सीओसी के साथ बातचीत के बाद आईआरपी को 180 दिन के भीतर अदालत में समाधान योजना जमा करानी होती है, जिसमें सभी दावे का जिक्र होता है। ज्योति स्ट्रक्चर्स के मामले में 180 दिन की समयसीमा और 90 दिन की विस्तारित सीमा 2 अप्रैल को पूरी हो गई और कंपनी दिवालिया घोषित होने के लिए पहली बड़ी कॉरपोरेट देनदार के तौर पर पटरी पर है। इससे उधार देने वाले बैंकों को 70 अरब रुपये का नुकसान होगा।
 
एक सूत्र ने कहा, एनसीएलटी के पास एसबीआई की याचिका और स्थगन अवधि तय होने के बाद एफ जे एल्सनर का दावा लंबे समय तक रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं रहा। इसके बाद आईआरपी ने फरवरी में समाधान योजना जमा कराया, लेकिन सीओसी ने लेनदारों की बहुलांश वोटिंग के अभाव में अंतिम योजना को खारिज कर दिया। दिवालिया व ऋणशोधन नियमों के मुताबिक समाधान योजना के पक्ष में लेनदारों की समिति के सदस्यों का न्यूनतम 75 फीसदी मतदान जरूरी होता है। एस सांघी और प्राइवेट इक्विटी अधिकारी मनीष केजरीवाल व मणिपाल समूह के रंजन पई ने कंपनी में 1.5 अरब रुपये के निवेश और 15 साल में लेनदारों को 30 अरब रुपये के भुगतान का प्रस्ताव किया था। उन्होंने इसके साथ ही 2.5 अरब रुपये की कार्यशील पूंजी की मांग भी की थी और उम्मीद की थी कि नई कंपनी के लिए 10 अरब रुपये की बैंक गारंटी जारी रहेगी। इस योजना को खारिज कर दिया गया क्योंकि इसमें भारी कटौती की बात थी और बोली की पेशकश कंपनी की समापन कीमत के करीब-करीब बराबर थी।
 
सूत्रों ने कहा कि एफ जे एल्सनर ने शुरू में आईआरपी को 17 करोड़ रुपये का दावा पेश किया था, लेकिन इसका सिर्फ एक हिस्सा ही स्वीकार किया गया था। बाद में आईआरपी ने एनसीएलटी के खंडपीठ के पास शपथपत्र जमा कराया, (जो एसबीआई बनाम ज्योति स्ट्रक्चर्स के मामले की सुनवाई कर रहा है) और पूरे दावे की स्वाकार्यता के बारे में बताता है।
कीवर्ड NCLT, नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी),

  
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