सरकारी प्रतिभूतियों पर प्रतिफल 7 प्रतिशत तक

अभिजित लेले | मुंबई Apr 08, 2018 09:37 PM IST

वर्ष 2018-19 के लिए भारत सरकार की पहली बॉन्ड नीलामी सफलतापूर्वक संपन्न हुई और इससे संकेत मिले हैं कि निवेशकों की मांग मजबूत बनी रहेगी। बॉन्ड प्रतिफल कमजोर बने रहने का अनुमान है और यह निकट भविष्य में फिसल कर 7 फीसदी के स्तर पर आ सकता है। चालू वित्त वर्ष के लिए पहली बॉन्ड नीलामी शुक्रवार को आयोजित की गई और इसमें बाजार कारोबारियों की अच्छी उपस्थिति दर्ज की गई। इस नीलामी का आयोजन करने वाले आरबीआई ने प्रतिफल दर लगभग 7.15 प्रतिशत पर रखी है।
 
बॉन्ड डीलरों और अर्थशास्त्रियों का कहना है कि 2018-19 की पहली छमाही में केंद्र सरकार द्वारा कम बाजार उधारी से सकारात्मक रुझान तैयार हुआ है। बॉन्डों में निवेश के संदर्भ में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए सीमा में वृद्घि से भी मदद मिली है। इसके अलावा आरबीआई ने बैंकों को 2017-18 की तीसरी और चौथी तिमाही में हुए मार्क-टु-मार्केट (एमटीएम) नुकसान के लिए प्रावधान को चार तिमाहियों तक आगे ले जाने की अनुमति दी है। इससे बैंकों, खासकर जी-सेक (सरकारी प्रतिभूतियों) में भारी निवेश करने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बॉन्ड नीलामी में हिस्सा लेने की अनुमति मिलेगी। 
 
बैंकों के ये बॉन्ड निवेश 'अवेलेबल फॉर सेल' (एएफएस) और 'हेल्ड फॉर ट्रेडिंग' (एचएफटी) श्रेणी में शामिल हैं। इन तिमाहियों के लिए नुकसान प्रावधान को चार तिमाहियों तक बढ़ाया जा सकता है और इसकी शुरुआत उस तिमाही से मानी जाएगी जिसमें नुकसान हुआ हो। फस्र्ट रैंड बैंक के ट्रेजरर एवं प्रमुख (वैश्विक बाजार) हरिहर कृष्णमूर्ति ने कहा कि बेंचमार्क प्रतिभूति (10 वर्षीय बॉन्ड) पर प्रतिफल खासकर एफपीआई बॉन्ड सीमा की घोषणा के बाद 7 प्रतिशत को छू सकता है।  कृष्णमूर्ति के आकलन का समर्थन करते हुए एडलवाइस फाइनैंशियल सर्विसेज में फिक्स्ड इनकम एडवाइजरी के प्रमख्ुा अजय मंगलूनिया ने कहा कि हाल के समय में सामने आए कई घटनाक्रमों से बॉन्ड प्रतिफल में कमी को बढ़ावा मिलेगा और यह गिरकर 7 फीसदी के आसपास आ जाएगा। बैंकों, खासकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बाजार में पुन: सक्रियता बढ़ाने की जरूरत होगी क्योंकि उन्हें नुकसान को आगे बढ़ाने के संदर्भ में राहत मिली है। इसके अलावा मुद्रास्फीति से संबंधित दबाव भी कम होने के आसार हैं।  मार्च के शुरू तक बॉन्ड प्रतिफल तेजी के रुझान के साथ कारोबार कर रहा था और यह 5 मार्च 2018 को 7.81 फीसदी की दो वर्षीय ऊंचाई पर पहुंच गया। हालांकि तब से इसके प्रतिफल में लगभग 45 आधार अंक तक की नरमी आई है। 
 
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