सेबी ने अल्गो ट्रेडिंग के नए नियम जारी किए

बीएस संवाददाता | मुंबई Apr 09, 2018 10:06 PM IST

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने स्टॉक एक्सचेंजों की तरफ से दी जा रही को-लोकेशन सुविधा तक उचित व समान पहुंच के लिए सोमवार को नए नियम जारी किए। बाजार नियामक ने सभी एक्सचेंजों को निर्देश दिया है कि वह प्रबंधित को-लोकेशन सेवाएं मुहैया कराए, जिसके तहत छोटे ब्रोकर भी बिना किसी असुविधा के को-लोकेशन सेवाओं तक पहुंच सके। अभी ये सेवाएं उच्च लागत व तकनीक के अभाव के चलते छोटे कारबारियों की पहुंच से बाहर हैं। आने वाले समय में छोटे ब्रोकरों की भी तकनीक, हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर व थर्ड पार्टी वेंडरों से अन्य संबंधित विशेषज्ञता तक पहुंच होगी।
 
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सेबी ने सभी एक्सचेंजों को निर्देश दिया है कि वह न्यूनतम, अधिकतम व औसत विलंब अवधि के अलावा 50 व 99 फीसदी विलंब अवधि प्रकाशित करे। विलंब अवधि वह समय होती है जो मुख्य राउटर से काम पूरा करने में लगता है। मुख्य राउटर वह जगह होती है जहां को-लोकेशन ऑर्डर व गैर-कोलोकेशन ऑर्डर मिलते हैं। नियामक ने एक्सचेंजों से मुफ्त में टीबीटी (टिकट दर टिकट) डेटा फीड मुहैया कराने को कहा है। टीबीटी डेटा पूरे ऑर्डर बुक की विस्तृत जानकारी देता है, जिसमें सौदे में कुछ जोडऩे, संशोधित करने और ऑर्डर को रद्द करने के अलावा रियल टाइम के आधार पर कारोबार का ब्योरा होता है। सेबी ने उच्च ऑर्डर टु ट्रेड रेश्यो (ओटीआर) पर अर्थदंड को सख्त बनाया है ताकि अल्गो ट्रेडर अंतिम ट्रेडेड कीमत के करीब और ज्यादा ऑर्डर देने के प्रति हतोत्साहित हों।
 
सख्त निगरानी सुनिश्चित करने के लिए सेबी ने स्टॉक एक्सचेंजों से कहा है कि उनकी तरफ से मंजूर हर अल्गोरिद्म को वह यूनिट आइडेंटिफायर आवंटित करे। नियामक ने बाजार के प्रतिभागियों से कहा है कि वह सॉफ्टवेयर व अल्गोरिद्म्स की टेस्टिंग की प्रक्रिया को मजबूत बनाए।
कीवर्ड sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),

  
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