कोर्ट में बिनानी के परिचालन लेनदार

अभिषेक रक्षित | कोलकाता Apr 10, 2018 09:53 PM IST

दिवालिया बिनानी सीमेंट के 10 परिचालन लेनदारों ने स्वस्तिक कोल कॉरपोरेशन की अगुआई में सर्वोच्च न्यायालय में आवेदन कर डालमिया भारत सीमेंट की अगुआई वाले कंसोर्टियम की समाधान योजना पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की है, जो एनसीएलटी की मंजूरी पाने के करीब है। इसके अतिरिक्त लेनदार चाहते हैं कि उनके साथ भी वित्तीय लेनदारों के समान व्यवहार किया जाए। शुक्रवार को इन लेनदारों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील बिनानी इंडस्ट्रीज की अपील के समर्थन में दलील देंगे, जो अदालत से बाहर मामले के निपटान की मंजूरी मांग रही है।

 
याचिका में परिचालन लेनदारों ने अपील की है कि अदालत एनसीएलटी के कोलकाता पीठ को बैंक ऑफ बड़ौदा बनाम बिनानी सीमेंट के मामले में आगे कदम न उठाने का निर्देश दे, जो वहां लंबित है। साथ ही वह इससे संबंधित किसी समाधान योजना को न तो मंजूरी दे और न ही उसका क्रियान्वयन करे। इसके अलावा इसने बिनानी सीमेंट के लेनदारों की समिति की बैठक में शामिल करने की अनुमति मांगी है, साथ ही ऐसी बैठक में उठने वाले मामलों पर मतदान का अधिकार भी मांगा है। दिवालिया संहिता के मौजूदा ढांचे के तहत परिचालन से जुड़े लेनदार सीओसी का हिस्सा नहीं होते और उनके पास मतदान का अधिकार भी नहीं होता।
 
उनकी अपील इस आरोप पर आधारित है कि 7 अरब रुपये के दावे की जगह उन्हें डालमिया भारत की अगुआई वाले कंसोर्टियम की योजना से महज 5.03 अरब रुपये मिल रहे हैं, जिसे सीओसी ने मंजूरी दे दी है और रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने उन्हें यह नहीं बताया है कि उनके दावे के खिलाफ अंतत: कितनी रकम की मंजूरी दी गई। स्वस्तिक कोल कॉरपोरेशन का दावा 88.59 करोड़ रुपये का है और इस कंपनी के मालिक हितेश बिंदल को उम्मीद है कि सर्वोच्च न्यायालय बिनानी सीमेंट के मामले की सुनवाई के दौरान असाधारण फैसला देगा। उन्होंने कहा, हमने सर्वोच्च अदालत से संपर्क साधा है ताकि हमारे हितों का भी ध्यान रखा जा सके और परिचालन लेनदारों को उनका बकाया मिल सके। हम डालमिया भारत 
 
सीमेंट की योजना का विरोध कर रहे हैं क्योंकि यह हमारे लिए अनुचित है। बिंदल और छह अन्य परिचालन लेनदार सीओसी की बैठक में हिस्सा लेना चाहते हैं ताकि वे यह समझ सकेंकि किस तरह से पुनर्भुगतान होगा या इसकी योजना किस तरह बनाई गई है। साथ ही वे यह भी चाहते हैं कि आने वाले मसले या प्रस्ताव पर उनकी भी राय ली जाए। परिचालन लेनदार 76 अरब रुपये के अल्ट्राटेक सीमेंट के समर्थन वाले बिनानी इंडस्ट्रीज के अदालत से बाहर निपटान के प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं, जो सभी लेनदारों को उचित दावे के पूरे भुगतान का वादा कर रही है।
 
दिलचस्प रूप से बिनानी इंडस्ट्रीज ने परिचालन लेनदारोंं को 5.03 अरब रुपये के भुगतान की पेशकश की है, जो डालमिया भारत की पेशकश के बराबर है, लेकिन दिवालिया समाधान प्रक्रिया का सामना कर रही कंपनी के प्रवर्तकों ने कुछ परिचालन लेनदारों को बाकी भुगतान का आश्वासन दिया है, जो उनके पूरे बकाए को कवर करता है। अगर डालमिया भारत सीमेंट का प्रस्ताव अंतत: सिरे चढ़ता है तो बिंदल को 88.59 करोड़ रुपये का पांच फीसदी मिलेगा, लेकिन अगर बिनानी इंडस्ट्रीज का प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो बिंदल को बिनानी सीमेंट से पूरी रकम मिल जाएगी। 5 अप्रैल को डालमिया भारत सीमेंट ने केंद्रीय सतर्कता आयोग को पत्र लिखकर बिनानी सीमेंट के अधिग्रहण मामले की जांच की मांग की थी।
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