मार्च तिमाही में होगा अग्रणी सरकारी बैंकों को घाटा

श्रीपद एस ऑटे | मुंबई Apr 10, 2018 09:55 PM IST

वित्त वर्ष 2017-18 की जनवरी-मार्च तिमाही अग्रणी सरकारी बैंकों के लिए शायद ही अच्छी रहेगी। इन बैंकों पर धोखाधड़ी, गैर-निष्पादित आस्तियों पर भारतीय रिजर्व बैंक के नए नियम, बॉन्ड प्रतिफल में उतारचढ़ाव और नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के पास पहुंचे मामलों में बहुत ज्यादा प्रगति न होने का असर पड़ेगा। तीन प्रमुख सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नैशनल बैंक और बैंक ऑफ इंडिया चौथी तिमाही में नुकसान दर्ज करेंगे। बैंक ऑफ बड़ौदा और निजी कॉरपोरेट लेनदारों का शुद्ध लाभ में ज्यादा गिरावट की संभावना है।
 
उच्च उधारी लागत (कुल उधारी के प्रतिशत के तौर पर प्रावधान) का असर इन बैंकों के मुनाफे पर पड़ा है। एनपीए के नियमों पर प्रगति और एनसीएलटी से इन बैंकोंं को लंबी अवधि में फायदा मिलेगा, लेकिन इन्हें चौथी तिमाही में अतिरिक्त प्रावधान भी करना होगा। इसकी वजह एनपीए में इजाफा या कुछ मामलों में कर्ज की ज्यादा रकम बट्टे खाते में डालना है। दूसरा, धोखाधड़ी से कुछ बैंकों पर प्रतिकूल असर पड़ा है। मुख्य पीडि़त पीएनबी है और यह अतिरिक्त प्रावधान करेगा। एमके ने चौथी तिमाही के नतीजों की पूर्व समीक्षा में कहा है, संपत्ति गुणवत्ता के मामले पर पीएनबी सबसे खराब हालात में होगा क्योंकि इसने 135 अरब रुपये की धोखाधड़ी के असर को समाहित कर लिया है, जिसकी औपचारिक घोषणा फरवरी में हुई।
 
किसी घोटाले के लिए बैंकों को अपनी बैलेंस शीट में 100 फीसदी प्रावधान करना होता है। एमके के विश्लेषकों ने कहा, बैंक ऑफ बड़ौदा, पीएनबी, केनरा बैंक और एसबीआई दूरसंचार कंपनियों को दिए गए कर्ज के चलते प्रभावित हो सकते हैं, जिन्होंने दिवालिया के लिए आवेदन किया है। इसकी वजह यह है कि बैंकों को एनसीएलटी पहुंचे मामलों में 50 फीसदी का प्रावधान करना होगा। बैंकों को मार्क टु मार्केट नुकसान (एमटीएम) के लिए प्रावधान को चार तिमाही में फैलाने की आरबीआई के अनुमति से सरकारी बैंकोंं को कुछ राहत मिलेगी। मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषकों ने कहा, तीसरी तिमाही के बाद बॉन्ड का प्रतिफल बढ़ा है, ऐसे में चौथी तिमाही में एमटीएम के प्रावधान का असर नरम रह सकता है क्योंकि आरबीआई ने बैंकों को अपना नुकसान विभिन्न तिमाहियों में फैलाने की अनुमति दी है।
 
हालांकि सरकारी बैंकों व निजी कॉरपोरेट लेनदारों की उधारी लागत चौथी तिमाही में बढ़े रहने की संभावना है। इसके अतिरिक्त आरबीआई की डायवरजेंस रिपोर्ट का बैंकों की आय पर अतिरिक्त असर दिख सकता है। उधारी लागत के अलावा कंपनियों की उधारी की सुस्त रफ्तार (फरवरी में एक साल पहले के मुकाबले महज एक फीसदी बढ़ा) का भी सरकारी बैंकों व निजी कॉरपोरेट लेनदारों पर असर पड़ेगा। चौथी तिमाही की पूर्व समीक्षा रिपोर्ट में वित्तीय सेवा इकाई एडलवाइस ने कहा है, हमारा मानना है कि बैंकों का प्रदर्शन चौथी तिमाही में सुस्त रह सकता है, खास तौर से कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करने वाले बैंकों का। इसकी वजह उच्च उधारी लागत और राजस्व की धीमी रफ्तार है।
 
निजी बैंकों के लिए चौथी तिमाही शानदार होगी, जिसकी वजह खुदरा कर्ज की रफ्तार में मजबूती (फरवरी में 20 फीसदी), संपत्ति की स्थिर गुणवत्ता और मार्जिन में सुधार है। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज की रिपोर्ट में कहा गया है, मध्यम आकार के निजी क्षेक्ष के बैंकों का प्रदर्शन समकक्ष के मुकाबले बेहतर रहेगा क्योंकि इसकी बाजार हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है, संपत्ति की गुणवत्ता स्थिर रही है और मार्जिन या तो स्थिर रही है या फिर इसमें सुधार हुआ है। एचडीएफसी बैंक, इंडसइंड बैंक और आरबीएल बैंक अपने शुद्ध लाभ में साल दर साल के हिसाब से 20 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज कर सकते हैं।
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