भूषण स्टील पर एनसीएलटी ने आदेश सुरक्षित रखा

भाषा | नई दिल्ली Apr 12, 2018 09:44 PM IST

ऋणशोधन एवं दिवालिया अधिकरण (एनसीएलटी) ने ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) द्वारा कर्ज के बोझ से दबी भूषण स्टील की टाटा स्टील को बिक्री करने को चुनौती देने वाली याचिका पर आज अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। एनसीएलटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एम एम कुमार की अगुवाई वाली एनसीएलटी की प्रधान पीठ ने इस मामले की सुनवाई को पूरा करने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रखा।  भूषण स्टील की ऋणदाताओं की समिति ने टाटा स्टील की 35,200 करोड़ रुपये की पेशकश और साथ में 12.27 फीसदी इक्विटी की पेशकश को मंजूर कर लिया है। हालांकि, भूषण स्टील के कुछ कर्मचारियों ने इस फैसले को एनसीएलटी के समक्ष चुनौती देते हुए कहा कि दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की धारा 29 (ए) के तहत टाटा स्टील बोली लगाने की पात्र नहीं है। 
 
सुनवाई के दौरान टाटा स्टील की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर ने कहा कि भूषण स्टील की सीओसी ने उसकी पेशकश को आईबीसी के नियमों के अनुरूप पाया है। उन्होंने टाटा स्टील द्वारा भूषण स्टील के भूषण एनर्जी लि. के साथ बिजली खरीद करार को निपटान योजना में शामिल नहीं करने के फैसले को भी उचित ठहराया क्योंकि इसकी दरें काफी ऊंची थीं। 1 फरवरी, 2018 को भूषण स्टील पर कुल 57,160 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था। नायर ने कहा, हम इस तरह के अनुबंध को बोझ नहीं ले सकते। इसे समाप्त करना होगा। उन्होंने कहा कि इस समझौते में बीईएल की पूरी बिजली को खरीदने का बाध्यकारी समझौता किया गया है, फिर चाहे इसका इस्तेमाल हो अथवा नहीं हो। 
कीवर्ड bhusan steel, NCLT,

  
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