दीर्घावधि बॉक्साइट सौदे से वेदांत बचाएगी 800 रुपये प्रति टन

दिलीप सत्पथी | भुवनेश्वर Apr 12, 2018 09:45 PM IST

नियमगिरि में विफलता के बाद अपनी लांजीगढ़ एल्युमिना रिफाइनरी के लिए कच्चा माल जुटाने के लिए कई वर्षों तक संघर्ष करने के बाद वेदांत अपने संयंत्र के लिए बॉक्साइट की आपूर्ति के लिए आखिरकार राज्य सरकार के स्वामित्व वाली ओडिशा माइनिंग कॉरपोरेशन (ओएमसी) के साथ सौदा करने में कामयाब हो गई है।  इसके परिणामस्वरूप, वेदांत को चालू वित्त वर्ष में ओएमसी से उस कीमत पर 8 लाख टन बॉक्साइट प्राप्त होने की उम्मीद है जो मौजूदा समय में लांजीगढ़ संयंत्र स्थल पर बॉक्साइट का संपूर्ण लागत की तुलना में 700 से 800 रुपये प्रति टन सस्ती होने का अनुमान है।

 
देश में बॉक्साइट की पहली नीलामी में वेदांत ने हिंडाल्को और अनरक एल्युमीनियम के साथ ओएमसी द्वारा कोरापुट जिले में नई कोडिंगामली खदानों 1.9 लाख टन बॉक्साइट हासिल की है।  इस प्रक्रिया में, ओएमसी ने वेदांत के लिए बॉक्साइट की दीर्घावधि आपूर्ति के लिए दर तय की है, जो खदान निकास पर 465 रुपये प्रति टन होने का अनुमान है जिसमें राज्य सरकार को चुकाया जाने वाला रॉयल्टी भुगतान और डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) तथा नैशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट (एनएमईटी) फंड के लिए सांविधिक योगदान शामिल नहीं है। 
 
नीलामी में जहां हिंडाल्को की दो इकाइयों (बेलगांव और मुरी) ने 462 रुपये प्रति टन के भाव के साथ 1.05 लाख टन मैटेरियल हासिल किया, वेदांत ने समान दर पर 20,000 टन बॉक्साइट बुक कराया। अन्य प्रतिभागी आंध्र प्रदेश की अनरक एल्युमीनियम ने 472 रुपये प्रति टन की कीमत पर शेष 65,000 टन बॉक्साइट उठाया। नालको और हिंडाल्को जैसे वेदांत के प्रतिस्पर्धियों के लिए खनन लागत 350 रुपये प्रति टन के आसपास है। नालको और हिंडाल्को की अपनी स्वयं की खदानें भी हैं।  बॉक्साइट की खदान निकास पर लागत (पिटहेड कोस्ट) डीएमएफ और एनएमईटी के लिए रॉयल्टी के भुगतान और योगदान के बाद 200 रुपये प्रति टन तक और बढऩे का अनुमान है। 
कीवर्ड aluminium, OMC, vedanta, hindalco,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक