'साल भर में 80 डॉलर प्रति बैरल पहुंच सकता है तेल'

पुनीत वाधवा |  Apr 12, 2018 09:48 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा सीरिया पर मिसाइल दागने की धमकी के बाद बुधवार को तेल के दाम 3 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गए। लंदन की एसऐंडपी ग्लोबल प्लैट्स के एसोसिएट डायरेक्टर पॉल हिकिन ने तेल बाजार के भविष्य पर पुनीत वाधवा से बात की। प्रमुख अंश...

 
साल भर में तेल के दाम कहां तक जा सकते हैं?
 
तेल बाजार इस समय बहुत संतुलित चल रहा है, लेकिन तेल के दाम बढऩे का जोखिम है। तेल उत्पादक देशोंं जैसे वेनेजुएला और ईरान में अनिश्चितता और यूएस शेल के बहाल होने की कम संभावना तथा ओपेक और गैर ओपेक के 24 देशोंं द्वारा उत्पादन में कटौती, मांग में बढ़ोतरी की वजह से कीमतों में तेजी आ सकती है। बहरहाल भौगोलिक अनिश्चितताओं की कोई भी उपेक्षा नहींं कर सकता है।
 
सऊदी चाहता है कि अरामको का आईपीओ लाने के पहले तेल के दाम 80 डॉलर प्रति बैरल हो जाएं। क्या आपको लगता है कि आगामी एक साल में ऐसा हो सकता है?
 
हम उम्मीद करते हैं कि कैलेंडर वर्ष 2018 की दूसरी छमाही में तेल बाजार बहुत संतुलित चलेगा। इसकी वजह से कीमतें बढ़ेंगी। अगले 1 साल में कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। 
 
सऊदी अरामको ने भारत की प्रस्तावित रिफाइनरी में हिस्सेदारी ली है। इससे भारत की मौजूदा कंपनियों पर क्या असर होगा?
 
इस सौदे से भारत के तेल व गैस उद्योग के विविधीकरण की प्रतिबद्धता का पता चलता है। यह दीर्घावधि उद्यम है और रिफाइनरी 2025 में चालू होगी तब तक तेल व गैस बाजार की स्थिति बिल्कुल अलग होगी। तब तक भारत के कारोबारियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। 
 
सीरिया का तेल बाजार पर क्या असर हो सकता है?
 
मौजूदा खींचतान से स्वाभाविक रूप से अनिश्चितता बढ़ी है और धारणा पर असर पड़ रहा है। भू राजनैतिक जोखिम, जिसमें लाल सागर में सऊदी तेल टैंकर पर असफल हमला शामिल है, का बाजार पर असर पड़ सकता है। 
 
कारोबारी जंग को तेल बाजार किस तरह से देख रहा है?
 
तेल बाजार पर अमेरिका की भूमिका का बहुत असर होगा। चीन और अमेरिका के बीच कारोबारी जंग से तेल की वैश्विक मांग यहां तक कि अमेरिकी निर्यात के लक्ष्य पर असर पड़ सकता है। 
कीवर्ड CRUDEOIL, market,

  
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