रूसी कंपनियों संग सात समझौते

टी ई नरसिम्हन | चेन्नई Apr 13, 2018 09:48 PM IST

रूस से खरीदे गए रक्षा उपकरणों के कलपुर्जे की देश में उपलब्धता पर भारत और रूस के बीच एक साल तक चली बातचीत के बाद चेन्नई में आयोजित रक्षा प्रदर्शनी में शुक्रवार को भारतीय व रूसी कंपनियों ने सात एमओयू पर हस्ताक्षर किए, जो देश में कलपुर्जे बनाने के लिए है। रक्षा मंत्रालय ने सभी प्रमुख प्लेटफॉर्र्मों को कवर करने वाले 48 आइटम की पहचान की है, जिसका निर्माण रूस के सहयोग से भारत में किया जा सकता है। इससे जिन उत्पादों को सहारा मिलेगा उनमें हेलिकॉप्टर, विमान, नौसेना के सिस्टम व अन्य शामिल हैं।

 
भारत-रूस का तीसरा सैन्य औद्योगिक कॉन्फ्रेंस रक्षा प्रदर्शनी में आयोजित हुआ और इसमें भारतीय विनिर्माता व रूस के मूल उपकरण विनिर्माताओं ने अंतिम चर्चा की और सहयोग के लिए सात एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस एमओयू में लार्सन ऐंड टुब्रो लिमिटेड और जॉइंट स्टॉक कंपनी (भारतीय नौसेना के विभिन्न कार्यक्रमों व एफआरसीवी के लिए) के साथ हुए एमओयू शामिल हैं। अनंत टेक्नोलॉजिज और जेएससी कंसर्न रेडियो इलेक्ट्रॉनिक टेक्नोलॉजिज संग करार और स्पेस एरा व केआरईटी करार भी इस मौके पर हुए। अनंत टेक्नोलॉजिज ने रिसर्च ऐंड प्रॉडक्शन कॉरपोरेशन के साथ एमओयू भारत में टी 90 व टी 72 टैंकों के लिए तकनीकी व लॉजिस्टिक सहायता केंद्र बनाने के लिए हुए।
 
रूसी कंपनी जेएससी एजीएटी ने ओस्करोसोमैरीन व क्रांस्ने डिफेंस के साथ करार फ्रेगर रेडार की बिक्री के बाद दी जाने वाली सहायता के अलावा फ्रेगट रेडार के आधुनिकीकरण के लिए किया। रक्षा मंत्रालय के सचिव (रक्षा उत्पादन) अजय कुमार ने कहा है कि पहला कॉन्फ्रेंस दिल्ली में मार्च 2017 में हुआ था, जिसका लक्ष्य रूस के रक्षा उपकरणों के रखरखाव आदि से जुड़ी समस्या दूर करना था। यह मदद देश में कलपुर्जे उपलब्ध कराने के जरिए दी जानी थी ताकि मेक इन इंडिया की पहल को मजबूती मिल सके। 
 
तकनीक का हस्तांतरण, संयुक्त उद्यम की स्थापना, बौद्धिक संपदा अधिकार आदि से जुड़े कुछ प्रक्रियागत मसलों पर बैठक में चर्चा हुई और समाधान निकालने की कोशिश की गई। चार प्लेटफॉर्म 23 मार्क आई एयरक्राफ्ट, आईएनएस विक्रमादित्य, मिग 29 के एयरक्राफ्ट और एमआईआई एमआई 17 हेलिकॉप्टर की पहचान भारत में कलपुर्जे बनाने के लिए की गई है और यह काम रूसी ओईएम के साथ तकनीक के हस्तांतरण, साझेदारी व संयुक्त उद्यम के जरिए होगी। अगस्त 2017 में हुए दूसरे कॉन्फ्रेंस में भारतीय व रूसी अधिकारियों के अलावा करीब 39 भारतीय कंपनियां व 32 रूसी कंपनियां शामिल हुई। 
 
अशोक लीलैंड को रक्षा मंत्रालय से बड़ा ऑर्डर
 
हिंदुजा समूह की प्रमुख कंपनी अशोक लीलैंड को रक्षा मंत्रालय से 1 अरब रुपये का शुरुआती ऑर्डर मिला है। इसके तहत कंपनी को हाई मोबिलिटी 10 गुना 10 व्हीकल (एचएमवी10 गुना 10) की आपूर्ति करनी है। यह पूरी तरह भारतीयों द्वारा विकसित स्वदेशी वाहन है। भारतीय सेना को स्मर्च रॉकेट की ढुलाई के लिए एचएमवी 10 गुना 10 वाहन की जरूरत है। अशोक लीलैंड के प्रमुख (रक्षा कारोबार) अमनदीप सिंह ने कहा, 'पिछले साल हमने 15 निविदा में भाग लिया था जिसमें से हमें 12 में कामयाबी मिली। यह हमारे लिए काफी अहम जीत है। इससे अन्य मिसाइल वाहकों, मिसाइल लॉन्चर, मॉड्यूल ब्रिज एवं अन्य महत्त्वपूर्ण ढुलाई के लिए मोबिलिटी प्लेटफॉर्म की आपूर्ति में अशोक लीलैंड के लिए नए अवसर खुलेंगे। इस ऑर्डर से पता चलता है कि हम रक्षा मोबिलिटी क्षेत्र में अग्रणी हैं और देश की सेवा में सेना के साथ हमारी भागीदारी जारी रहेगी।' 
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