मेड इन इंडिया हैंडसेट के विनिर्माण पर जोर

सुरजीत दास गुप्ता और अर्णव दत्ता | नई दिल्ली Apr 13, 2018 09:49 PM IST

भारत में मोबाइल हैंडसेट बनाने वाली कंपनियों की तादाद लंबी और आकर्षक दिख रही है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मोबाइल हैंडसेट उद्योग की तमाम कंपनियों ने भारत में विनिर्माण की पहल की हैं।   ठेका पर विनिर्माण करने वाली ताइवान की कंपनी फॉक्सकॉन महाराष्ट्र में 326.46 अरब रुपये की लागत से एक बड़ा संयंत्र स्थापित करने के लिए प्रतिबद्घ है। वहीं प्रतिस्पर्धी विस्ट्रोन 65.29 अरब रुपये के निवेश से बेंगलूरु में एक संयंत्र स्थापित करने पर विचार कर रही है। चीनी और दक्षिण कोरिया के खिलाड़ी भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं। श्याओमी 32.64 अरब रुपये निवेश करने जा रही है और 50 से अधिक विक्रेताओं को तैयार किया है, जिनके जरिये कुछ सालों में वह 163.23 अरब रुपये की कमाई करेगी।
 
ओप्पो ने एक दूसरे संयंत्र के लिए कई अरब रुपये की योजना बनाई है तो जिओनी एक महत्त्वाकांक्षी निवेश के साथ विनिर्माण को गति देने के लिए तैयार है। सैमसंग ने भी एक नए संयंत्र के लिए बड़े निवेशों की घोषणा की है।  स्पाइस और लावा जैसी घरेलू कंपनियां भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्त्वाकांक्षी मेक इन इंडिया योजना में योगदान के लिए आगे आ रही हैं। अब तक करीब 120 मोबाइल हैंडसेट और उपकरण विनिर्माताओं ने भारत में विनिर्माण के लिए 450 अरब रुपये से अधिक का निवेश करने के लिए प्रतिबद्घता जताई है। हालांकि फिलहाल जमीन पर निवेश उतना उत्साहजनक नहीं दिख रहा है। 
 
मोबाइल हैंडसेट विनिर्माताओं के संगठन इंडियन सेल्युलर एसोसिएशन (आईसीए) के मुताबिक चरणबद्घ विनिर्माण कार्यक्रम (पीएमपी) के तहत 2018 के अंत तक मोबाइल हैंडसेट कंपनियों द्वारा कुल पूंजी निवेश 57 अरब रुपये पर पहुंच सकती है जिसका एक बड़ा हिस्सा इसी साल आने वाला है। पिछले वर्ष उनका कुल निवेश 21 अरब रुपये के आसापास रहा था। लेकिन ताजे निवेश (जिसमें से 35 अरब रुपये इस साल आने की उम्मीद है), में भी लक्ष्य की कमी की वजह से घट सकता है। इसकी वजह है कि ज्यादातर विनिर्माता चीन और दक्षिण कोरिया से केवल अपना उपकरण और असेंबलिंग लाइन को ही स्थानांतरित करने की योजना बना रही हैं। वे नए संयंत्र में पैसा लगाने के प्रति अनिच्छुक हैं जिससे कि बड़े निवेश आ सकते थे। अब तक मुख्य तौर पर असेंबलिंग लाइन और उपकरणों को स्थापित करने के लिए निवेश किए गए हैं।
 
इनमें बैटरी पैक, चार्जर, हेडसेट या कीपैड शामिल हैं। हालांकि विनिर्माताओं ने फोन की असेंबलिंग के लिए उपकरण खरीदने हेतु 50 अरब रुपये की अतिरिक्त कार्यशील पूंजी रखी है। मोबाइल हैंडसेट विनिर्माण को लेकर सरकार का लक्ष्य तर्कहीन है। सरकार 2019 तक भारत में 46 अरब डॉलर (3 लाख करोड़ रुपये) मूल्य के 50 करोड़ हैंडसेट का विनिर्माण चाहती है। साथ ही सरकार चाहती है कि इससे 15 लाख नौकरियां भी सृजित की जाएं। देश में 2017 तक 1.32 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 22.5 करोड़ मोबाइन फोन का उत्पादन किया गया है। महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए अब केवल दो साल बचे हैं। विनिर्माता पीएमपी के तहत तय किए गए सालाना लक्ष्य को भी पूरा करने में भी पिछड़ गए। पीएमपी 2015 में शुरू किया गया था। 
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