विदेशी बॉन्डों की पुनर्खरीद

अभिजित लेले | मुंबई Apr 13, 2018 09:50 PM IST

सार्वजनिक क्षेत्र का आईडीबीआई बैंक 1.5 अरब डॉलर के बॉन्डों की पुनर्खरीद की योजना बना रहा है क्योंकि वह बैंक की कायापलट योजना के तहत अपने परिचालन को व्यावहारिक बनाने की कोशिश के तहत दुबई की शाखा बंद कर रहा है। ये बॉन्ड अगले 2-2.5 सालों में रिडम्पशन के लिए आने वाले हैं। पुनर्खरीद की योजना पर काम चल रहा है। बैंकिंग सूत्रों ने कहा, ये बॉन्ड एकबारगी नहीं खरीदे जाएंगे। आईडीबीआई के अधिकारी ने इस कदम की पुष्टि की, लेकिन विस्तृत जानकारी देने से मना कर दिया। बैंक यह सुनिश्चित करेगा कि ग्राहकों व निवेशकों को बिना किसी अवरोध से सेवा प्रदान की जाएगी। यह गतिविधि एक से तिमाहियों में फैली होगी और पुनर्खरीद छोटे-छोटे चरणों में होगी। बैंकिंग सूत्रों ने कहा, ये बॉन्ड बैंक के खाते में देनदारी का हिस्सा हैं।
 
सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकोंं को अपने विदेशी परिचालन को एकीकृत करने का निर्देश दिया है। इस प्रगति का मतलब है विदेश में कई शाखाएं और कार्यालय या तो बंद कर दिए जाएंगे या फिर दूसरी के साथ इसका विलय कर दिया जाएगा। केनरा बैंक अपनी तीन विदेशी शाखाओं लिस्टर (ब्रिटेन), बहरीन और शांघाई को बंद कर रहा है और रूस में एसबीआई के संयुक्त उद्यम की 50 फीसदी हिस्सेदारी बेच रहा है। बैंक का यह कदम विदेशी शाखाओं के नेटवर्क को उपयुक्त बनाने का हिस्सा है। बैंक अपनी शाखाओं के परिचालन, उनकी बहाली आदि पर फैसला वाणिज्यिक आधार पर करता है। संसद में सवाल के जवाब में सरकार ने कहा था कि सरकारी बैंक की 159 शाखाएं विदेश में परिचालित हो रही हैं और इसमें से 41 शाखाएं वित्त वर्श 2016-17 में नुकसान में रही।
 
दुबई में इसकी शाखा पहली विदेशी शाखा है जो दुबई इंटरनैशनल फाइनैंशियल सेंटर (डीआईएफसी) में है और इसने परिचालन के सात साल पूरे कर लिए हैं। गुजरात के इंटरनैशनल फाइनैंस टेक सिटी (गिफ्ट सिटी) के इंटरनैशनल फाइनैंशियल सर्विसेज सेंटर (आईएफएससी) में इसका आईएफएससी बैंकिंग यूनिट है। इन शाखाओं के जरिये बैंक कई कॉरपोरेट बैंकिंग सेवाएं देती है, जिसमें बाह्य वाणिज्यिक उधारी, विदेशी मुद्रा में कर्ज, ईसीबी/एफसीएल का सिंडिकेशन और ट्रेड फाइनैंस प्रॉडक्ट शामिल है ताकि भारतीय क्लाइंटों को अपने भारतीय परिचालन व विदेशी उद्यमों के लिए रकम की जरूरतेंं पूरी हो सके। देसी मोर्चे पर आईडीबीआई बैंक ने टियर-1 बॉन्ड को वापस लिया है। आईडीबीआई बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, देना बैंक ने 109 अरब रुपये के ऐसे बॉन्ड बाजार से तब वापस लिए जब सरकार ने इन्हें ऐसा करने के लिए उत्साहित किया। इन कदमों से ब्याज लागत में बचत की संभावना है।
 
घाटा उठाने वाली कई अन्य सरकारकी बैंकों की तरह आईडीबीआई बैंक ने अपनी बैलेंस शीट को मजबूत बनाने के लिए गैर-प्रमुख परिसंपत्तियां बेची है। यह बैंक आरबीआई की त्वरित कार्रवाई वाली योजना (पीसीए) के दायरे में है। बैंंक ने वित्तीय संस्थानों मसलन नैशनल स्टॉक एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया की हिस्सेदारी बेची है। बैंक ने 9 अरब रुपये में वाणिज्यिक इमारत बेची है और इस तरह से गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों के जरिए कुल बिक्री वित्त वर्ष 2018 में 41 अरब रुपये पर पहुंचा दी है। इसके अलावा सरकार ने नकदी की किल्लत झेल रहे इस बैंक को पुनर्पूंजीकरण के तहत 106.1 अरब रुपये उपलब्ध कराए हैं, जो विभिन्न सरकारी बैंकों के मुकाबले सबसे ज्यादा है। लेकिन ये कदम अपर्याप्त नजर आ रहे हैं क्योंकि बैंक की गैर-निष्पादित आस्तियां दिसंबर 2017 में 293.5 अरब रुपये थी, जो इसकी शुद्ध उधारी का 16 फीसदी है।
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