एयर इंडिया: एतिहाद की एडीएजी से बातचीत

अरिंदम मजूमदार और अनीश फडणीस | नई दिल्ली/मुंबई Apr 13, 2018 09:52 PM IST

खाड़ी क्षेत्र की प्रमुख विमानन कंपनी एतिहास सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के लिए बोली लगाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए वह किसी प्रमुख भारतीय उद्योग समूह के साथ साझेदारी करने की संभावनाएं तलाश रही है। इसी क्रम में एतिहाद ने अनिल अंबानी के स्वामित्व वाले रिलायंस समूह (एडीएजी) से संपर्क साधा है।  केंद्र सरकार ने एयर इंडिया में 76 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री के लिए निजी क्षेत्र की विमानन कंपनियों से अभिरुचि पत्र आमंत्रित की है। इस बिक्री में सहायक कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस में 100 फीसदी हिस्सेदारी और ग्राउंड हैंडलिंग संयुक्त उद्यम एआईएसएटीएस में 50 फीसदी हिस्सेदारी भी शामिल हैं। 

 
इस मामले से अवगत सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिलहाल शुरुआती चरण में है। एक सूत्र ने कहा, 'एयर इंडिया के लिए बोली लगाने के उद्देश्य से एतिहाद साझेदारों की तलाश कर रही है ताकि एक कंसोर्टियम बनाया जा सके। इसी क्रम में वह फिलहाल अनिल अंबानी समूह सहित अन्य कंपनियों से बातचीत कर रही है।' हो सकता है कि इस बातचीत का नतीजा साझेदारी के रूप में न निकले लेकिन इससे एयर इंडिया में विदेशी विमानन कंपनियों और भारतीय उद्योग जगत की दिलचस्पी का पता चलता है। 
 
इस मामले के करीबी सूत्रों के अनुसार, ब्रिटिश एयरवेज और सिंगापुर एयरलाइंस जैसी तमाम वैश्विक विमानन कंपनियां एयर इंडिया में मौजूद निवेश संभावनाओं का आकलन कर रही हैं। साथ ही इस सौदे के लिए उनकी नजर किसी उपयुक्त साझेदारी पर भी है। यदि यह सौदा होता है तो यह किसी भारतीय विमानन कंपनी में एतिहाद का दूसरा निवेश होगा। इससे पहले 2007 में एतिहाद ने निजी क्षेत्र की प्रमुख विमानन कंपनी जेट एयरवेज में 26 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी।  एक अन्य सूत्र ने कहा, 'जेट एयरवेज द्वारा एयर फ्रांस-केएलएम के साथ साझेदारी को तवज्जो दिए जाने के बाद जेट के साथ ऐतिहाद का संबंध बेहतरीन नहीं दिख रहा है। लेकिन एतिहाद भारतीय बाजार पर अपनी पकड़ कमजोर नहीं करना चाहती है और इसलिए वह इस अवसर का आकलन कर रही है।'
 
पिछले साल नवंबर में हस्ताक्षरित समझौता पत्र के अनुसार, एयर फ्रांस-केएलएम और जेट एयरवेज के बीच संयुक्त उद्यम के तहत भारत-एम्सटर्डम और भारत-पेरिस मार्गों पर यात्री यातायात राजस्व साझेदारी का प्रावधान है। उन्नत वाणिज्यिक साझेदारी के तहत इसमें सामान्य कारोबारी एवं ट्रैवल एजेंसी के अनुबंध सहित बिक्री एवं विपणन संबंधी करार भी शामिल होते हैं।  मीडिया खबरों से पता चलता है कि अनिल अंबानी इससे पहले खुद के दम पर अथवा किसी मौजूदा विमानन कंपनी में निवेश के जरिये एक विमानन कंपनी शुरू करने की संभावनाएं तलाश चुके हैं।
 
रिलायंस और एतिहाद दोनों ने इस बाबत जानकारी के लिए भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया। हालांकि रिलायंस समूह के एक सूत्र ने कहा कि खस्ताहाल वित्तीय स्थिति को देखते हुए ऐसा नहीं लगता है कि समूह एयर इंडिया के लिए बोली लगाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब समूह की वित्तीय स्थिति अच्छी नहीं है, वह किसी नए कारोबार में नहीं उतर सकता है। विमानन सलाहाकार फर्म सीपीए ने कहा कि एतिहाल जल्द ही जेट एयरवेज में अपनी हिस्सेदारी बेच सकती है। हालांकि दोनों विमानन कंपनियों ने ऐसी किसी योजना से इनकार किया है। एयर इंडिया के लिए बोली लगाने की पात्रता के लिए सरकार ने एक निश्चित शुद्ध हैसियत निर्धारित की है। लेकिन भारी घाटे के बावजूद अनिल अंबानी समूह उस पात्रता मानदंडों पर खरा है।
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