कई वजहों से बढ़ रहा है बॉन्ड प्रतिफल

अनूप रॉय | मुंबई Apr 13, 2018 09:55 PM IST

बॉन्ड बाजार ने एक बार फिर सबको चकित किया है।  इस सप्ताह 10 साल का बॉन्ड प्रतिïफल 7.54 प्रतिशत पर बंद हुआ। मौद्रिक नीति की घोषणा के दिन यह 7.13 प्रतिशत पर था, जो उसके बाद लगातार बढ़ रहा है।  भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा था कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक सरकारी बॉन्डों में 1 प्रतिशत अंक तक ज्यादा खरीदारी कर सकेंगे, लेकिन यह 2018-19 में दो चरणों में होगा।  इसमें बढ़ोतरी बाजार की उम्मीद की तुलना में कम रही। प्रतिफल जहां मजबूत हो रहा था, वहीं राज्य विकास ऋण (एसडीएल) के लिए संकेतक कैलेंडर बॉन्ड बाजार के लिए झटके देने वाला रहा। कैलेंडर से पता चलता है कि राज्यों की उधारी पहली तिमाही में 1.15 से 1.28 लाख करोड़ रुपये हो सकती है, जो 70,000 करोड़ रुपये की सामान्य उधारी की योजना की तुलना में ज्यादा है। वित्त वर्ष के पहले सप्ताह में एसडीएल उधारी 20,000 करोड़ रुपये रही। 
 
डीलरों का कहना है कि बॉन्डोंं की ज्यादा आपूर्ति से संघर्ष कर रहे बॉन्ड निवेशकों का उत्साह कम कर दिया है। कच्चे तेल की कीमतोंं में तेजी से सरकार के राजकोषीय घाटे की गणना आगे और बिगड़ सकती है। तेल के दाम 71 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुके हैं, जो 4 साल का उच्च स्तर है। अभी रूस तेल उत्पादक देशों के साथ बात कर रहा है, जिससे लंबी अवधि के लिए कच्चे तेल के दाम 80 डॉलर प्रति बैरल रखे जा सकें। इससे भारत जैसे बड़े आयातक पर दबाव बढ़ेगा। देश में तेल की कुल खपत में 70 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरी होती है। अगर तेल के दाम बढ़ते हैं तो राजकोषीय घाटा बढ़ेगा और सरकार को इस घाटे को कम करने के लिए बाजार उधारी बढ़ानी पड़ सकती है। चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने 2018-19 की पहली छमाही में 2.88 लाख करोड़ रुपये उधारी की योजना बनाई है, जबकि पूरे साल के लिए 6.05 लाख करोड़ रुपये उधारी की योजना है। अब इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि तेल की कीमतों में आगे और बढ़ोतरी हो सकती है क्योंकि रूस और अमेरिका दोनों ही सीरिया पर मिसाइल हमले को लेकर सख्त हैं। चीन और अमेरिका में पहले ही कारोबारी जंग छिड़ चुकी है, जिससे आगे मुद्रा के अवमूल्यन के संकेत मिलते हैं। 
 
एक निजी क्षेत्र के बैंक के वरिष्ठ बॉन्ड डीलर ने कहा, 'बाजार बहुत अनिश्चितता वाला है। मांग आपूर्ति की व्यवस्था काम नहींं कर रही है और दीर्घावधि समर्थन का कोई संकेत नहीं है। यहां तक कि रिजर्व बैंक ने भी चार तिमाहियों में अलग अलग नुकसान बांटने की अनुमति दे दी है। पहली छमाही की उधारी उम्मीद से कम रही है, एसडीएल उधारी कैलेंडर और एफपीआई सीमा में कम बढ़ोतरी ने मूड खराब कर दिया है।'  निजी क्षेत्र के बैंक के एक और डीलर ने कहा, 'बॉन्डों के बारे में कोई दिशात्मक विचार नहीं हैं। कुछ मुनाफावसूली हुई है, लेकिन ऐसा लगता है कि अगर प्रतिफल गिरकर 7.25 से 7.30 प्रतिशत के स्तर पर आ जाता है तब भी कुछ बैंक मुनाफा कमाएंगे। ऐसा मामला पहले सामने नहीं आता था, जब यह बात होती थी कि प्रतिफल 7 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच जाएगा।'  
 
प्रतिफल में इस सप्ताह हुई तेज बढ़ोतरी से निवेशकों का पूरा मुनाफा खत्म हो गया है, जो पहली छमाही की उधारी की घोषणा के बाद हुआ था। दिसंबर तिमाही में बैंकों का एमटीएम हानि कम से कम 15,000 करोड़ रुपये रहा था, लेकिन मार्च तिमाही में यह बेहतर था। बहरहाल अगर स्थिति इसी तरह बनी रहती है तो बॉन्ड डीलरों के लिए यह कठिन दौर होगा।  इंडिया रेटिंग्स ऐंंड रिसर्च के एसोसिएट डायरेक्टर सौम्यजीत नियोगी ने कहा, 'बॉन्डोंं को लेकर आ रही सकारात्मक खबरें ज्यादातर दिखावा थीं, जो देर सबेर किसी न किसी तरह खत्म हो जाएंगी।'
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