पीएसयू संचालन में सुधार पर सेबी का पत्र

श्रीमी चौधरी | मुंबई Apr 16, 2018 09:46 PM IST

कोटक समिति की सिफारिशें लागू किए जाने पर मांगे केंद्र के विचार
प्रशासनिक मंत्रालयों पर निर्भरता कम करने एवं सरकार की हिस्सेदारी एक पृथक होल्डिंग कंपनी में स्थानांतरित करने पर मांगे सुझाव

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सूचीबद्ध सार्वजनिक उपक्रमों में कंपनी संचालन का स्तर सुधारने और एक स्वायत्त माहौल सृजित करने के लिए सरकार को पत्र लिखा है। पूंजी बाजार नियामक ने विभिन्न प्रस्तावों पर सरकार से सुझाव मांगे हैं।  इनमें प्रशासनिक मंत्रालयों पर निर्भरता कम करने और स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक उपक्रमों में सरकार की हिस्सेदारी एक पृथक होल्डिंग कंपनी में स्थानांतरित करना शामिल हैं।  सूत्रों ने कहा कि सेबी ने कंपनी संचालन पर उदय कोटक के नेतृत्व वाली समिति की सिफारिशों के आधार पर सात बोर्ड प्रस्तावों पर चिठ्ठæ लिखी है।

पिछले महीने निदेशकमंडल की हुई बैठक में बाजार नियामक ने समिति की ज्यादातर सिफारिशें स्वीकार कर ली थीं। सार्वजनिक उपक्रमों में संचालन संरचना में बदलाव करने सहित जो प्रस्ताव सेबी के कानूनी अधिकार क्षेत्र में नहीं आते थे, उन्हें सरकार को या संबंधित नियामक इकाइयों के पास भेज दिए गए।

सेबी ने कुछ दूसरे मुद्दे भी उठाए हैं, जिनमें लिस्टिंग ऑब्लिगेशन ऐंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट (एलओडीआर) नियमों का कड़ाई से पालन करना और विविध कौशल वाले सदस्यों के साथ एक स्वतंत्र निदेशकमंडल सुनिश्चित करना शामिल हैं।

वित्त मंत्री को पेश एक प्रस्तुतिकरण में सेबी ने कहा, 'सरकारी या निजी सभी सूचीबद्ध कंपनियों के लिए समान नियम होने चाहिए। ऐसे में सभी सार्वजनिक उपक्रमों को एलओडीआर नियमों का अनुपालन करना चाहिए।' कई सार्वजनिक उपक्रम एलओडीआर नियमों जैसे निदेशकमंडल में कम से कम एक महिला निदेशक की उपस्थिति, कम से कम 50 प्रतिशत स्वतंत्र निदेशक और 25 प्रतिशत न्यूनतम शेयरधारिता आदि का पालन नहीं कर रहे हैं।

25 प्रतिशत न्यूनतम शेयरधारिता के लिए समय सीमा अगस्त तक के लिए बढ़ा दी गई है। वित्त मंत्रालय को पेश प्रस्तुति में सेबी ने कहा कि सरकार सार्वजनिक उपक्रमों के उद्देश्यों और उनकी अनिवार्यताओं पर स्थिति अधिक स्पष्टï कर सकती है। मिसाल के तौर पर अगर किसी सार्वजनिक उपक्रम का उद्देश्य वाणिज्यिक नहीं है तो इस बारे में नियमित तौर पर शेयरधारकों को सूचना दी जानी चाहिए ताकि निवेशक सही निर्णय ले सकें।

सलाहकार कंपनी एसईएस के प्रबंध निदेशक और सह-संस्थापक जे एन गुप्प्ता ने कहा, 'इस समय ज्यादातर सार्वजनिक उपक्रमों का संचालन संबंधित मंत्रालय करते हैं। निदेशकों की नियुक्ति सरकार की निगरानी में हो रही है। इन परिस्थितियों में सार्वजनिक उपक्रम प्रदर्शन और कम मूल्यांकन पर कारोबार के मामले में निजी प्रतिस्पद्र्धी कंपनियों से हमेशा पीछे रहते हैं।'

कोटक समिति में गुप्ता भी बतौर सदस्य शामिल थे। समिति ने सरकार से 1 अप्रैल, 2010 तक मालिकाना हक के समेकन और सार्वजनिक उपक्रमों को एक होल्डिंग कंपनी संरचना में तब्दील करने की सिफारिश की थी। फिनसेक लॉ एडवाइजर्स के संस्थपपक संदीप पारेख ने कहा, 'सार्वजनिक उपक्रमों के साथ निदेशकों की नियुक्ति और न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता का अनुपालन सहित कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिनमें सरकार का हस्तक्षेप जरूरी है। सेबी को ससमय सीमा बढ़ाने के बजाय इन्हें सख्ती से लागू कराना चाहिए।' 

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