तेजी के बाद रियल्टी क्षेत्र को लेकर विश्लेषक सतर्क

पुनीत वाधवा और देवाशिष पाचल | नई दिल्ली Apr 17, 2018 09:48 PM IST

पिछले वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2018) के दौरान करीब 37 फीसदी की उछाल के बाद निफ्टी रियल्टी सूचकांक का प्रदर्शन इस साल यानी वित्त वर्ष 2019 में अब तक व्यापक बाजार परिदृश्य के अनुरूप रहा है। पिछले वित्त वर्ष के दौरान नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क सूचकांक निफ्टी50 में करीब 10 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी। विश्लेषकों का कहना है कि वित्त वर्ष 2018 के दौरान रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) कानून (रेरा) को लागू किए जाने, ब्याज दरों में स्थिरता के साथ अर्थव्यवस्था में मजबूती और सस्ती आवासीय परियोजनाओं पर सरकार द्वारा ध्यान केंद्रित किए जाने से रियल एस्टेट क्षेत्र को बल मिला। हालांकि रियल एस्टेट क्षेत्र में तेजी को लेकर विश्लेषक अब सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।
 
एसीई इक्विटी के आंकड़ों से पता चलता है कि व्यक्तिगत शेयरों में यूनिटेक, शोभा, एचडीआईएल, डीएलएफ, इंडियाबुल्स रियल एस्टेट और प्रेस्टिज एस्टेट प्रोजेक्ट्ïस ने 4 फीसदी से 13 फीसदी के दायरे में बढ़त दर्ज की। इसके मुकाबले निफ्टी रियल्टी और निफ्टी50 सूचकांकों में इस दौरान करीब 4 फीसदी की बढ़त रही। हालांकि पिछले कुछ वर्षों के दौरान नए रिहायशी मकानों के लिए मांग में नरमी दर्ज की जा रही है लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि अब धीरे-धीरे में मांग में तेजी आने के आसार दिख रहे हैं। एक आकलन के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2017 के दौरान मांग 40 फीसदी घटकर करीब 2 लाख मकानों की रह गई जो कैलेंडर वर्ष 2010-12 में अपने शीर्ष स्तर पर रही थी।
 
स्पार्क कैपिटल के गिरीश चौधरी और गौरव नागोरी ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में कहा है, 'मांग को लेकर हमारा नजरिया अब इस स्तर से सुधरने लगा है। ब्याज दरों में करीब एक दशक की सबसे अधिक नरमी के कारण खर्च करने की क्षमता बढऩे और सस्ते मकानों के लिए सरकारी प्रोत्साहन के मद्देनजर मांग में सुधार के आसार दिख रहे हैं। हालांकि रोजगार क्षेत्र में सुस्ती और निवेशकों की मांग के अभाव के कारण पूरी तरह मांग में सुधार आना अभी बाकी है। हम उम्मीद करते हैं कि भारतीय रियल एस्टेट चक्र अब सुदृढीकरण वाले चरण में प्रवेश कर रहा है और धीरे-धीरे मांग में सुधार दिखेगी।'
 
विश्लेषकों का कहना है कि इन्वेंटरी स्तर पर शीर्ष स्तर के मुकाबले थोड़ी नरमी आई है क्योंकि वे अभी भी पिछले दो साल के खपत स्तर पर आधारित हैं। लेकिन आगे उद्योग उपयोगकर्ताओं पर केंद्रित परियोजनाएं लॉन्च करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। रेरा के कारण नई परियोजनाएं शुरू करने में काफी सख्ती दिख रही है लेकिन नई आपूर्ति प्रबंधन योग्य स्तर पर बकरार रहने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2018 में जबरदस्त तेजी के मद्देनजर विश्लेषक अब इस क्षेत्र को लेकर सतर्क दिख रहे हैं। उनका मानना है कि इस क्षेत्र के शेयरों का प्रदर्शन वित्त वर्ष 2019 में भी पहले की तरह शानदार नहीं रहेगा। विश्लेषकों की पसंदीदा रियल एस्टेट शेयरों में ऐसे डेवलपर शामिल हैं जो दमदार नकदी प्रवाह, बेहतर निष्पादन क्षमता, लगातार बाजार में निवेश, नई परियोजनाओं की अच्छी तैयारी के साथ सस्ती आवासीय परियोजनाओं पर केंद्रित हों।
 
इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, 'इन्वेंटरी स्तर में मुझे कोई उल्लेखनीय कमी नहीं दिख रही है। कुछ मामलों में यह चिंता का कारण हो सकता है। निवेशकों को रियल्टी शेयरों में निवेश से पहले मार्च 2018 (चौथी तिमाही) के नतीजे आने तक इंतजार करना चाहिए। मेरे पसंदीदा शेयरों में ओबेरॉय रियल्टी और डीएलएफ हैं। लोग इसे निचले स्तर पर खरीद सकते हैं।' जहां तक वित्तीय प्रदर्शन का सवाल है तो कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों का मानना है कि महानगरों में बिक्री के लिजाज से यह कमजोर तिमाही (चौथी तिमाही) रहेगी। 
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