सुनील मुंजाल के लिए नया क्षेत्र नहीं हेल्थकेयर

अजय मोदी | नई दिल्ली Apr 17, 2018 09:49 PM IST

बर्मन बंधुओं के साथ निजी अस्पताल चेन फोर्टिस के अधिग्रहण की दौड़ में शामिल सुनील कांत मुंजाल के लिए हेल्थकेयर कोई नया क्षेत्र नहीं है। मुंजाल लगभग एक दशक से लुधियाना में 1500 बिस्तर वाले अस्पताल से जुड़े रहे हैं। दयानंद मेडिकल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल (डीएमसीएच) एक ट्रस्ट द्वारा संचालित है और मुंजाल इस अस्पताल के अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाते हैं। इसके अलावा, वह एक बड़े सामान्य बीमा वितरण व्यवसाय के भी मालिक हैं, जिससे उनके हेल्थकेयर क्षेत्र में कुछ खास करने के सपने की दिशा में मददगार माना जा सकता है।
 
हीरो एंटरप्राइज के चेयरमैन मुंजाल ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'मेरी सामाजिक नजरिये से हेल्थकेयर में निजी दिलचस्पी है और मैं हेल्थकेयर से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है और इसलिए ऑनकोलॉजी जैसे क्षेत्रों में बर्मन परिवार का साथ मिला है। हम दोनों के लिए, ऐसा करना विशेष रूप से अनिवार्य लग रहा था।' उन्होंने कहा कि डीएमसीएच प्रमुख प्रतिष्ठïानों के साथ काम करती है और शोध गतिविधियों की जिम्मेदारी संभालती है। वह कहते हैं, 'उसके पास आकर्षक हेल्थकेयर सुविधाएं उपलब्ध हैं।' मुंजाल के पिता स्व. बी एम मुंजाल भी इस अस्पताल से लंबे समय तक जुड़े रहे थे। मुंजाल के अनुसार उन लोगों के लिए यह उपयुक्त अवसर है जो हेल्थकेयर में गैर-लाभकारी पृष्ठïभूमि से आते हैं और इस क्षेत्र में कुछ खास करना चाहते हैं। 
 
मुंजाल ने कहा कि उनकी कंपनी बीमा पॉलिसवी की सबसे बड़ी वितरक थी और उसने पिछले साल 1 करोड़ से अधिक पॉलिसी बेचीं। उन्होंने कहा, 'अब हम जीवन और स्वास्थ्य बीमा दोनों तरह की पॉलिसी मुहैया कराते हैं। यदि बीमा वितरण व्यवसाय फोर्टिस के लिए संपूरक है तो हम मिलकर काम करेंगे, लेकिन यह पारदर्शी तरीके से होगा।' मुंजाल का कहना है कि भारत को लंबे समय से गुणवत्ता और पहुंच दोनों के संदर्भ में स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार लाए जाने की जरूरत रही है।  यह सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन वह इसमें पूरी तरह सफल नहीं रही है। इसलिए निजी हेल्थकेयर व्यवस्था आवश्यकताओं की पूरक है।
 
हीरो ने पिछले साल फोर्टिस पर ध्यान देना शुरू किया और एक अधिग्रहण प्रस्ताव के साथ कंपनी से संपर्क किया था। उन्होंने कहा, 'जब मैंने पहली बार पिछले साल इस पर विचार करना शुरू किया तो यह प्रक्रिया बेहद जटिल लग रही थी। हमने कानूनी सेवाओं की मदद ली और यह समझने में कामयाब रहे कि इस पर दायची मामले का प्रभाव नहीं है।' जापानी दवा निर्माता सैंक्यो ने रैनबैक्सी में 10 साल पहले 95.76 अरब रुपये में प्रवर्तकों (सिंह बंधुओं) के शेयर खरीदे थे। यह पाया गया था कि अमेरिकी खाद्य एवं दवा प्रशासन (यूएस एफडीए) की जांच के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई गई थी। जहां रैनबैक्सी को सन फार्मा को बेचा गया, वहीं दायची ने 35 अरब रुपये की अंतर्राष्टï्रीय मध्यस्थता का मामला जीत लिया है। दायची किसी संभावित निवेशक के साथ फोर्टिस के समझौते से संबंधित किसी सौदे के खिलाफ है।
 
जब मुंजाल से यह पूछा गया कि क्या बर्मन परिवार और आप फोर्टिस में एक सक्रिय निवेशक बने रहेंगे (यदि कंपनी का अधिग्रहण होता है), या व्यवसाय का संचालन करते रहेंगे, तो उन्होंने कहा कि इस बारे में बाद में बात करेंगे। उन्होंने कहा, 'फिलहाल हमारी पेशकश यह है कि हम कंपनी में एक अल्पांश शेयरधारक के बजाय बड़ा शेयरधारक बनना चाहते हैं और इसमें निवेश करना चाहते हैं।' फोर्टिस में मुंजाल और बर्मन बंधुओं की 3 फीसदी हिस्सेदारी है और उन्होंने बोर्ड द्वारा अधिग्रहण प्रस्ताव स्वीकार किए जाने की स्थिति में एक महीने के अंदर 12.5 अरब रुपये का निवेश करने का प्रस्ताव रखा है। 
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