पीएसयू सुधार के लिए सेबी ने सरकार से मांगा समर्थन

श्रीमी चौधरी | मुंबई Apr 19, 2018 09:51 PM IST

कॉरपोरेट सुशासन पर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने उदय कोटक के नेतृत्व वाले पैनल की ज्यादातर सिफारिशों को स्वीकार करने के साथ ही उसने प्रस्तावों पर सरकार की राय मांगी है जो कि सूचीबद्घ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) पर भी लागू होंगी। सूत्रों ने कहा कि बाजार नियामक ने बोर्ड के कम से कम आधा दर्जन प्रस्तावों पर वित्त मंत्रालय की राय मांगी है जिसमें प्रशासनिक मंत्रालयों पर निर्भरता में कमी लाना और अधिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए पीएसयू में सरकार की होल्डिंग को एक अलग होल्डिंग कंपनी को हस्तांतरित करना शामिल है। पैनल के सिफारिशों से कॉरपोरेट सुशासन मानकों में सुधार आने और सूचीबद्घ पीएसयू में स्वायत्तता का वातावरण बनने की उम्मीद है। 
 
अपने वैधानिक क्षेत्राधिकार से बाहर के प्रस्ताव जैसे पीएसयू की शासन प्रणाली में बदलाव करना आदि को सेबी ने सरकार या संबंधित नियामक तंत्र के पास भेज दिया है। नियामक ने पिछले महीने अपने बोर्ड की बैठक में कोटक पैनल की अधिकतर सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था। सेबी ने लिस्टिंग आब्लिगेशन ऐंड डिस्कलोजर रिक्वायरमेंट (एलओडीआर) नियमन के प्रस्तावों का कड़ाई से अनुपालन करने और विभिन्न कौशलों वाले सदस्यों को शामिल कर बनाए गए एक स्वतंत्र बोर्ड को सुनिश्चित करने जैसे दूसरे क्षेत्रों पर जोर दिया है।
 
सेबी ने वित्त मंत्रालय को दिए प्रस्तुति में कहा, 'सरकारी या निजी सभी सूचीबद्घ कंपनियों को बराबर पर रखने की जरूरत है। इसलिए सभी सूचीबद्घ सार्वजनिक उपक्रमों को एलओडीआर नियमों का अनुपालन करना चाहिए।' कई सार्वजनिक उपक्रम एलओडीआर नियमों का अनुपालन नहीं कर रहे हैं। इन नियमों के तहत बोर्ड में कम से कम एक स्वतंत्र महिला निदेशक होना, कम से कम 50 प्रतिशत स्वतंत्र निदेशक और न्यूनतम 25 प्रतिशत शेयरधारिता को अनिवार्य किया गया है। एलाओडीआर नियमों के अनुपालन के लिए अंतिम समय सीमा को अगस्त तक बढ़ा दिया गया है। 
 
अपनी प्रस्तुति में सेबी ने कहा, सरकार सार्वजनिक उपक्रमों के उद्ïदेश्यों और दायत्विों को अधिक स्पष्टï कर सकती है। उदाहरण के लिए यदि किसी सार्वजनिक उपक्रम के कुछ गैर-वाणिज्यिक उद्ïदेश्य हैं तो उसे नियमित आधार पर शेयरधारकों के समक्ष पारदर्शी तरीके से रखा जाना चाहिए ताकि निवेशक जानकारी के आधार निर्णय ले सके।  प्रतिनिधि सलाहकार कंपनी एसईएस के प्रबंध निदेशक और सह-संस्थापक जे एन गुप्ता ने कहा, 'फिलहाल, ज्यादातर सार्वजनिक उपक्रम संबंधित मंत्रालयों से संचालित होते हैं। निदेशकों की नियुक्ति सरकार की निगरानी में की जा रही है। इसकी वजह से सार्वजनिक उपक्रम प्रदर्शन और कम मूल्य के कारोबार में निजी क्षेत्र की साथी कंपनी से हमेशा पिछड़ जाते हैं।'  
 
कोटक पैनल जिसके गुप्ता एक सदस्य थे, ने सिफारिश दी थी कि सरकार को 1 अप्रैल, 2020 तक स्वामित्व के समेकन और सार्वजनिक उपक्रमों को स्वतंत्र होल्डिंग कंपनी में हस्तांतरित करने पर विचार करना चाहिए।    फिनसेक लॉ एडवाइजर्स के संस्थापक संदीप पारेख ने कहा, 'सार्वजनिक उपक्रमों के साथ कुछ मसले हैं जिसमें सरकार के हस्तक्षेप की जरूरत पड़ती है जैसे कि निदेशकों की नियुक्ति और न्यूनतम शेयरधारित नियमों का अनुपालन। समय सीमा को बढ़ाने के बजाय उन्हें जवाबदेह बनाने के लिए कुछ प्रवर्तन कार्रवाई करनी चाहिए।'  
 
सूत्रों ने कहा सेबी ने कई सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा 25 फीसदी सार्वजनिक शेयरधारिता नियमों का अनुपालन नहीं करने पर चिंता जाहिर की है जबकि बढ़ी हुई समय सीमा केवल चार महीने दूर है। सरकार को अगस्त तक इस नियम को पूरा करना है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने अंतिम समय सीमा को बढ़ाने की मांग की है। 
कीवर्ड PSU, sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),

  
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