सिरदर्द बनी धातुओं में उछाल

कृष्ण कांत | मुंबई Apr 22, 2018 09:33 PM IST

लंदन मेटल एक्सचेंज में कीमतें चढऩे से कंपनियों का घट सकता है मार्जिन

हाल में धातुओं की कीमतों में तेजी भारतीय कंपनियों के लिए महंगा सौदा साबित होगी। इसकी वजह यह है कि कंपनियां मांग में कमी और नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से उत्पन्न व्यवधानों से अब भी पूरी तरह नहीं उबर पाई हैं। धातु कीमतों और घरेलू विनिर्माताओं के परिचालन मार्जिन में नकारात्मक संबंध होने के मद्देनजर विश्लेषकों को आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के मार्जिन में गिरावट आने की आशंका है।  

पिछले प्रदर्शन पर नजर डालें तो घरेलू विनिर्माण कंपनियों (ऊर्जा, धातु एवं खनिज कंपनियों को छोड़कर) का परिचालन मार्जिन धातुओं की कीमतें कम रहने पर अधिक रहा है। इसी तरह, धातुओं की कीमतें चढऩे पर परिचालन मार्जिन पर नकारात्मक असर पड़ता है। अप्रैल में अब तक लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) 7.4 प्रतिशत तक चढ़ा है और कैलेंडर वर्ष 2017 की शुरुआत के बाद से इसमें 30 प्रतिशत तक तेजी आई है।

एलएमई सूचकांक में छह आधार धातुओं- एल्युमीनियम, तांबा, जस्ता, सीसा, निकेल और टिन- की कीमतें में उतार-चढ़ाव दर्शाता है। इस सूचकांक में एल्युमीनियम, तांबा और जिंक का भारांश सर्वाधिक है और तीनों मिलाकर आंकड़ा 89 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। इस्पात की कीमतें भी चढ़ी हैं और हॉट रोल्ड स्टील की कीमत पिछले एक महीने के दौरान चीन के हाजिर बाजार में 5.1 प्रतिशत अधिक रही हैं।

चीन दुनिया में इस्पात का सबसे बड़ा उत्पादक एवं उपभोक्ता देश है और यहां की हाजिर कीमतें वैश्विक इस्पात उद्योग के लिए मानक माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से भारत में जिंस कीमतों और कॉरपोरेट मार्जिन में नकारात्मक संबंध रहा है। उदाहरण के लिए सूचीबद्घ कंपनियों (वित्त, तेल एवं गैस, धातु और सूचना प्रौद्योगिकी को छोड़कर) का मुख्य परिचालन मार्जिन जनवरी-मार्च 2015 की तिमाही के 19.7 फीसदी (शुद्घ बिक्री का) से बढ़कर अक्टूबर-दिसंबर, 2016 की तिमाही में 22.1 फीसदी के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया।  

इससे पहले जून 2014 से दिसंबर 2015 के बीच आधार धातुओं जैसे एल्युमीनियम, तांबे और जस्ते की कीमतों में 43 फीसदी की गिरावट आई। दिसंबर 2015 में न्यूनतम स्तर पर पहुंचने के बाद धातु की कीमत में सुधार हो रहा है लेकिन पिछले एक साल से कॉरपोरेट मार्जिन कम हो रहा है। घरेलू विनिर्माताओं का मुख्य परिचालन मार्जिन दिसंबर, 2017 में खत्म हुई तिमाही में एक साल के दौरान 225 आधार अंक गिर गया।

विश्लेषकों का कहना है कि इससे भारतीय विनिर्माताओं के लिए कच्चे माल की कीमतें बढ़ जाएंगी और अगर वे इसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डालती हैं तो उनका मार्जिन प्रभावित होगा। इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के प्रबंध निदेशक जी चोक्कालिंगम ने कहा, 'किसी तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था में कंपनियां लागत में बढ़ोतरी उपभोक्ताओं पर डालती हैं और मुनाफा कमाती हैं लेकिन अभी मांग कम है जिससे विनिर्माता कीमत बढ़ाने की स्थिति में नहीं हैं।'

उनका कहना है कि धातुओं की ऊंची कीमत के कारण घरेलू विनिर्माताओं के मुख्य परिचालन मार्जिन में कम से कम 200 आधार अंक की कमी आएगी। अगर कच्चे तेल की कीमतें भी तेजी बढ़ती हैं तो यह नुकसान 500 आधार अंक तक पहुंच सकता है।

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