मुंबई के रिहायशी प्रॉपर्टी में उतरेगी प्रेस्टीज

पवन लाल | मुंबई Apr 22, 2018 09:39 PM IST

दक्षिण भारत के सबसे बड़े रियल एस्टेट डेवलपर प्रेस्टीज एस्टेट जल्द ही मुंबई के जबरदस्त प्रतिस्पर्धा वाले रिहायशी रियल एस्टेट बाजार में उतरने वाली है। अपनी निर्माण परियोजनाओं के लिए चर्चित यह कंपनी मॉल एवं लक्जरी अपार्टमेंट से लेकर गोल्फ कोर्स एवं ऑफिस स्पेस जैसे रियल एस्टेट क्षेत्र में कारोबार करती है। कंपनी ने मुंबई के बाहरी हिस्से में एक भूखंड हासिल किया है।  बेंगलूरु की कंपनी पे्रस्टीज ग्रुप के चेयरमैन इरफान रजाक ने कहा कि सौदा शर्तों पर अगले डेढ़ महीने हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। रजाक के अनुसार, भायखला के लिए परिकल्पित इस परियोजना से डेवलपर को 5 लाख वर्ग फुट रिहायशी जगह हासिल होगी जिसकी संभावित कीमत 12 अरब डॉलर हो सकती है। उन्होंने कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि उस परियोजना के तहत हमें 25 हजार रुपये से 30 हजार रुपये प्रति वर्ग फुट कीमत मिल जाएगी'
 
यह कोई पहला अवसर नहीं है जब प्रेस्टीज ग्रुप ने मुंबई के बाजार पर ध्यान केंद्रित किया है। ऐरोली में एक आईटी परियोजना पर भी उसकी नजर थी लेकिन अब तक उसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। लेकिन कंपनी ने पहली बार किसी परियोजना के लिए भायखला में हाथ मिलाया है। जोंस लैंग लासाले के सीईओ (प्रॉपर्टी मैनेजर) रमेश नायर ने के अनुसार, यह प्रेस्टीज ग्रुप के लिए काफी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि हाथ मिलाना भी किसी सौदे पर हस्ताक्षर करना और उसे अंतिम रूप देने जैसा ही महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, 'हालांकि यह इस उद्योग में सभी के लिए सही नहीं है।'
 
भायखला में न्यू कंसॉलिडेटेड कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (एनसीसीसीएल) प्रेस्टीज की साझेदार है। सौदे की शर्तों में कहा गया है कि प्रेस्टीज भूमि की आधी कीमत का भुगतान करेगी जो करीब 2 अरब रुपये है। साथ ही वह साझेदार के तौर पर बकरार रहेगी जबकि एनसीसीसीएल जमीनी स्तर पर कामकाज की देखरेख करेगी। रजाक ने कहा कि पिछले कुछ महीने से इस परियोजना के लिए जांच-परख की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि मुंबई में पैर रखने के लिए भायखला कई कारणों से महत्त्वपूर्ण है जैसे वह मध्य में है, वहां विकास की संभावनाएं मौजूद हैं और फिलहाल वहां अधिक प्रतिस्पर्धा नहीं है। हालांकि रियल एस्टेट क्षेत्र के अन्य खिलाडिय़ों का मानना है कि मुंबई में पैर जमाना आसान नहीं है क्योंकि बाजार में मांग से अधिक आपूर्ति की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में मूल्य निर्धारण संबंधी दबाव बरकरार है। देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ ने देश भर में अपने कारोबार के विस्तार के क्रम में साल 2005 में जबरदस्त शुरुआत की थी। उस दौरान डीएलएफ ने एक सार्वजनिक नीलामी के दौरान 17 एकड़ मिल भूमि के लिए 16 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। छह साल बाद उसने चार गुना कीमत पर उसे लोढ़ा डेवलपर्स को बेच दिया था। लेकिन उसके साथ ही देश भर में कारोबार के विस्तार का उसका सपना टूट गया। ठीक उसी दौरान कोलकाता में यूनिटेक एक परियोजना के साथ विफल रही।
 
मुंबई के तमाम ब्रोकरों का कहना है कि कंपनियों के पास बिना बिके मकानों की इन्वेंटरी काफी है और यदि आप उनसे प्रतिस्पर्धा करेंगे तो वे 30 फीसदी तक कीमत घटा सकती हैं। हालांकि रजाक इससे बेफिक्र हैं। उन्होंने कहा, 'हमने कुछ अलग करने का सोचा है। हम स्थानीय स्तर पर प्रबंधन तैयार कर रहे हैं और सबसे अहम बात यह है कि हम अपने अहं को दरकिनार करते हुए कौशल पर जोर दे रहे हैं।'
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