ढांचागत परियोजनाओं को ऋण में आएगी अड़चन!

भाषा | मुंबई Apr 23, 2018 09:51 PM IST

बैंकों की दबाव वाली संपत्तियों के मामले में जारी नए नियमों में रिजर्व बैंक की तरफ से फिलहाल कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है। यही वजह है कि बैंक लंबी अवधि के कर्ज, विशेषकर ढांचागत परियोजनाओं को कर्ज देने में काफी सतर्कता बरत रहे हैं। इससे इन परियोजनाओं का वित्तपोषण लटक सकता है।  रिजर्व बैंक ने 12 फरवरी को एक नया परिपत्र जारी किया है। इसमें फंसे कर्ज के समाधान के लिए नई रूपरेखा जारी की गई है। रिजर्व बैंक के इन नए नियमों में कर्ज में फंसी राशि के त्वरित समाधान पर जोर दिया गया है। बैंकों को फंसी राशि के त्वरित समाधान के साथ आगे आना होगा और उसे समयबद्ध दायरे में रहते हुए राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण ( एनसीएलटी ) के समक्ष ले जाना होगा। 
 
नए नियमों में बैंकों को एक दिन की देरी होने पर भी फंसे कर्ज के बारे में जानकारी देने को कहा गया है। बैंकों ने इस बारे में केंद्रीय बैंक से कुछ राहत देने की मांग की थी, लेकिन रिजर्व बैंक ने इस संबंध में जारी अपने 12 फरवरी के परिपत्र में कोई राहत नहीं दी है।  एक वरिष्ठ बैंकर ने इस मामले में अपनी बात रखते हुए कहा 'रिजर्व बैंक ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मामले में कोई रियायत नहीं देने जा रहा है। अब मेरा मानना है कि बैंक काफी सतर्क हो जाएंगे। खासतौर से बिजली, सड़क और बंदरगाह जैसे उन क्षेत्रों को ऋण देने में काफी सतर्कता बरती जाएगी, जिनमें लंबी अवधि के कर्ज की जरूरत होती है। बैंकर का कहना है कि कर्ज का ज्यादातर पुनर्गठन ढांचागत क्षेत्र के लिए दिए गए दीर्घकालिक कर्ज के मामले में ही होता है। 
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