निजी इक्विटी के दांव से मॉल निर्माण में तेजी

राघवेंद्र कामत | मुंबई Apr 24, 2018 09:34 PM IST

इस साल भारत में मॉल निर्माण से जुड़ी गतिविधियां जोर पकडऩे की उम्मीद है। निजी इक्विटी (पीई) की ओर से छोटे-मझोले शहरों में मॉल संपत्तियों में निवेश से भी इसकी मांग बढ़ रही है। जायदाद सलाहकार कंपनी जेएलएल के अनुसार मॉल के निर्माण के लिए इस साल 78 लाख वर्गफुट जगह उपलब्ध होने की उम्मीद है। दूसरे शब्दों में कहें तो 2011 के बाद यह आंकड़ा सबसे अधिक है, वहीं पिछले साल के मुकाबले जगह की आपूर्ति 40 प्रतिशत अधिक होगी।

जेएलएल ने कहा कि अगले तीन साल (2018-2020) के दौरान बाजार में 2 करोड़ वर्गफुट जगह उपलब्ध होने की उम्मीद है। जेएलएल का कहना है कि डीएलएफ, प्रेस्टीज, ब्रिगेड फीनिक्स मिल्स, एलऐंडटी और नितेश एस्टेट सहित दिग्गज डेवलपरों के अलावा कई क्षेत्रीय और स्थानीय डेवलपर भी नए मॉल बना रहे हैं।

ब्लैकस्टोन नियंत्रित नेक्सस मॉल 20 लाख वर्गफुट जगह और खरीदना चाहती है, वहीं  फीनिक्स मिल्स अपना पोर्टफोलियो दोगुना करना चाहती है। एलऐंडटी की रियल एस्टेट इकाई एलऐंडटी रियल्टी हैदराबाद में चार मॉल बना रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि खुदरा क्षेत्र में तेजी और मझोले और छोटे शहरों में खरीदारी आदि में लोगों की बढ़ती दिचलस्पी के मद्देनजर मॉल के निर्माण से जुड़ी गतिविधियां तेज हो गई हैं।

जेएलएल इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी और भारत प्रमुख रमेश नायर ने कहा, 'शहरीकरण में तेजी, युवाओं की अच्छी खासी संख्या और एकल परिवारों के बढ़ते चलन से अगले 15 वर्षों में उपभोग में होने वाली वृद्धि में 70 प्रतिशत से योगदान 15 से 59 साल की उम्र के लोगों की होगी। इसके साथ ही प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के रास्ते नए खुदरा ब्रांड आने से खुदरा क्षेत्र में निवेश को और गति मिलेगी।'

जेएलएल के अनुसार खुदरा क्षेत्र 2020 तक बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये हो जान का अनुमान है। 2017 में मॉल में 75 करोड़ डॉलर से अधिक का निवेश हुआ है, जो 2016 के मुकाबले लगभग दोगुना है। निसुस फाइनैंस सर्विसेस में पार्टनर ऋतुराज वर्मा कहते हैं, 'देश में मॉल की जगह की खासी कमी है और यह सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गई है।

पिछले पांच वर्षों में काफी कम मॉल ने परिचालन शुरू किया है, ऐसे में मॉल निर्माता नई जगह खोज रहे हैं। इसकी वजह यह कि उनके पास उपलब्ध जमीन का लगभग इस्तेमाल किया जा चुका है।'

हालांकि रियल एस्टेट फिलहाल कमजोर होने से मॉल का निर्माण संभवत: 2019 में पूरा होगा। इससे पहले 2012 के बाद निर्माण की अवधि लंबी रहने और खराब प्रदर्शन के कारण कई मॉल   बंद होने के बाद निर्माता इनके निर्माण से परहेज कर रहे थे।  जेएलएल के अनुसार 2017 में करीब 28 मॉल बंद हुए थे। इनमें ज्यादातर दिल्ली-एनसीआर और मुंबई में थे।

इन बाजारों में मॉल की पहले ही खासी तादाद है और इनमें ज्यादातर का प्रदर्शन उम्मीद से कम रहा है।  पिछले कुछ वर्षों में मॉल में प्राइवेट इक्विटी निवेशकों की भी दिलचस्पी बढ़ी है। कनाडा की सबसे बड़ी पेंंशन फंड प्रबंधक सीपीपीआईबी ने अप्रैल में कहा कि यह आइलैंड स्टार मॉल्स डेवलपर्स में अतिरिक्त 9.38 अरब रुपये निवेश करेगी। अमेरिका की पीई कंपनी ब्लैकस्टोन ने पिछले दो सालों में 8 मॉल खरीदे हैं और इसके पास 50 लाख वर्गफुट से अधिक अधिक जगह है।  

विशेषज्ञों के अनुसार पीई निवेश का आधा हिस्सा मझोले शहरों में जा रहा है। मिसाल के तौर पर ब्लैकस्टोन के करीब आधे मॉल मझोले शहरों में हैं। ब्लैकस्टोन ने अहमदाबाद में अल्फावन मॉल, चंडीगढ़ में इलांटे मॉल और इंदौर में ट्रेजर आइलैंड मॉल खरीदे हैं। बियोंड स्क्वायरफीट के संस्थापक सुशील डुंगरवाल ने कहा, 'रियल एस्टेट की किसी दूसरी श्रेणी के अलावा मॉल में निवेश से कहीं बेहतर प्रतिफल मिलता है।'

ऐक्सिस ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध निदेशक बालाजी रॉव ने कहा कि एक सफल मॉल ऑफिस कॉम्प्लेक्स के मुकाबले अधिक किराया देता है। उन्होंने कहा, 'एक ऑफिस बिल्डिंग 8 से 9 प्रतिशत प्रतिफल देता है, जबकि एक अच्छा मॉल 9 से 10 प्रतिशत तक प्रतिफल दे सकता है।'

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