अल्ट्राटेक ने अपनी बोली पर विचार करने को कहा

अभिषेक रक्षित | कोलकाता Apr 24, 2018 09:44 PM IST

बिनानी सीमेंट अधिग्रहण मामले में मंगलवार को सुनवाई पूरी हो गई, जिसमें दूसरी सबसे अधिक बोली लगाने वाली कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट ने पुरजोर अपना पक्ष रखा। अल्ट्राटेक ने भूषण पावर ऐंड स्टील मामले में एनसीएलटी दिल्ली के आदेश का हवाला देते हुए अपनी बढ़ी हुई बोली पर फिर से विचार करने का आग्रह किया। दिल्ली एनसीएलटी ने अपने आदेश में लिबर्टी हाउस को बोली की समयसीमा खत्म होने के बावजूद बोली लगाने की मंजूरी दी थी।  दूसरी तरफ बिनानी सीमेंट की सबसे ऊंची बोली लगाने वाली डालमिया भारत सीमेंट ने कहा कि दोनों मामले पूरी तरह अलग हैं और भूषण मामले में एनसीएलटी दिल्ली का आदेश अल्ट्राटेक की याचिका पर लागू नहीं होता है। दिल्ली एनसीएलटी के आदेश का हवाला देते हुए अल्ट्राटेक सीमेंट का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील सिद्धार्थ मित्रा ने एनसीएलटी के कोलकाता पीठ में तर्क दिया कि उस आदेश के मुताबिक कोई आवेदक आईबीसी के तहत तय अवधि खत्म होने से 30 दिन पहले समाधान योजना सौंप सकता है और बोली प्रक्रिया में आंतरिक प्रक्रिया दस्तावेज अनिवार्य कानूनी बाध्यता नहीं रखते हैं। 

 
उन्होंने आरोप लगाया कि भूषण की ऋणदाताओं की समिति और समाधान पेशेवर सबसे बड़े बोलीदाताओं में से एक से प्रभावित हो गए और उन्होंने लिबर्टी हाउस को बोली लगाने की मंजूरी नहीं दी। यह बिनानी सीमेंट की ऋणग्रस्त संपत्तियों के लिए बोली लगाने के अल्ट्राटेक के मामले के समान है।  आदित्य बिड़ला समूह की इस कंपनी के वकील ने दावा किया कि अल्ट्राटेक सीमेंट ने पहले अपनी योजना 22 फरवरी को सौंपी थी और डालमिया भारत सीमेंट से ज्यादा बोली लगाने के लिए 8 मार्च को अपनी बोली में संशोधन किया था, जो बिनानी सीमेंट के बिकने से पहले की तय 270 दिन की अवधि के भीतर है। इसके अलावा अल्ट्राटेक सीमेंट ने सबसे ऊंचे बोलीदाता को चुनने की प्रक्रिया को चुनौती दी है। इसने कहा है कि उसके द्वारा अपनी बोली बढ़ाकर 79 अरब रुपये से अधिक करने के बावजूद उसे गलत चयन मानदंड के कारण डालमिया भारत सीमेंट से नीचे रखा गया। इस बोली के तहत वह वित्तीय और परिचालन दोनों ऋणदाताओं और वैधानिक प्राधिकरणों के सभी वैध और स्वीकार्य बकाये चुकाएगी। 
 
आयकर विभाग के वकील के मुताबिक बिनानी सीमेंट के ऋणदाताओं की समिति द्वारा मंजूर योजना के तहत सरकारी संस्थाओं और एजेेंसियों को उनके 114.07 करोड़ रुपये के दावे की करीब 18 फीसदी राशि का ही भुगतान किया जा रहा है, जबकि अल्ट्राटेक की खारिज योजना के तहत पूरा बकाया चुकाया जा रहा है।  डालमिया भारत सीमेंट की योजना को पहले मंजूरी दे चुके ऋणदाताओं की समिति के कुछ ऋणदाता अल्ट्र्राटेक सीमेंट की पेशकश पर विचार करने को तैयार हैं, बशर्ते कि यह कानूनी रूप से व्यवहार्य हो और इसे कानूनी प्राधिकरणों से सहमति मिली हो। 
 
मित्रा ने एनसीएलटी दिल्ली के आदेश का हवाला देते हुए अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए अधिकतम कीमत और आंतरिक प्रक्रिया दस्तावेजों की कानूनी वैधता के तर्क दिए। लेकिन डालमिया भारत सीमेंट ने कहा कि इस आदेेश का हवाला नहीं दिया जा सकता क्योंकि ये दोनों अलग-अलग मामले हैं। इसका मुख्य तर्क इस तथ्य पर आधारित है कि भूषण मामले से इतर बिनानी सीमेंट की ऋणदाताओं की समिति ने सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को चुना था और लिबर्टी हाउस से इतर अल्ट्राटेक सीमेंट की प्रक्रिया दस्तावेज तक पहुंच थी, जिसमें चुनाव मापदंड और सबसे ऊंची बोलीदाता की प्रक्रिया का जिक्र किया गया है। डालमिया भारत सीमेंट के वकील एस के कपूर ने न्यायाधिकरण को बताया, 'समाधान योजना सौंपने की अंतिम तारीख लिबर्टी हाउस को नहीं बताई गई थी, जबकि अल्ट्राटेक सीमेंट को समाधान योजना सौंपने की अंतिम तारीख का पता था।'
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