समाधान पेशेवर झेल रहे आलोचना

देव चटर्जी | मुंबई Apr 24, 2018 09:45 PM IST

ऋणशोधन एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) 2016 के तहत अनिवार्य प्रक्रिया का पालन न करने के लिए रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) को न केवल बोलीदाताओं बल्कि नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। वकीलों का कहना है कि आईबीसी मामलों को मध्यस्थता की तरह निपटाए जाने से मुकदमेबाजी बढ़ रही है और बैंकों के 3 लाख करोड़ रुपये के ऋण समाधान में देरी हो रही है। बिनानी सीमेंट, एस्सार स्टील, भूषण पावर और जेपी इन्फ्राटेक के लिए रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल द्वारा शुरू की गई बोली प्रक्रिया को लेकर अदालत पहले ही निर्देश दे चुकी है। ये मामले फिलहाल मुकदमेबाजी में फंस चुके हैं और बोलीदाताओं का कहना है कि अंतिम फैसला आने में अभी कई महीने लगेंगे। सोमवार को एनसीएलटी के दिल्ली पीठ ने भूषण पावर ऐंड स्टील की बोली प्रक्रिया में लिबर्टी हाउस को शामिल करने के लिए रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल को निर्देश दिया। इससे पहले रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने पेशकश के लिए अंतिम समय-सीमा खत्म होने का हवाला देते हुए लिबर्टी हाउस को रोक दिया था। ऐसे में भूषण पावर के लिए टाटा स्टील सबसे बड़ी बोलीदाता के तौर पर उभरी थी जिसमें बैंकों को 48 फीसदी का नुकसान हो रहा था।
 
पिछले सप्ताह इंडिया इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनैंस कंपनी (आईआईएफसीएल) ने जेपी इन्फ्राटेक की बोली प्रक्रिया पर सवाल उठाया था। उसने कहा था कि समाधान प्रक्रिया के दौरान कंपनी का मूल्य कम आंका जा रहा था। आईआईएफसीएल ने उचित एवं पारदर्शी प्रक्रिया अपनाए जाने की मांग करते हुए कहा कि रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने कंपनी के 171.1 अरब रुपये के बाजार मूल्य का करीब आधा मूल्यांकन किया। उसने कहा कि ऑडिट फर्म डेलॉयट और आईडीबीआई कैपिटल ने मनमाना तरीके से कंपनी को स्कोर दिया और उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। डेलॉयट और आईडीबीआई कैपिटल दोनों लेनदारों की समिति के सलाहकार हैं। दोस्ती ग्रुप और सुरक्षा एआरसी के संयुक्त उद्यम ने कंपनी के लिए 73.5 अरब रुपये की बोली लगाकर सबसे बड़ी बोलीदाता के तौर पर उभरी थी। नई दिल्ली और आगरा के बीच यमुना एक्सप्रेसवे के दोनों ओर कंपनी के पास पर्याप्त भूमि उपलब्ध है।
 
वकीलों और बोलीदाताओं का कहना है कि कंपनी का मूल्यांकन मनमाने तरीके से किया जाता है और ऐसे में कई बार अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड वाली कंपनियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। आदित्य बिड़ला समूह की कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट के अधिकारियों ने शिकायत की है कि उन्हें यह देखने की अनुमति नहीं दी गई कि बिनानी सीमेंट के लिए ऋण समाधान प्रक्रिया में किस प्रकार मूल्यांकन किया गया। रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने महज एक लाइन के ईमेल में अल्ट्राटेक से कहा कि उसकी बोली खारिज कर दी गई है और डालमिया भारत को सबसे बड़ी बोलीदाता के तौर पर घोषित किया गया है। दिलचस्प है कि बिनानी सीमेंट मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने आईबीसी की प्रक्रिया को सही ठहराते हुए मामले को वापस एनसीएलटी के कोलकाता पीठ को भेज दिया। 
कीवर्ड IBC, code, IBBI, NCLT, RBI,

  
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