रुचि सोया के खरीदारों की क्यों लंबी फेहरिस्त

विवेट सुजन पिंटो | मुंबई Apr 25, 2018 09:48 PM IST

रुचि सोया को खरीदने की दौड़ में हाल में बाबा रामदेव द्वारा सह-संस्थापित पतंजलि आयुर्वेद भी शामिल हो गई है। कर्ज में दबी खाद्य तेल विनिर्माता कंपनी रुचि सोया को पिछले साल ऋणदाताओं ने राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में घसीटा था। रुचि सोया को खरीदने की इच्छुक अन्य कंपनियों में गोदरेज एग्रोवेट, इमामी और आईटीसी के अलावा केकेआर एवं एओन कैपिटल जैसी अग्रणी निजी इक्विटी कंपनियां भी शामिल हैं।  पतंजलि के प्रवेश से रुचि सोया को खरीदने की इच्छुक कंपनियों की कुल संख्या 25 से अधिक हो गई है। इससे ज्यादातर लोग इस बात से चकित हैं कि रुचि सोया को खरीदने में इतनी कंपनियां क्यों रुचि दिखा रही हैं। 
 
रुचि सोया पर 31 दिसंबर, 2017 को कुल कर्ज 120 अरब रुपये था। पिछले 4 वर्षों में कंपनी का कारोबार घटकर आधा रह गया है। यह 2014-15 में 315.61 अरब रुपये था, जो 2017-18 के पहले 9 महीनों में घटकर महज 93.75 अरब रुपये रह गया है। कंपनी को अपने कारोबार में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अगर 2018-19 में सालाना कारोबार 125 अरब रुपये रहा तो इसका मतलब है कि वित्त वर्ष 2015 और वित्त वर्ष 2019 के बीच कंपनी की आमदनी में 60 फीसदी गिरावट आई है।   विश्लेेेषकों का कहना है कि कंपनी की बड़ी रिफाइनिंग क्षमता के कारण इतनी अधिक कंपनियां इसे खरीदने में रुचि दिखा रही हैं। रुचि सोया की सालाना रिफाइनिंग क्षमता 33 लाख टन है। इसके देशभर में करीब 13 से 14 रिफाइनिंग संयंत्र हैं, जिनमें से 5 बंदरगाहों पर हैं। खाद्य तेल उद्योग के एक अधिकारी ने कहा, 'बंदरगाहों पर संयंत्र होना बहुत अहम है।' उन्होंने कहा, 'बंदरगाहों पर रिफाइनिंग संयंत्र होने से कंपनियों के लिए आयातित खाद्य तेल को रिफाइन करना आसान हो जाता है। देश में 70 फीसदी खाद्य तेल का आयात होता है। इसलिए अगर बंदरगाहों पर पहले से चालू इकाइयां मौजूद हैं तो अन्य कंपनियां इसे अधिग्रहीत करने की कोशिश करेंगी।'
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