सबसे अधिक मूल्यवान मगर फ्री-फ्लोट में नीचे

समी मोडक | मुंबई Apr 25, 2018 09:48 PM IST

टाटा कंसल्टैंसी सर्विसेज (टीसीएस) भले ही भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई हो लेकिन जब शेयर बाजारों में टाटा समूह की यह कंपनी कई पायदान फिसल जाती है। फ्री-फ्लोट बाजार पूंजीकरण के लिहाज से टीसीएस देश में आठवें पायदान पर है। प्रमुख सूचकांक प्रदाता भारांश की गणना करने के लिए फ्री-फ्लोट बाजार पूंजीकरण का इस्तेमाल करते हैं। फ्री-फ्लोट बाजार पूंजीकरण में टीसीएस के फिसलने की मुख्य वजह उसकी प्रवर्तक टाटा संस की अधिक शेयरधारिता है जो करीब 72 फीसदी है। टीसीएस में प्रवर्तक हिस्सेदारी देश की शीर्ष कंपनियों के बीच सर्वाधिक है और वह अधिकतम 75 फीसदी की सीमा से थोड़ा ही कम है।

 
इन्फोसिस का बाजार पूंजीकरण टीसीएस के बाजार पूंजीकरण के मुकाबले महज 40 फीसदी है लेकिन वह कम प्रवर्तक हिस्सेदारी के कारण बेंचमार्क सूचकांक में ऊपरी पायदान पर है। इसी प्रकार लार्सन ऐंड टुब्रो (एलऐंडटी) और आईसीआईसीआई बैंक- जैसी कंपनियां बाजार पंूजीकरण के लिहाज से देश की शीर्ष 100 कंपनियों में शामिल नहीं हैं लेकिन बेंचमार्क सूचकांकों में उनका भारांश कहीं अधिक है। इस प्रकार शेयर बाजार के प्रदर्शन में उनकी सहभागिता कहीं अधिक है। दूसरी ओर, हिंदुस्तान यूनिलीवर और ओएनजीसी कुल बाजार पूंजीकरण के लिहाज से क्रमश: पांचवें और नौवें पायदान पर हैं लेकिन वे बेंचमार्क सूचकांक के शीर्ष 10 भारांश वाली कंपनियों में शामिल नहीं हैं क्योंकि उनके दो-तिहाई से अधिक शेयर प्रवर्तकों के पास है। जबकि 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक फ्री-फ्लोट बाजार पूंजीकरण के साथ एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनैंस कॉरपोरेशन (एचडीएफसी) का सेंसेक्स और निफ्टी में सबसे अधिक भारांश है।
 
फ्री-फ्लोट बाजार पूंजीकरण में प्रवर्तक शेयरधारिता, विशेष ट्रस्ट अथवा लॉक-इन शेयरों को शामिल नहीं किया जाता है। इस प्रकार के शेयर खरीद-फरोख्त के लिए मुक्त होते हैं और वे बेहतर मूल्य तलाशने और उतार-चढ़ाव कम करने में मदद करते हैं। कम फ्री-फ्लोट सीमा और संस्थागत निवेशकों की अधिक हिस्सेदारी वाली कंपनियों को आमतौर पर उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। औसतन अधिकतर शीर्ष वैश्विक कंपनियों के पास भारत के मुकाबले कम फ्री-फ्लोट होता है।  
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