शेयर खरीद आवंटन के बनेंगे नियम

पवन बुरुगुला और सचिन मामबटा | मुंबई Apr 26, 2018 09:56 PM IST

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एïवं विनिमय बोर्ड (सेबी) जल्द ही म्युचुअल फंड और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) जैसे संस्थागत निवेशकों के लिए शेयरों की खरीद के आवंटन का प्रारूप जारी करेगा।  सूत्रों का कहना है कि सेबी भारतीय बाजारों में खरीद से पहले आवंटन को अनिवार्य बना सकता है। इस समय म्युचुअल फंड और एफपीआई जैसे सामूहिक निवेशकों को बाजार से बड़ी तादाद में शेयरों को किसी विशेष योजना में आवंटित किए बिना खरीदने की मंजूरी है। नए प्रारूप के तहत फंडों को शेयर खरीद से पहले यह तय करना होगा कि खरीदे गए शेयरों में से कितने किस योजना में जाएंगे। 
 
यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि बहुत से म्युचुअल फंड अपनी योजनाओं में मनमाने तरीके से शेयरों का आवंटन कर रहे थे। वे आमतौर पर अपनी मुख्य योजनाओं को तरजीह देते थे।  इस समय विभिन्न योजनाओं में शेयरों के आवंटन का कोई एकसमान प्रारूप नहीं है। उदाहरण के लिए इस समय कुछ संस्थान सार्वजनिक निर्गमों में योजना के हिसाब से आवंटन करते हैं, जबकि अन्य फंड हाउस या निवेश प्रबंधक के स्तर पर आवंटन करते हैं।  सूत्रों का कहना है कि सेबी को कई मौकों, विशेष रूप से आईपीओ के एंकर आवंटन के दौरान ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ा है, जिसमें फंड हाउस ने जारी ज्यादातर शेयरों का आïवंटन अपनी सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली योजनाओं में कर दिया। इससे अन्य योजनाओं को नुकसान हुआ। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (क्यूआईपी) और बड़े सौदों में भी ऐसी ही स्थितियां सामने आई हैं। ऐसी गतिविधियों से किसी फंड की कुछ योजनाओं के निवेशक छले जाते हैं। 
 
सूत्रों का कहना है कि सेबी इस मुद्दे पर पहले ही बड़े एफपीआई और म्युचुअल फंडों से बात कर चुका है। सूत्र ने कहा, 'नियामक इन गतिविधियों को मानकीकृत बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि पूरे फंड में आवंटन समान हो।' सूत्र ने कहा कि आरंभिक सार्वजनिक निर्गमों (आईपीओ) और अन्य सार्वजनिक निर्गमों में अमूमन आवंटन को लेकर दिक्कतें आती हैं क्योंकि यह जानने का कोई तरीका नहीं है कि प्रत्येक योजना में कितना आïवंटन किया जाएगा। अगर आवंटन उम्मीद से अधिक होता है तो स्थिति पेचीदा बन जाती है। कोई योजना पूरी राशि को खपाने की स्थिति में नहीं हो सकती है। 
 
कारोबार से पूर्व आवंटन को हार्ड और सॉफ्ट दो तरीकों से लागू किया जा सकता है। हार्ड पूर्व कारोबार आवंटन में फंड हाउस को प्रत्येक योजना के लिए अलग-अलग ऑर्डर देने होंगे। जबकि सॉफ्ट पूर्व कारोबार आवंटन में ऑर्डरों को क्रियान्वित करने वाले ब्रोकरों को पहले से यह निर्देश दिए जाएंगे कि खरीदे गए कितने शेयर किस योजना में जाएंगे। वैश्विक स्तर पर नियामक हार्ड पूर्व कारोबार आवंटन को तरजीह देते हैं क्योंकि अन्य तरीकों में दुरुपयोग का जोखिम होता है। 
 
एफपीआई का विरोध 
 
एफपीआई पहले ही ऐसे तरीके अपनाए जाने को लेकर अपनी नाखुशी जाहिर कर चुके हैं। उनकी लॉबी एशिया सिक्योरिटीज इंडस्ट्री ऐंड फाइनैंशियल मार्केट्स एसोसिएशन (असिफमा) ने सेबी को एक पत्र लिखा है। इसमें नियाम से आग्रह किया गया है कि विदेशी फंडों को इन नियमों के दायरे से बाहर रखा जाए। 
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