कच्चे तेल खरीदारों का नेटवर्क बनाएगा भारत

रॉयटर्स | नई दिल्ली Apr 26, 2018 09:58 PM IST

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज कहा कि भारत एशिया के अन्य बड़े तेल खरीदारों चीन, दक्षिण कोरिया और जापान के साथ एक नेटवर्क बनाने पर काम कर रहा है, जिससे विक्रेताओं के साथ कीमतों को लेकर बेहतर तरीके से मोलभाव किया जा सके।  उन्होंने कहा, 'मैं एशिया की 4 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ बड़े तालमेल की संभावना देख रहा हूं। भारत कोशिश करेगा कि इन 4 अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक नेटवर्क बनाया जाए।'  उन्होंने कहा, 'एशिया की चार बड़ी अर्थव्यवस्थआओं को एक साथ आना चाहिए। भारत इन चार देशों के बीच एक नेटवर्क बनाने की कोशिश करेगा।' उन्होंने ओपेक देशों से कच्चे तेल के आयात का हवाला देते हुए इसकी जरूरत पर जोर दिया। 

 
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक कच्चे तेल की कुल वैश्विक मांग में चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से ज्यादा है।  इस माह की शुरुआत में नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा मंच में प्रधान ने चीन की सीएनपीसी के साथ बैठक की थी और उम्मीद जताई थी कि एशिया के अन्य बड़े तेल आयातकोंं के साथ दोनों देश  भविष्य में तेल के बेहतर दाम को लेकर काम करेंगे, जिससे इस क्षेत्र में तेल उत्पादकों से कच्चा तेल सही कीमत पर मंगाया जा सके।  आईईएफ में अपने भाषण में प्र्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि उपभोक्ताओं व ग्राहकों दोनों के लिए तेल के दाम तर्कसंगत होने चाहिए।  इसके अलावा पेट्रोलिमय और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भारत के सबसे बड़े सरकारी तेल रिफाइनर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन संजीव सिंह से कहा था कि वह अपने चीनी समकक्ष के साथ समन्वय स्थापित करें और तेल निर्यातक देशों के संगठन के साथ बातचीत को लेकर आम सहमति बनाने की कयावद करें। बाजार के हिस्सेदारों को इस बात पर संदेह है कि एशिया के तेल खरीदार अपनी खरीद को लेकर तालमेल बिठाने में सफल होंगे क्योंकि उनकी ऊर्जा जरूरतोंं और हितों में भारी अंतर है, जिसमें उनके तेल शोधक संयंत्रों के मुताबिक कच्चे तेल की गुणवत्ता का सवाल भी शामिल है। 
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