फिच ने नहीं बढ़ाई रेटिंग

इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली Apr 27, 2018 09:43 PM IST

भारत की रेटिंग मूडीज द्वारा बढ़ाए जाने के बाद फिच रेटिंग ने शुक्रवार को भारत की सॉवरिन रेटिंग न्यूनतम निवेश श्रेणी में बरकरार रखी है। फिच ने यह फैसला राजकोषीय समेकन और कठिन लेकिन सुधरते कारोबारी माहौल को देखते हुए किया है। इसमें पंजाब नैशनल बैंक मेंं हुए 13,000 करोड़ रुपये के घोटाले का भी उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सरकारी बैंकोंं में सरकार द्वारा किया गया पूंजी निवेश खराब कर्ज के समायोजन में ही चला जाएगा, न कि उससे नया कर्ज दिया जा सकेगा।  अब तीन वैश्विक रेटिंग एजेंसियोंं में से 2, फिच और एसऐंडपी ने भारत को निवेश की श्रेणी में निचले स्तर पर रखा है। 
 
फिच ने भारत की रेटिंग का परिदृश्य पूर्ववत बरकरार रखा है।  वित्त मंत्रालय फिच रेटिंग्स द्वरा रेङ्क्षटंग के उन्नयन की कवायद कर रहा था, जैसा कि मूडीज इन्वेस्टर सर्विस ने पिछले साल नवंबर में किया था।  फिच ने 1 अगस्त 2006 को भारत की सॉवरिन रेटिंग को जंक श्रेणी से ऊपर किया था।  रेटिंग एजेंसी ने अपने बयान में कहा है, 'फिच रेटिंग ने भारत की दीर्घावधि विदेशी मुद्रा इशूवर डिफॉल्ट रेटिंग (आईडीआर) बीबीबी बरकरार रखी है।' यह बताता है कि फिच की निगाह में भारत सरकार के ऋण-पत्र पूंजी लगाने लायक तो हैं पर यह निवेश की न्यूनतम श्रेणी के हैं। रेटिंग एजेंसी ने अपने ताजा आकलन में कहा है कि मध्यम अवधि में देश की आर्थिक वृद्धि तेज होने की संभावना मजबूत है। फिच ने देश को बीबीबी-रेटिंग 11 साल पहले दी थी।  फिच ने देश की आर्थिक वृद्धि की दर चालू वित्त वर्ष के लिए 7.3 प्रतिशत रहने तथा 2019-20 के लिए 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है। फिच ने कहा , 'स्थिर परिदृश्य से यह झलका है कि (देश की) रेटिंग में सुधार के अनुकूल और प्रतिकूल बातें बराबर बराबर बनी हुई हैं।' फिच ने यह कदम तब उठाया है जब कि मूडीज ने 14 साल बाद देश की रेटिंग को बेहतर किया है। हालांकि एसऐंडपी ने भी भारत की स्वायत्त रेटिंग को बरकरार रखा था।  फिच ने कहा कि देश का राजकोषीय वित्तपोषण कमजोर है लेकिन चालू खाता घाटा की स्थिति अनुकूल है। उसने कहा कि उभरते बड़े बाजारों में भारत की मध्यम अवधि में वृद्धि की संभावनाएं सबसे मजबूत हैं। 
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