आईबीसी से इस्पात कंपनियों के लिए खुली राह

अदिति दिवेकर | मुंबई Apr 27, 2018 09:46 PM IST

देश में 30 करोड़ टन इस्पात उत्पादन के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए सरकार द्वारा मेक इन इंडिया पर जोर दिए जाने के बावजूद वैश्विक खिलाड़ी केवल ऋणशोधन एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) के जरिये भारत में प्रवेश कर सकती हैं। ऋणशोधन प्रक्रिया का सामना कर रही एस्सार स्टील के लिए निप्पॉन स्टील और सुमितोमो मेटल के साथ मिलकर आर्सेलरमित्तल एक दमदार उम्मीदवार है। लेकिन भारतीय बाजार में अब तक किसी भी विदेशी इस्पात कंपनी ने अब तक कोई उल्लेखनीय मौजूदगी दर्ज नहीं कराई है।
 
विश्लेषकों का कहना है कि कारोबारी माहौल में स्थायित्व के अभाव के कारण वैश्विक इस्पात कंपनियां भारतीय बाजार में उतरने से परहेज करती हैं। ब्रिटेन के लिबर्टी हाउस ग्रुप के कार्यकारी चेयरमैन संजीव गुप्ता ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, 'भारतीय इस्पात बाजार में अपार संभावनाएं मौजूद हैं और लेकिन यह एक कठिन बाजार (कारोबार करने के लिहाज से) है।' लिबर्टी हाउस ने गैर-सूचीबद्ध कंपनी भूषण पावर ऐंड स्टील के लिए बोली लगाई है जो पिछले साल जून में ऋणशोधन प्रक्रिया के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तैयार 12 कंपनियों की सूची में शामिल है।
 
आर्सेलरमित्तल के कार्यकारी उपाध्यक्ष ब्रायन अरान्हा ने कहा, 'भारत में हम 2007-08 से ही संभावनाएं तलाश रहे हैं। हमने नए संयंत्रों के लिए महत्त्वाकांक्षी योजनाएं बनाई थीं लेकिन भारत में संभावनाएं उतनी अच्छी नहीं थीं।' इस्पात बनाने वाली विश्व की सबसे बड़ी कंपनी आर्सेलरमित्तल ने 500 अरब रुपये के निवेश से झारखं्रड में एक नई इस्पात योजना शुरू करने की योजना बनाई थी लेकिन भूमि अधिग्रहण एवं अन्य नियामकीय बाधाओं के कारण उसे देरी का सामना करना पड़ा। विदेशी निवेश के लिहाज से घरेलू इस्पात उद्योग की हिस्सेदारी दशमलव में दिखती है। दक्षिण कोरिया की दिग्गज कंपनी पोस्को की भारतीय इकाई पोस्को इंडिया का महाराष्ट्र में एक छोटा संयंत्र है जो कच्चे माल की सोर्सिंग दक्षिण कोरिया से करता है। इसी प्रकार यूरोप से कच्चे माल का आयात करने वाली कंपनी टुसेनक्रप इंडिया का महाराष्ट्र के नासिक में 35,000 टन का एक संयंत्र है। ऑटोमोटिव इस्पात के लिए स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) के साथ एक संयुक्त उद्यम स्थापित करने के लिए सहमति पत्र के जरिये आर्सेलमित्तल ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी।
 
नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया में शामिल एक बैंकर ने कहा, 'केयर्न और वोडाफोन जैसे मामलों ने यह साबित किया है कि यहां अनुबंधों को लेकर प्रतिबद्धता का अभाव है और भारत में कानून कभी भी बदल सकता है। इससे वैश्विक बाजार को मिश्रित संकेत मिला। हमें लगता है कि आज कोई भी भारत आने के लिए तैयार नहीं है।' पोस्को ने अपनी भारतीय सहायक इकाई खोलने और ओडिशा में 12 अरब डॉलर के निवेश से इस्पात संयंत्र स्थापित करने के लिए जून 2005 में एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। पोस्को के एक मुंबई के डीलर ने कहा, 'कंपनी ने भरोसेमंद नीतिगत माहौल न होने के कारण एनसीएलटी की प्रक्रिया में शामिल होने से खुद को दूर ही रखा जबकि वहां खरीदारी के लिए परिसंपत्तियां उपलब्ध थीं।'
 
भारत में इस्पात की क्षमता करीब 12.5 करोड़ टन है और 30 करोड़ टन के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए उसे 17.5 करोड़ टन क्षमता जोडऩे की जरूरत है। साल 2030 तक इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए देश में करीब 1.3 करोड़ टन नई क्षमता तैयार करने की आवश्यकता है।
कीवर्ड IBC, code, IBBI, NCLT, RBI,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक