एफपीआई: 13 शेयरों में रिकॉर्ड निवेश

दीपक कोरगांवकर और पुनीत वाधवा | मुंबई/नई दिल्ली Apr 29, 2018 09:54 PM IST

जनवरी से मार्च तिमाही के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के निवेश पैटर्न में भले ही कोई खास बदलाव नहीं हुआ हो लेकिन एसऐंडपी बीएसई200 सूचकांक में शामिल 13 कंपनियों में एफपीआई हिस्सेदारी रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंच गई। इन शेयरों में रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल), इंडसइंड बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, अशोक लीलैंड और आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस शामिल हैं। कैपिटालाइनप्लस के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई के पसंदीदा शेयरों में लार्सन ऐंड टुब्रो (एलऐंडटी), एस्कॉट्ïर्स, जुबिलैंट फूडवक्र्स, ऐक्सिस बैंक, अमर राजा बैटरीज, टेक महिंद्रा, माइंडट्री, इंटरग्लोब एविएशन और दिविज लैबोरेटटरीज शामिल रहे।

 
तिमाही के दौरान शेयरधारिता पैटर्न का खुलासा करने वाली 200 कंपनियों के विश्लेषण से पता चलता है कि 71 कंपनियों में एफपीआई की हिस्सेदारी बढ़ी जबकि 129 कंपनियों में दिसंबर 2017 में समाप्त तिमाही के मुकाबले एफपीआई हिस्सेदारी में गिरावट आई। म्युचुअल फंडों ने 135 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई जबकि 62 कंपनियों में उनकी हिस्सेदारी घटी और तीन में हिस्सेदारी अपरिवर्तित रही। कुल मिलाकर एसऐंडपी बीएसई200 कंपनियों में म्युचुअल फंडों की एकीकृत हिस्सेदारी 6.3 फीसदी पर सर्वकालिक ऊंचाई पर पहुंच गई। पिछली तिमाही के मुकाबले उसमें 30 आधार अंकों की बढ़ोतरी हुई। एसऐंडपी बीएसई200 सूचकांक बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों के करीब 76 फीसदी बाजार पूंजीकरण का प्रतिनिधित्व करता है।
 
मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के मुख्य कार्याधिकारी (संस्थागत इक्विटीज) रजत राजगढिय़ा ने कहा, 'एफपीआई लार्ज-कैप में निवेश कर रहे हैं और अवपर हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। जब कभी हम बाजार में एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों के प्रवाह में तेजी देखते हैं, तो वह आमतौर पर अच्छी वृद्धि की संभावनाओं वाले लार्ज-कैप शेयर होते हैं जो निवेशकों को आकर्षित करते हैं। जहां कभी आय और वृद्धि की संभावनाएं दिखती हैं, विदेशी एवं घरेलू निवेश की प्रवाह उसी ओर होती है।' एफपीआई ने मार्च तिमाही के दौरान भारतीय इक्विटी बाजार में 136 अरब रुपये (212.5 करोड़ डॉलर) का शुद्ध निवेश किया। जबकि आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान म्युचुअल फंडों का शुद्ध निवेश 338 अरब रुपये रहा।
 
क्षेत्रवार देखा जाए तो एफपीआई ने कृषि संबंधी शेयरों, निजी बैंकों, सूचना प्रौद्योगिकी, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, सीमेंट, एफएमसीजी, इस्पात और औषधि कंपनियों के शेयरों में निवेश बढ़ाया। आरआईएल में एफपीआई निवेश 23.81 फीसदी पर नई ऊंचाई को छू गया जबकि दिसंबर के अंत में यह आंकड़ा 23.55 फीसदी रहा था। इसके अलावा बिनानी सीमेंट के अधिग्रहण की दौड़ में शामिल डालमिया भारत की एफपीआई शेयरधारिता में दूसरी सर्वाधिक वृद्धि (फीसदी में) दर्ज की गई। इक्विनॉमिक्स रिसर्च के प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, 'मिड-कैप और स्मॉल-कैप श्रेणी में स्वाभाविक तौर पर उतार-चढ़ाव होता है जबकि विदेशी निवेशक स्थायित्व, आय एवं वृद्धि संभावनाओं को तरजीह देते हैं। यही कारण है कि वे आमतौर पर लार्ज-कैप शेयरों में ही निवेश करते हैं। मुझे लगता है कि आरआईएल अभी भी निवेश आकर्षित करेगी क्योंकि वहां आय बढऩे की गुंजाइश है।'
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