न्यूपावर को डिफॉल्ट के बावजूद सेंट्रल बैंक से मिला ऋण

देव चटर्जी | मुंबई Apr 30, 2018 10:04 PM IST

दीपक कोछड़ द्वारा स्थापित न्यूपावर रिन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड (एनपीआरएल) का वित्तीय गणित दिसंबर, 2015 तक इस कदर बिगड़ गया था कि कंपनी ने अपने ऋणों में डिफॉल्ट करना शुरू कर दिया। हालांकि डिफॉल्ट करने बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने कंपनी को और कर्ज दिया और 2017-18 में ऐक्सिस बैंक से 1 अरब रुपये का ऋण खरीदा। दीपक कोछड़ आईसीआईसीआई बैंक की प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी चंदा कोछड़ के पति हैं।  कंपनी मामलों के मंत्रालय को दी गई सूचनाओं से पता चलता है कि न्यूपावर को 2015 में अपने कारोबार को दो कंपनियों में बांटना पड़ा और अपने कर्ज का पुनर्गठन कराना पड़ा। इस पुनर्गठन के बाद  न्यूपावर और उसकी सहायक कंपनियों पर जिन बैंकों का सबसे ज्यादा कर्ज था, उनमें सरकारी स्वामित्व वाले सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, ऐक्सिस बैंक और केनरा बैंक शामिल थे। निजी क्षेत्र के अन्य बैंकों ने धीरे-धीरे अपना कर्ज कम कर लिया था। 
 
मार्च, 2017 में न्यूपावर पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का 3.32 अरब रुपये और ऐक्सिस बैंक का 3.89 अरब रुपये का कर्ज था। केनरा बैंक का इस कंपनी पर 88 करोड़ रुपये का ऋण था। ऐक्सिस बैंक ने न्यूपावर की सहायक कंपनी ईचंदा ऊर्जा प्राइवेट लिमिटेड को अपना कर्ज 2 अरब रुपये घटाकर 3 अरब रुपये से कम कर लिया। एक सूत्र ने कहा कि शेष ऋण को भी जल्द ही बेचा जाएगा। एक समय ऐक्सिस बैंक का इस कंपनी पर 5 अरब रुपये का कर्ज था। एनपीआरएल का कुल कर्ज मार्च, 2017 में 8.34 अरब रुपये था।  रोचक बात यह है कि इस कंपनी को इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस ने भी 25 करोड़ रुपये का कर्ज दिया। हालांकि सेंट्रल बैंक ने न्यूपावर के ऋणों को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की। लेकिन अंदरूनी सूत्र ने कहा कि इन ऋणों को बैंक के बोर्ड ने मंजूरी दी थी। न्यूपावर को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं मिल पाया। 
 
न्यूपावर के डेट इंस्ट्रुमेंटों को डिफॉल्ट श्रेणी में डालते हुए रेटिंग एजेंसी केयर ने दिसंबर, 2015 में कहा था कि न्यूपावर की 4.64 करोड़ रुपये की बैंक सुविधाओं को मिली रेटिंग में संशोधन ऋण लौटाने में देरी को मद्देनजर रखते हुए किया गया है। केयर ने कहा कि न्यूपावर के अपना मुख्य कारोबार इचंदा ऊर्जा को हस्तांतरित करने के बाद उसकी बैंक सुविधाओं की रेटिंग को वापस लिया गया है। इचंदा ऊर्जा तमिलनाडु में 100 मेगावॉट के पवन ऊर्जा संयंत्र का संचालन कर रही थी। इन ऋणों को बाद में पुनर्गठित किया गया। इसके बाद रेटिंग डिफॉल्ट श्रेणी से फिर बहाल की गई। वर्ष 2015 में न्यूपावर ने 34 मेगावॉट की क्षमता को एक अन्य सहायक कंपनी में बांट दिया। 
 
रोचक बात यह है कि न्यूपावर रिन्यूएबल्स को फरवरी, 2017 में प्राइसवाटरहाउस से अच्छे मूल्यांकन की रिपोर्ट मिली थी। इसी के आधार पर मॉरिशस की एक कंपनी डीएच रिन्यूएबल्स ने न्यूपावर के अपने अनिवार्य परिवर्तनीय समग्र तरजीही शेयर (सीसीपीएस) को इक्विटी में बदल लिया। इससे उसकी न्यूपावर में 55 फीसदी हिस्सेदारी हो गई।  यह धनराशि आने के बाद न्यूपावर की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ। कंपनी को 2016-17 में 2.19 अरब के राजस्व पर 6.2 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, जबकि इससे पिछले वर्ष में कंपनी को 1.63 अरब रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था और उसे 1 अरब रुपये का घाटा हुआ था। 
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