खरीदारों को क्यों लुभा रही फोर्टिस

सुरजीत दास गुप्ता | नई दिल्ली Apr 30, 2018 10:06 PM IST

फोर्टिस हेल्थकेयर पिछले काफी समय से बिकने को तैयार है, जिसे खरीदने में बहुत से उद्यमियों ने रुचि दिखाई है। इसे खरीदने की दौड़ में प्रतिस्पर्धी अस्पतालों से लेकर प्राइवेट इक्विटी फंड, राजमर्रा का सामान (एफएमसीजी) बनाने वाली कंपनियां और स्वास्थ्य क्षेत्र के अन्य उद्यमियों तक शामिल हैं। सवाल उठता है कि फोर्टिस हेल्थकेयर को खरीदने में इतने उद्यमी रुचि क्यों दिखा रहे हैं?  कंपनी के बोर्ड की बैठक शुक्रवार को होगी, जिसमें सबसे बेहतर बाध्यकारी बोली पर विचार-विमर्श किया जाएगा। विश्लेेषकों का कहना है कि फोर्टिस में खरीदारों की रुचि होने की वजह साफ हैं। फोर्टिस हेल्थकेयर के देशभर में 45 अस्पताल और 300 से अधिक जांच केंद्र हैं। यह देश की दूसरी सबसे बड़ी अस्पताल शृंखला है। सबसे बड़ी अस्पताल शृंखला अपोलो है, जिसके 10,000 बेड क्षमता वाले 64 अस्पताल हैं। इस वजह से फोर्टिस को खरीदने वाली कोई अंतरराष्ट्रीय या घरेलू अस्पताल शृंखला आसानी से से शीर्ष मुकाम पर पहुंच जाएगी।  
 
अंतरराष्ट्रीय अस्पताल कंपनियों को भारत में नए अस्पताल खोलना जटिल और ज्यादा समय की खपत वाला कदम लगता है। हालांकि कोलंबिया एशिया इसका अपवाद है, जिसने अधिग्रहण भी किया है और नए अस्पताल खोले हैं। इस तरह भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रवेश के लिए अधिग्रहण को ज्यादा बेहतर तरीका माना जाता है। लेकिन ऐसी महत्त्वाकांक्षा वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भारत में जिस एक दिक्कत का सामना करना पड़ता है, वह यह है कि यहां अधिग्रहण के लिए बड़ी तादाद में अस्पताल शृंखलाएं नहीं हैं। ऐसी एक अस्पताल शृंखला मैक्स हेल्थकेयर है, लेकिन यह बिकाऊ नहीं है। इसके अलावा एक अग्रणी अस्पताल समूह के वरिष्ठ कार्याधिकारी ने कहा, 'अब भी फोर्टिस की एक मजबूत प्रबंधन टीम है, जो उससे एक दशक से अधिक समय से जुड़ी है। यह बहुत अहम है क्योंकि अच्छे अस्पताल प्रबंधन कार्मिकों की  कमी है।' यहां यह बताया जा रहा है कि खरीदारों के लिए फोर्टिस हेल्थकेयर को खरीदने के क्या मायने हैं।
 
आईएचएच हेल्थकेयर 
 
मलेशिया की होल्डिंग कंपनी आईएचएच हेल्थकेयर का पहले अपोलो के साथ गहरा संबंध था, जिसमें उसकी 10 फीसदी हिस्सेदारी है। लेकिन अब उसने अपना रास्ता बदलने और अधिग्रहण करने का फैसला किया है। आईएचएच हेल्थकेयर ने 2015 में हैदराबाद की ग्लोबल हॉस्पिटल्स में 73.4 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी, जिसके 2,000 बेड क्षमता वाले 10 से अधिक अस्पताल हैं। आईएचएच हेल्थकेयर भारत को प्रमुख बाजार के रूप में देखती है। विश्लेषकों का कहना है कि यह मलेशिया कंपनी फोर्टिस को एक अच्छे दांव के रूप में देख रही है। 
 
डाबर के बर्मन 
 
डाबर के बर्मन परिवार ने फोर्टिस हेल्थकेयर की बोली लगाने के लिए हीरो समूह के सुनील मुंजाल के साथ गठजोड़ किया है। वे भी स्वास्थ्य कारोबार में नए नहीं हैं। उनकी फोर्टिस हेल्थकेयर में पहले ही अल्पांश हिस्सेदारी है। बर्मन परिवार ने 2013 में हेल्थकेयर एट होम की स्थापना की थी, जो उनका इसी नाम की ब्रिटेन की कंपनी के साथ संयुक्त उद्यम है। सुनील मुंजाल हीरो मोटोकॉप में अपनी ज्यादातर हिस्सेदारी बेचकर अन्य क्षेत्रों में निवेश कर रहे हैं और इसलिए उनके लिए अस्पताल कारोबार निश्चित रूप से एक अच्छा निवेश है। 
 
रेडियंट लाइफ केयर 
 
तीसरी बोलीदाता रेडियंट लाइफ केयर की स्थापना अभय सोई ने ऋणग्रस्त अस्पतालों को उबारने के लिए की थी। पिछली कुछ तिमाहियों से घाटा उठा रही और अपने मार्जिन पर दबाव झेल रही फोर्टिस निश्चित रूप से रेडियंट को एक मौका मुहैया कराती है। 
 
मणिपाल हॉस्पिटल 
 
स्वास्थ्य कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि मणिपाल हॉस्पिटल पीई फंड टीपीजी की मदद से बोली लगा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मणिपाल इस खेल में तुलनात्मक रूप से छोटा खिलाड़ी है, जिससे भारत में 11 और विदेश में 2 अस्पताल हैं। लेकिन फोर्टिस को अधिग्रहीत करने से वह बड़े  स्वास्थ्य समूहों की जमात में शामिल हो जाएगा। 
 
फोसुन इंटरनैशनल 
 
चीनी बोलीदाता फोसुन भारत के स्वास्थ्य कारोबार में नई नहीं है। हालांकि उसने अब तक ज्यादातर निवेश दवा क्षेत्र में किया है। इसने 1.09 अरब डॉलर में ग्लैंड फार्मा की 74 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। इसकी फोर्टिस को खरीदने की पेशकश उसकी भारत में अस्पताल कारोबार में पहला प्रवेश होगा। हालांकि उसका चीन, ब्राजील और अन्य देशों में इस क्षेत्र में निवेश है। 
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