एनसीएलटी ने रुचि सोया पर फैसला सुरक्षित रखा

अद्वैत राव पलेपू | मुंबई May 02, 2018 09:55 PM IST

दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही ऋणग्रस्त कंपनी रुचि सोया इंडस्ट्रीज ने आईसीआईसीआई बैंक के खिलाफ आवेदन दायर किया है। कंपनी ने कहा है कि इस बैंक ने उसके चालू खाते से 48 करोड़ रुपये निकाले हैं, जिन्हें वापस करवाने के लिए राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) का मुंबई पीठ हस्तक्षेप करे।  रुचि सोया पर 31 दिसंबर, 2017 को करीब 120 अरब रुपये का बकाया कर्ज था, जिसे ऋण शोधन एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) के तहत 8 दिसंबर, 2017 को कंपनी दिवालिया समाधान प्रक्रिया के तहत लाया गया। रुचि सोया के समाधान पेशेवर (आरपी) की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील नवरोज शीरवाई ने पीठ को बताया कि बैंक ने स्थगन अवधि के दौरान कंपनी के चालूू खाते से करीब 48 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। 
 
उन्होंने कहा कि बैंक ने कंपनी के चालू खाते से पैसे निकाल लिए और समाधान पेशेवर की बिना अनुमति के ही तीसरे पक्षों को यह पैसा भेेज दिया। उन्होंने पीठ को बताया बैंकों जैसे वित्तीय संस्थान ऋणदाताओं की समिति की सहमति के बिना अपनी मनमर्जी से कंपनी ऋणदाता पर अपना ऋण कम नहीं कर सकते। वे आईबीसी की धारा 14 से बंधे हैं।  एनसीएलटी ने स्थगन आदेश 15 दिसंबर, 2017 को जारी किया था। आईबीसी की धारा 14 एनसीएलटी को कंपनी ऋणदाता के नाम से स्थगन आदेश देने की मंजूरी देती है। विवाद का विषय यह है कि रुचि सोया ने बैंक से नए लैटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) के लिए संपर्क किया था। ये बैंक ने 16 और 18 दिसंबर को जारी किए। तब तक स्थगन अवधि शुरू हो चुकी थी। 
 
बैंक की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील जल अंध्यारुजिनाम ने पीठ को बताया कि जब बैंक ने एलसी जारी की तो उसे 15 दिसंबर के स्थगन आदेश के बारे में पता नहीं था। आरपी ने बैंक को 19 तारीख को ईमेल कर निर्देश दिया कि वे चालू खाते से कोई पैसा न निकालें। उन्होंने कहा कि स्थगन आदेश की सार्वजनिक घोषणा 25 दिसंबर को हुई। 
कीवर्ड NCLT, नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी),

  
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