सुनील मित्तल की कंपनी के सामने आगे और चुनौतियां

सुरजीत दास गुप्ता | नई दिल्ली May 02, 2018 09:57 PM IST

भारती एयरटेल के लिए अगले 12 महीने मुश्किल भरे रहेंगे क्योंकि बाजार हिस्सेदारी हासिल करने के लिए रिलायंस जियो लगातार अपनी शुल्क दरें बहुत कम बनाए हुए है। निस्संदेह एयरटेल इस तिमाही में कुछ लाभ दिखाने में सफल रही है। हालांकि कुछ विश्लेषकों ने अनुमान जताया था कि कंपनी को दशकों में पहली बार घाटा होगा।  जियो को भारती एयरटेल पर तीन प्रकार की बढ़त हासिल हैं। पहली, जियो का नया और केवल 4जी नेटवर्क है, जिसकी परिचालन लागत काफी कम है। दूसरा, इस लाभ की वजह से वह कीमतों का खेल भारती एयरटेल की तुलना में ज्यादा बेहतर तरीके से खेल सकती है और इस खेल में उसके मार्जिन में एयरटेल जितनी कमी नहीं आएगी। जियो 40 फीसदी राजस्व हिस्सेदारी हासिल करना चाहती है, जो  इस समय 15 फीसदी है। तीसरा, रिलायंस इंडस्ट्रीज तेल एवं गैस कारोबार से होने वाले मुनाफे की बदौलत अपने आंतरिक कोष से और कम ब्याज दरों पर ऋण जुटा सकती है। भारती के पास यह विकल्प नहीं है। अगर जियो आईपीओ लेकर आती है तो उससे कंपनी पर ऋण का भार काफी कम हो सकता है। एयरटेल साफ तौर पर पहली दो बढ़तों को खत्म करने की कोशिश कर रही है। यह इस साल अपने नेटवर्क (2जी, 3जी) को 4जी एलटीई पर अपग्रेड करने और वीओएलटीई में सक्षम बनाने के लिए चालू वित्त वर्ष में 240 अरब रुपये से अधिक निवेश कर रही है। कंपनी 4जी एलटीई का विभिन्न महानगरों में परीक्षण कर रही है। कंपनी ने पिछले साल भी 160 अरब रुपये का निवेश किया था। हालांकि ज्यादातर विश्लेषकों का मानना है कि एयरटेल को 4जी का कवरेज जियो के बराबर करने और वीओएलटीई शुरू करने में करीब 12 महीने लगेंगे। एक अनुसंधान कंपनी ने अभी एयटेल का 4जी कवरेज 66 फीसदी बताया है, जबकि जियो का 4जी कवरेज 96 फीसदी है। 
 
इससे एयरटेल को अपनी प्रतिस्पर्धी जियो की कम लागत के बराबर आने में मदद मिलेगी। दूरसंचार क्षेत्र पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि इस निवेश से राजस्व में बढ़ोतरी नहीं होगी क्योंकि एआरपीयू घटता जा रहा है। इससे केवल उन्हें अपने 2जी और 3जी ग्राहकों को 4जी नेटवर्क पर लाकर उन्हें जोड़े रखने में मदद मिलेगी ताकि वे जियो की तरफ न जाएं। भारती पहले ही यह घोषणा कर चुकी है कि वह दो साल में अपने 3जी नेटवर्क बंद कर देगी, लेकिन वह अपने 2जी ग्राहकों के नई तकनीक को अपनाने तक 2जी नेटवर्क बनाए रखेगी। इसलिए उनके 3जी नेटवर्क बंद कर देने से भी जियो और उनकी परिचालन लागत में थोड़ा अंतर रहेगा। 
 
जियो का दूसरा हथियार मामूली शुल्क और मुफ्त फीचर फोन रहे हैं। भारती एयरटेल जैसी बहुत सी दूरसंचार कंपनियों ने यह माना था कि प्रारंभिक कीमत पेशकश पहले 3 से 6 महीने रहेगी और जियो को अपने कारोबार को चलाने के लिए शुल्क बढ़ाने होंगे। वे अपनी शुल्क दरें जियो के बराबर करने के बजाय उसकी कीमतों के खिलाफ नियामक के पास गए।  लेकिन उन्हें दोहरा झटका लगा। नियामक ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और जियो ने 31 मार्च, 2017 के बाद भी आक्रामक कीमतें बरकरार रखीं। इससे पहले वह ग्राहकों को मुफ्त में सेवाएं दे रही थी। जब एयरटेल ने यह महसूस किया कि जियो शुल्क कम नहीं करने जा रही है तो उसने भी पलटवार किया और कुछ महीनों बाद दोनों के बीच कीमतों के अंतर को काफी हद तक खत्म करने में सफल रही है। लेकिन इससे एयरटेल के मुनाफे में कमी आई है। दूरसंचार पर नजर रखने वाले एक विशेषज्ञ ने कहा, 'जियो आईपीओ लाने की योजना बना रही है, जिससे कीमत दबाव अगले 12 से 18 महीने तक बना रहेगा। लेकिन उससे पहले जियो राजस्व का बड़ा हिस्सा हासिल करना चाहती है।'
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