एनसीएलटी ने पकड़ी बिनानी के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल की गलती

अभिषेक रक्षित | कोलकाता May 03, 2018 09:50 PM IST

एनसीएलटी के कोलकाता पीठ ने अपने आदेश में बिनानी सीमेंट के प्रवर्तकों की तरफ से कंपनी के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल विजय कुमार अय्यर पर लगाए गए आरोप को सही ठहराया है। इन पर आरोप था कि इन्होंने फर्म का मूल्यांकन ठीक तरह से नहीं किया और दिवालिया संहिता की धाराओं का उल्लंघन किया, जिसके चलते समाधान प्रक्रिया की लागत बढ़ी। एनसीएलटी के कोलकाता पीठ की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है, कंपनी की परिसंपत्तियों का मूल्यांकन सही तरीके न किए जाने का गंभीर आरोप लगाया गया था और हमने इस दलील में दम पाया।

 
आदेश के मुताबिक, समापन कीमत 23 अरब रुपये तय हुई थी। हालांकि बोलीदाताओं ने इस कीमत के मुकाबले दोगुनी कीमत पर कंपनी के अधिग्रहण में रुचि प्रदर्शित की। पेशकश के हालिया संशोधन के बाद अल्ट्राटेक सीमेंट बिनानी सीमेंट के अधिग्रहण के लिए 79.60 अरब रुपये देने के लिए तैयार है, वहीं डालमिया भारत की अगुआई वाला कंसोर्टियम 67 अरब रुपये से ज्यादा देने पर सहमत हुआ। बिनानी सीमेंट के प्रवर्तक ब्रज बिनानी ने आरोप लगाया था कि पहले कंपनी के लेनदारों ने इसकी परिसंपत्तियों का मूल्यांकन 150 अरब रुपये से ज्यादा किया था, लेकिन कंपनी की दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने पर लेनदारों ने अय्यर के साथ इसका मूल्यांकन घटाकर 30 अरब रुपये से कम कर दिया था। हालांकि रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने इस आरोप से इनकार किया है।
 
ट्रिब्यूनल ने कहा कि समाधान प्रक्रिया की लागत कम होती, लेकिन कंपनी की लेनदारों की समिति की मंजूरी के बाद रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने लागत व आवश्यक शुल्क के बारे में खुद ही जानकारी दी और इसके लिए आंकड़ों आदि की मदद नहीं ली। आदेश में कहा गया है, लगता है कि न तो सीओसी और न ही रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने सलाहकारों या अन्य प्रोफेशनल की नियुक्ति की परवाह नहीं की और काम व इसकी जटिलता का अंदाजा लगाए बिना लागत व शुल्क तय कर दी। इसके अलावा अय्यर ने सलाहकारों, कानूनी प्रोफेशन आदि के अलावा बिनानी सीमेंट के प्रबंधन के लिए 22 प्रतिनिधियों की नियुक्ति की थी।
 
एनसीएलटी के आदेश में कहा गया है, ज्यादातर काम एक फर्म से आउटसोर्स किए गए, जिसमें वह पार्टनर हैं और इस वजह से दिवालिया संहिता का उल्लंघन हुआ। इसमें संदेह नहीं है कि दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही कंपनी के ऊपर इन्होंने अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल दिया। अगर रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने ध्यान रखा होता तो वह इतनी सारी नियुक्तियों को टाल सकते थे।  इस बारे में जनवरी 2018 में दिवालिया बोर्ड ने परिपत्र जारी किए थे, जिसमें रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल को अपनी जिम्मेदारियों की आउटसोर्सिंग की मनाही है।
 
ट्रिब्यूनल के मुताबिक, सीओसी ने अय्यर को 60 लाख रुपये मासिक की मंजूरी दी जबकि अय्यर के लिए सीओसी ने 72.5 लाख रुपये का बीमा प्रीमियम मंजूर किया। इसके अलावा डेलॉयट को 2.4 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, वहीं डेलॉयट ने अंकेक्षण पूर्व खर्च व निगरानी के लिए 65 लाख रुपये वसूले थे। अय्यर डेलॉयट के पार्टनर हैं। रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल व सीओसी ने एनसीएलटी के कोलकाता पीठ को नोटिस भेजकर आदेश की कुछ बातों पर स्पष्टीकरण मांगा है। इस बारे में टिप्पणी के लिए अय्यर से संपर्क की कोशिश नाकाम रही।
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