डेरिवेटिव में अक्टूबर से आधी रात तक कारोबार

पवन बुरुगुला और श्रीमी चौधरी | मुंबई May 04, 2018 09:42 PM IST

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने घरेलू स्टॉक एक्सचेंजों को रात 11:55 तक इक्विटी डेरिवेटिव कारोबार करने की शुक्रवार को अनुमति दे दी। इस छूट के पीछे सेबी का मकसद भारतीय डेरिवेटिव कारोबार को सिंगापुर और दुबई जैसे स्थानों पर जाने से रोकना है। इससे घरेलू निवेशकों को बाजार में कारोबार बंद होने के बाद आने वाली खबरों के मुताबिक कीमत तय करने का हथियार भी मिल जाएगा। कारोबार के नए नियम एक अक्टूबर से लागू होंगे। जो एक्सचेंज निवेशकों को यह सेवा देना चाहते हैं, उन्हें सेबी से अनुमति लेनी होगी। बाजार नियामक जोखिम प्रबंधन व्यवस्था और एक्सचेजों के बुनियादी ढांचे के आधार पर उनके अनुरोध का आकलन करेगा। 
 
सेबी ने एक परिपत्र में कहा कि जो स्टॉक एक्सचेंज कारोबार की अवधि बढ़ाना चाहते हैं, उन्हें पूर्व अनुमति लेनी होगी। इस बारे में उन्हें जोखिम प्रबंधन के लिए अपनी व्यवस्था, निपटान प्रक्रिया, कर्मचारियों की उपलब्धत, सिस्टम क्षमता और निगरानी व्यवस्थाओं के बारे में विस्तृत जानकारी देनी होगी।  बाजार के जानकारों का कहना है कि सेबी के इस कदम से डेरिवेटिव बाजारों में ज्यादा कारोबार होगा। दुनियाभर में यह आम बात है। डाऊ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज और एफटीएसई 100 जैसे सूचकांकों में दिनभर विभिन्न एक्सचेंजों में कारोबार होता है। पिछले दशक के दौरान भारत को अपना कारोबार सिंगापुर एक्सचेंज जैसे बाजारों के हाथों गंवाना पड़ा है जो चौबीसों घंटे भारतीय डेरिवेटिव्स का कारोबार करते हैं। साथ ही इस कदम से सेबी को जिंस बाजारों को इक्विटी के साथ जोडऩे में मदद मिलेगी। जिंस डेरिवेटिव पहले ही सुबह 10 बजे से लेकर रात 11:55 तक खुले रहते हैं।  बीएसई के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी आशीष कुमार चौहान ने कहा, 'हम इक्विटी डेरिवेटिव के लिए कारोबार की अवधि बढ़ाने के सेबी के कदम का स्वागत करते हैं। दुनियाभर में डेरिवेटिव एक्सचेंज अधिक समय तक खुले रहते हैं। यह एक सकारात्मक कदम है और इससे भारतीय बाजार अंतरराष्ट्रीय बाजार और भारतीय जिंस डेरिवेटिव बाजारों के अनुरूप हो जाएगा।'
 
परिपत्र के जरिये सेबी ने केवल कारोबार की अवधि बढ़ाई है और यह स्टॉक एक्सचेंज को तय करना है कि वे सेवा देंगे या नहीं। दिलचस्प बात है कि सेबी ने नकद बाजारों के लिए भी यह व्यवस्था की थी। लेकिन ब्रोकरों की मजबूत लॉबिंग के कारण किसी भी एक्सचेंज ने इसे नहीं अपनाया। ब्रोकरों की विभिन्न उद्योग संस्थाओं ने डेरिवेटिव में कारोबार के घंटे बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे लागत बढ़ेगी और इसके लिए अभी पर्याप्त क्षमता नहीं है। मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के प्रबंध निदेशक मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि इससे भारतीय एक्सचेंजों की प्रतिस्पद्र्घा में सुधार होगा और वे वैश्विक एक्सचेंजों के साथ कदमताल करेंगे। चूंकि बाजार प्रबंधन की सभी प्रक्रियाएं डिजिटल हैं, इसलिए ब्रोकरों को बदलाव की समस्या से नहीं गुजरना पड़ेगा। अलबत्ता उनकी निर्धारित लागत बढ़ सकती है।
कीवर्ड sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),

  
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