सेबी की समिति ने की पंजीयकों को सूचीबद्ध कराने की सिफारिश

सचिन मामबटा | मुंबई May 04, 2018 09:51 PM IST

नियामकीय समिति ने सिफारिश की है कि किसी इश्यू के सभी बड़े पंजीयक व शेयर हस्तांतरण एजेंटों को सूचीबद्धता की ओर बढऩा चाहिए। प्रमुख मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर इंस्टिट््यूशन (एमआईआई) पर आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर आर गांधी की अगुआई वाली समिति की सिफारिशों में से यह एक सिफारिश है। इस बारे में सार्वजनिक टिप्पणी देने की अंतिम तारीख 19 मई है। यह जानकारी सेबी की वेबसाइट से मिली। रजिस्ट्रार व ट्रांसफर एजेंट (आरटीए) एक इकाई होती है, जो निवेशकोंं का रिकॉर्ड रखती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्वी कंप्यूटरशेयर ऐंड कंप्यूटर ऐज मैनेजमेंट सर्विसेज (कैम्स) के पास म्युचुअल फंडों के निवेशकों के 90 फीसदी खाते हैं। कार्वी के पास भी कॉरपोरेट निवेशक के खातों की 40 फीसदी हिस्सेदारी है। 2 करोड़ से ज्यादा खाते का प्रबंधन करने वालों को पात्र आरटीए या क्यूआरटीए कहा जाता है। समिति ने पाया है कि इनके मालिकाना हक का ढांचा विशाखित होना चाहिए।
 
रिपोर्ट में कहा गया है, समिति का मानना है कि लंबी अïवधि में क्यूआरटी को सूचीबद्ध कराया जाना चाहिए और इसके मालिकाना हक का विस्तार होना चाहिए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अभी मालिकाना हक पर किसी तरह की पाबंदी नहीं है। प्रवर्तकों के लिए भी अपने शेयर की लॉक इन अवधि नहीं है। हालांकि मालिकाना हक में बदलाव के लिए इन्हें पूर्व अनुमति की दरकार होती है। नए मालिक को ऐसी कंपनी का प्रवर्तक बनने के लिए फिट ऐंड प्रॉपर होना चाहिए। एचडीएफसी ने कैम्स की हिस्सेदारी प्राइवेट इक्विटी फर्म वारबर्ग पिनकस को बेचने के लिए समझौता किया था। अन्य प्राइवेट इक्विटी फर्म जनरल अटलांटिक ने साल 2017 में कार्वी में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने की इच्छा जताई थी। समिति ने कहा है कि विनियमित इकाइयां आरटीए में 100 फीसदी हिस्सेदारी रख सकती है। विनियमित इकाइयां उन्हें माना जाता है जो मान्यताप्राप्त ग्लोबल फाइनैंशियल रेग्युलेटर के दायरे में आती हैं।
कीवर्ड sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),

  
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