अलग हुईं डीएसपी और ब्लैकरॉक

बीएस संवाददाता | मुंबई May 07, 2018 09:44 PM IST

अमेरिका की ब्लैकरॉक और हेमेंद्र कोठारी की अगुआई वाले डीएसपी ग्रुप ने अपना म्युचुअल फंड उद्यम डीएसपी ब्लैकरॉक इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स समाप्त कर अपनी राहें अलग कर ली है। सोमवार को घोषित समझौते के तहत डीएसपी ग्रुप इस उद्यम में ब्लैकरॉक की 40 फीसदी हिस्सेदारी लेगा, जो भारत में दोनों के नाम वाली कई म्युचुअल फंड योजनाओं का प्रबंधन व विपणन करता है। ब्लैकरॉक ने एक बयान में कहा, यह बिक्री तब पूरी होगी जब यूनिटधारकों से जुड़ी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। साथ ही यह नियामक की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
 
इस सौदे की कीमत का खुलासा नहीं किया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि क्या डीएसपी व ब्लैकरॉक इस अलगाव के बाद गैर-प्रतिस्पर्धी समझौता करेंगी। ऐतिहासिक तौर पर भारतीय संपत्ति प्रबंधन के क्षेत्र में सौदे एयूएम के 5-7 फीसदी के बराबर हुए हैं, जो सौदे का आकार 40 से 60 अरब रुपये होने का संकेत देता है। हालांकि डीएसपी ने ज्यादा भुगतान किया होगा, यह देखते हुए कि पिछले कुछ महीनों में म्युचुअल फंड के क्षेत्र में काफी तेज बढ़ोतरी हुई है। हेमेंद्र कोठारी की अगुआई वाला डीएसपी समूह भारत की सबसे पुरानी वित्तीय सेवा फर्मों में से एक है। ब्लैकरॉक दुनिया की सबसे बड़ी संपत्ति प्रबंधक है, जिसके पास दिसंबर 2017 के आखिर में 6 लाख करोड़ डॉलर की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां थी।
 
डीएसपी ब्लैकरॉक देश के 10 अग्रणी फंड हाउस में शामिल है, जो करीब 860 अरब रुपये की परिसंपत्तियों (मार्च 2018) का प्रबंधन करता है। डीएसपी ग्रुप के चेयरमैन कोठारी ने एक बयान में कहा, हमने करीब एक दशक तक साथ काम किया और एक ऐसे संस्थान को खड़ा किया जिसकी प्रक्रियाएं व व्यवस्था ठोस रही है। सूत्रों ने पहले बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा था कि ब्लैकरॉक वैश्विक स्तर पर आक्रामक कंपनी है और लंबे समय तक अल्पांश साझेदार नहीं बनी रह सकती है, खास तौर से तब जबकि भारत में संपत्ति प्रबंधन की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है।
 
ब्लैकरॉक के चेयरमैन व सीईओ लॉरेंस फिंक ने कहा, ब्लैकरॉक भारत के लिए प्रतिबद्ध रही है और भारत में संपत्ति प्रबंधन उद्योग पर सकारात्मक असर देखना चाहेंगे। 1995 में डीएसपी ने मेरिल लिंच के साथ डीएसपी मेरिल लिंच बनाया था और इसकी मौजूदगी निवेश बैंकिंग, ब्रोकिंग व संपत्ति प्रबंधन में थी। डीएसपी ब्रोकिंग व निवेश बैंंकिंग संयुक्त उद्यम से मेरिल लिंच के हक में निकली, लेकिन म्युचुअल फंड में हिस्सेदारी बनाए रखी। ब्लैकरॉक की तरफ से मेरिल लिंच के संपत्ति प्रबंधन कारोबार के अधिग्रहण के बाद फंड हाउस का नाम 2008 में ब्लैकरॉक इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स कर दिया गया।
 
फंड हाउस ने पिछले कुछ महीने में काफी निकासी देखी है और करीब आधा दर्जन लोग कंपनी छोड़ गए जो एक दशक से ज्यादा समय से फर्म के साथ जुड़े थे। एक सूत्र ने यह जानकारी दी। उदाहरण के लिए अध्यक्ष व सीआईओ एस नागनाथ ने 15 साल काम करने के बाद पिछले साल मई में फर्म छोड़ दी थी। एक अन्य पुराने कर्मी धवल दलाल ने जुलाई 2016 में कंपनी छोड़ दी थी। फंड हाउस की इक्विटी परिसंपत्तियां पिछले वित्त वर्ष में 28 फीसदी बढ़कर 317 अरब रुपये पर पहुंच गई, जो उद्योग के औसत 34 फीसदी के मुकाबले कम थी। कुल परिसंपत्तियां हालांकि 26 फीसदी बढ़ी, जो उद्योग की 22 फीसदी की बढ़ोतरी के मुकाबले ज्यादा थी। पिछले तीन सालों में उद्योग की परिसंपत्तियां दोगुनी हो गईं और कुल प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां 31 मार्च 2018 को 21 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गईं।
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