आईसीआईसीआई बैंक का शेयर चढ़ा

श्रीपद एस ऑटे और निकहत हेटावकर | मुंबई May 08, 2018 09:39 PM IST

आईसीआईसीआई बैंक मार्च 2018 के वित्तीय नतीजे के एक दिन बाद इसका शेयर 6.9 फीसदी चढ़ गया जबकि बैंक का शुद्ध लाभ साल दर साल के हिसाब से 50 फीसदी फिसला है और इसकी गैर-निष्पादित आस्तियां तेजी से बढ़ी है। बाजार ने इस शेयर को हाथोंहाथ लिया क्योंंकि इसे उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बैंंक की बैलेंस शीट में सुधार होगा क्योंकि दबाव वाली परिसंपत्तियों के कोष से ज्यादातर एनपीए की पहचान हो गई है और परिचालन के मोर्चे पर इसका प्रदर्शन बेहतर रहा है।
 
शेयरखान के सहायक उपाध्यक्ष ललिताभ श्रीवास्तव ने कहा, इसके शेयर में इस वजह से तेजी आई क्योंकि एनपीए के मामले मेंं बैंंक बाजार की उम्मीदों पर खरा उतरा, जो मुख्य रूप से नए एनपीए नियम के मुताबिक रहा। तिमाही के दौरान कुल फिसलन 157.37 अरब रुपये की रही, जो दिसंबर तिमाही के मुकाबले चार गुना ज्यादा है। यह विश्लेषकों के अनुमान के मुताबिक है। उन्हें इस वास्तविकता से भी सहजता मिली कि ज्यादातर फिसलन बैंंक की उस सूची में हुई जिसमें वे कर्ज शामिल होते हैं जिनकी चूक वाली श्रेणी में जाने की संभावना होती है।
 
विश्लेषकों का अनुमान है कि बैंक ने वित्त वर्ष 2019 की शुरुआत अपनी बैलेंस शीट पर कम दबाव के साथ की है और इसका मानना है कि आईसीआईसीआई बैंक के लिए दबाव वाली परिसंपत्तियों की पहचान का काम करीब-करीब पूरा हो चुका है। कर्ज के फिसलन वाली बैंंक की सूची 75 फीसदी से ज्यादा घटी है और मार्च 2018 में यह कुल उधारी का एक फीसदी से भी कम रहा जबकि दिसंबर तिमाही में यह 3.8 फीसदी रहा था। साथ ही आरबीआई की पुनर्घठन योजना के  दायरे की परिसंपत्तियां मसलन रणनीतिक कर्ज पुनर्गठन आदि की परिसंपत्तियां काफी तेजी से घटी। कुल मिलाकर आईसीआईसीआई बैंक के दबाव वाली परिसंपत्तियों का कोष वित्त वर्ष 2018 की चौथी तिमाही में इसके कुल लोनबुक का महज 2.6 फीसदी रहा।
 
प्रबंधन ने संकेत दिया कि नए एनपीए नियम के तहत आने वाले दिनों में और फिसलन की संभावना नहीं है, जिससे निवेशकोंं को राहत मिली। साथ ही वित्त वर्ष 2019 में फिसलन में और तेजी से कमी आने की संभावना है, हालांकि यह मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में थोड़ी ऊंची बनी रह सकती है और इस तरह से जून 2018 की तिमाही में उन परिसंपत्तियों के लिए करीब 10 अरब रुपये का अतिरिक्त प्रावधान करना होगा, जो दिवालिया प्रक्रिया के दायरे मेंं है। क्रेडिट की लागत हालांकि वित्त वर्ष 2020 में नरम होने की संभावना है।
 
विश्लेषकों ने कहा कि एनपीए में बढ़ोतरी ने अन्य मामले में बैंक के अच्छे प्रदर्शन को आच्छादित कर दिया। एडलवाइस सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने कहा, प्रमुख परिचालन का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा और देसी कर्ज की रफ्तार 15 फीसदी से ज्यादा बढ़ी और शुद्ध ब्याज मार्जिन में सुधार हुआ, जिससे शुद्ध ब्याज आय बेहतर रही। इसके अतिरिक्त आईसीआईसीआई बैंंक खुदरा कारोबार पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और लोनबुक में इसकी हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2020 तक 60 फीसदी पर ले जाना चाहता है। बैंक की एमडी व सीईओ चंदा कोछड़ ने कहा, हमारा रिटेल फ्रैंचाइजी काफी मजबूत है और यह 20 फीसदी सालाना की रफ्तार से बढ़ रहा है, वहींं हमारे कॉरपोरेट लोनबुक की रफ्तार 17 फीसदी है। लेकिन हम हम कॉरपोरेट लोनबुक पर संकेंद्रण की अपनी सीमा में कमी लाएंगे। अगले दो सालों में बैंक एनपीए का स्तर 1.5 फीसदी पर पहुंचने की उम्मीद कर रहा है, जो मार्च 2018 के 4.8 फीसदी के मुकाबले काफी कम होगा। 
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