सर्वोच्च न्यायालय पहुंची डालमिया भारत

अभिषेक रक्षित | कोलकाता May 08, 2018 09:40 PM IST

बिनानी सीमेंट की दबाव वाली परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के लिए विगत कामयाब बोलीदाता के तौर पर उभर चुका डालमिया भारत सीमेंट की अगुआई वाला कंसोर्टियम सर्वोच्च न्यायालय में एनसीएलटी के कोलकाता पीठ के फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल कर दी है। एनसीएलटी के पीठ ने दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही बिनानी सीमेंट के अधिग्रहण के लिए अल्ट्राटेक सीमेंट की बड़ी पेशकश को स्वीकार कर लिया है। 4 मई को एनसीएलएटी में एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ स्टे न मिलने के बाद डालमिया भारत ने यह कदम उठाया है। अपीलीय ट्रिब्यूनल ने डालमिया भारत की मांग पर हालांकि तत्काल स्टे का निर्देश नहीं दिया, लेकिन इसकी याचिका पर अगली सुनवाई की तारीख 22 मई तय कर दी।

 
सूत्रों ने कहा कि इस याचिका में डालमिया भारत की प्राथमिक दलील इस दावे पर टिकी हुई है कि एनसीएलटी के कोलकाता पीठ ने आईबीसी की प्रक्रिया का पालन नहीं किया। इसने याचिका इस आधार पर तैयार की है कि आईबीसी व अन्य कानूनी ढांचे के तहत बिनानी सीमेंट के लिए इसे कामयाब बोलीदाता चुना गया था और चयन के हर चरण में कंपनी ने कानूनी प्रक्रिया का पालन किया है। यह याचिका एनसीएलएटी के अंतरिम आदेश को भी चुनौती देता है, जिसने लेनदारों की समिति को बिनानी सीमेंट के लिए बोलीदाता को अंतिम रूप देने के लिए छूट दी है।
 
संपर्क किए जाने पर डालमिया भारत ने इस प्रगति पर टिप्पणी करने से मना कर दिया। इस पर गुरुवार 10 मई को सुनवाई होगी और उसी दिन सीओसी भी अल्ट्राटेक की योजना पर चर्चा के लिए बैठक करेगा। डालमिया भारत के कानूनी वकील ने ट्रिब्यूनल में सुनवाई के दौरान दावा किया था कि इसका चयन लेनदारों की समिति की आंतरिक प्रक्रिया के दस्तावेजों के आधार पर हुआ जो केंद्रीय सतर्कता आयोग व भारतीय बैंक एसोसिएशन के दिशानिर्देशों के मुताबिक था। इसके अतिरिक्त जहां भी जरूरत हुई चयन पर फैसला लेने व सबसे बड़ी बोलीदाता की पात्रता के मामले में आम कानून का इस्तेमाल किया गया। हालांकि ट्रिब्यूनल ने कहा था कि आंतरिक प्रक्रिया के दस्तावेज हितधारकों पर कानूनी तौर पर बाध्यकारी नहीं हैं और अल्ट्राटेक की बोली को शामिल करने के लिए सीओसी इसमें संशोधन कर सकती है, जिसकी बोली डालमिया भारत की अगुआई वाले कंसोर्टियम के मुकाबले 11 अरब रुपये ज्यादा है।
 
बोली प्रक्रिया के बाद सीओसी की तरफ से लेटर ऑफ इंटेंट जारी किए जाने और डालमिया भारत से भुगतान का एक हिस्सा लेने के बावजूद एनसीएलटी ने न सिर्फ अल्ट्राटेक का प्रस्ताव स्वीकार किया बल्कि सीओसी को इस पर विचार करने को भी कहा और डालमिया भारत को अल्ट्राटेक के बराबर बोली लगाने को भी कहा। हालांकि डालमिया भारत के सूत्रों ने कहा कि 67 अरब रुपये से ज्यादा की बोली आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं है और इसने बोली में इजाफा न करने का फैसला लिया। इसके बजाय कंपनी ने बिनानी सीमेंट पर अपना दावा मजबूत करने के लिए कानूनी विकल्प चुना।
 
इस बीच, अल्ट्राटेक के प्रस्ताव पर विचार के लिए सीओसी ने मुंबई में अपनी बैठक 10 मई गुरुवार को करने का फैसला लिया, जब एनसीएलएटी ने डालमिया भारत की याचिका पर तत्काल स्टे देने से इनकार कर दिया। डालमिया भारत के प्रस्ताव का विरोध करने वाले एक सूत्र ने कहा, सर्वोच्च न्यायालय जाने के डालमिया भारत के कदम से सीओसी की बैठक पर असर नहीं पड़ेगा क्योंकि यह एनसीएलएटी के निर्देशों के मुताबिक है। अपने अंतरिम आदेश में अपीलीय ट्रिब्यूनल ने कहा है कि डालमिया भारत के कंसोर्टियम की अपील के लंबित रहने के दौरान सीओसी किसी भी योजना को मंजूर कर सकती है (जो उसे ठीक लगता हो), लेकिन यह अपील पर उनके फैसले पर निर्भर करेगा।
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