टाटा संस ने शिवशंकरन को 7 अरब रुपये चुकाने को कहा

देव चटर्जी | मुंबई May 08, 2018 09:40 PM IST

टाटा संस ने शिवशंकरन और उनकी कंपनी शिवा इंडस्ट्रीज ऐंड होल्डिंग्स के पास 6.99 अरब रुपये व ब्याज लागत का दावा किया है। एक सूत्र ने कहा, टाटा संस ने 16 अप्रैल 2018 को यह दावा किया है। जनवरी 2018 में सर्वोच्च न्यायालय ने टाटा की याचिका स्वीकार कर पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस एन वैरवा को इस विवाद को सुलझाने के लिए एकमात्र मध्यस्थ नियुक्त कर दिया था। चेन्नई का सी शिवशंकरन समूह 7 अरब रुपये के बैंक कर्ज पर डिफॉल्ट के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो का सामना कर रहा है, साथ ही इसके ऊपर टाटा समूह की कंपनियों का 10 अरब रुपये बकाया है, जिसमें ब्याज शामिल है।
 
शिवा समूह ने 2016 में टाटा संस को भुगतान में चूक की थी, जो जापानी दूरसंचार कंपनी एनटीटी डोकोमो की टाटा टेली में हिस्सेदारी के अधिग्रहण से जुड़ा है। इस वजह से टाटा संस को अपनी जेब से डोकोमो को रकम चुकानी पड़ी और इसी का दावा शिवा समूह से किया गया है। टाटा संस ने यह रकम बट्टे खाते में डाल दी क्योंकि शिवा समूह ने अपना वादा पूरा नहीं किया।  सितंबर 2016 में टाटा संस ने बकाया रकम की वसूली के लिए शिवशंकरन के खिलाफ कानूनी कदम की शुरुआत की, जिस पर शिवशंकरन ने उत्पीडऩ व कुप्रबंधन का आरोप लगाया। 
 
15 जून 2017 को टाटा संस ने शिवशंकरन को आर्बिट्रेशन नोटिस भेजा, जिसने समझौते के तहत जरूरी मध्यस्थ को नामांकित नहीं किया। इसके बाद 31 जुलाई 2017 को टाटा संस ने आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल गठित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दी, जिसका शिवा ने विरोध किया। सर्वोच्च न्यायालय ने इस साल जनवरी में न्यायमूर्ति वैरवा को एकमात्र मध्यस्थ नियुक्त कर दिया। पहली बैठक 21 मार्च को हुई जब आगे की प्रक्रिया के लिए समयसारणी तय हुई और टाटा संस ने 16 अप्रैल को ब्याज व लागत के साथ 6.99 अरब रुपये का दावा पेश किया। सूत्रों ने कहा, आर्बिट्रेशन अगले 12 महीने में पूरा होने की संभावना है।
 
एक अलग प्रक्रिया के तहत टाटा कैपिटल फाइनैंशियल सर्विसेज ने भी शिवा इंडस्ट्रीज व सी शिवशंकरन से 3.34 अरब रुपये बकाया वसूलने के लिए कानूनी कदम उठाए हैं। यह दावा 2012 में शिवा इंडस्ट्रीज को दिए गए 2 अरब रुपये के कर्ज से जुड़ा है, जो शिवा इंडस्ट्रीज के पास टीटीएसएल के शेयर से सुरक्षित था। शिवा इंडस्ट्रीज ने इस कर्ज पर डिफॉल्ट किया और अंतत: जून 2014 में निपटान हुआ, जिसके तहत टाटा कैपिटल ने गिरवी शेयरों का अधिग्रहण किया और तीन साल बाद पहले से तय कीमत पर शिवा इंडस्ट्रीज को इन शेयरों को बेचने का विकल्प रखा। 
 
सूत्रों ने कहा कि शिवशंकरन ने व्यक्तिगत तौर पर शिवा इंडस्ट्रीज की देनदारी की गारंटी दी थी, लेकिन शिवा इंडस्ट्रीज ने मई 2017 में इस देनदारी पर डिफॉल्ट किया जब शेयर बिक्री का विकल्प पूरा होना था। जून 2017 में शिवशंकरन अपना वादा पूरा करने में नाकाम रहे। इसके बाद टाटा कैपिटल ने शिवा इंडस्ट्रीज व शिवशंकरन को अक्टूबर 2017 में आर्बिट्रेशन नोटिस भेजा। हालांकि शिवा आर्बिट्रेटर को नामांकित करने में नाकाम रहे और टाटा कैपिटल ने नवंबर 2017 में सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की। सूत्र ने कहा कि इस मामले में आर्बिट्रेशन की कार्यवाही जल्द शुरू होगी।
 
इस बारे में टाटा संस व सी शिवशंकरन समूह ने बिजनेस स्टैंडर्ड के ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया। शिवशंकरन अभी भारत में नहीं हैं। अभी शिवशंकरन आईडीबीआई बैंक के कर्ज पर डिफॉल्ट के चलते जांच के घेरे में हैं। अक्टूबर 2010 में बैंक ने विन विंड ओवाई को 3.2 अरब रुपये का कर्ज आवंटित किया था। फर्म ने बाद में फिनलैंड में दिवालिया के लिए आवेदन किया, जिसके चलते कर्ज एनपीए घोषित हो गया। डिफॉल्ट के बावजूद आईडीबीआई ने ऐक्सल सनशाइन को 5.23 अरब रुपये का कर्ज आवंटित किया। कथित तौर पर इस कर्ज का इस्तेमाल विन विंड ओवाई के कर्ज के पुनर्भुगतान में हुआ, जो आरबीआई के नियम का उल्लंघन है। आईडीबीआई के कर्ज के लिए शिवा समूह ने टाटा टेली के शेयर को कोलेटरल के तौर पर इस्तेमाल किया था।
कीवर्ड tata sons, shiva,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक