फ्लिपकार्ट के कोने में टाइगर का दबदबा

सचिन मामबटा | मुंबई May 09, 2018 09:59 PM IST

जब 12 जनवरी 1972 को कल्याण रमन कृष्णमूर्ति का जन्म हुआ था तो उस समय भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के प्रतिशत के तौर पर पांच आधार अंक से भी कम था। 46 साल बाद अब कृष्णमूर्ति ई-कॉमर्स दिग्गज फ्लिपकार्ट के मुख्य कार्याधिकारी के तौर पर मदद करेंगे। वॉलमार्ट के साथ सौदे से कंपनी में अरबों डॉलर का निवेश होने की संभावना है। यह सौदा कई मायनों में बदलते भारत का प्रतिबिंब माना जा रहा है, और कृष्णमूर्ति जैसे पेशेवर इस बदलाव की दिशा में मदद कर रहे हैं। वे ऐसे समय में निवेश आकर्षित करने में कामयाब रहे हैं जब इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा तेज बनी हुई है। अमेरिकी निवेशक टाइगर ग्लोबल द्वारा नियुक्त कल्याण रमन कृष्णमूर्ति (कल्याणसुंदरम कृष्णमूर्ति के बेटे) यह दावा कर सकते हैं कि उन्होंने फ्लिपकार्ट में कड़ी प्रतिस्पर्धा के खिलाफ मुहिम का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया।
 
वे जिस एकमात्र अन्य कंपनी से जुड़े रहे, वह है सनशाइन टीहाउस प्राइवेट लिमिटेड। इसमें वह निदेशक रह चुके हैं। कंपनी अपने ब्रांड-नाम छायोस के तहत लोकप्रिय टी-सर्विस कैफे चलाती है। छायोस में टाइगर ग्लोबल ने भी निवेश किया है। उन्हें 15 मई 2015 को इस कंपनी में नियुक्त किया गया था। छायोस भी विकास के दौर से गुजर रही है। कृष्णमूर्ति ने जनवरी 2017 में फ्लिपकार्ट के मुख्य कार्याधिकारी की जिम्मेदारी संभालने के लिए 13 दिसंबर 2016 को इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने बिन्नी बंसल की जगह ली जिन्हें समूह के मुख्य कार्याधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। एक साल पहले सह-संस्थापक सचिन बंसल को मुख्य कार्याधिकारी से पदोन्नत कर चेयरमैन बनाया गया था। 
 
ऐसा नहीं है कि अकेले इन संस्थापक बंधुओं ने कंपनी से दूरी बनाई है। कृष्णमूर्ति के बोर्ड में शामिल हेाने के बाद कई वरिष्ठï अधिकारी भी कंपनी से बाहर हो चुके हैं। ये अफवाह भी सामने आई थी कि कई और अधिकारी कंपनी को अलविदा कह सकते हैं जिनमें वरिष्ठï उपाध्यक्ष (उत्पाद प्रबंधन), सैकिरण कृष्णमूर्ति (ईकार्ट के प्रमुख), और समरदीप सुबंध (मुख्य विपणन अधिकारी) शामिल हैं।  माना जा रहा है कि यह सौदा नुकसान में कमी लाने और बेहतर वृद्घि के लिए परिचालन को अनुरूप बनाने की कृष्णमूर्ति की रणनीति का एक हिस्सा था। निवेशक भी कंपनी के समर्थन में दिखे हैं। कृष्णमूर्ति ने पिछले महीने बिजनेस स्टैंडर्ड को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि फ्लिपकार्ट ने पिछले समय की तुलना में एक साल में अधिक कोष जुटाने में कामयाबी हासिल की है। फ्लिपकार्ट में कृष्णमर्ति की यह पहली सफलता नहीं है। वह 2013 से 2014 के दौरान भी कंपनी में अंतरिम मुख्य वित्तीय अधिकारी की कमान संभाल चुके हैं। 
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