बाजार नियामक कर रहा है नई प्रशासन अवधारणाओं का परीक्षण

बीएस संवाददाता | मुंबई May 11, 2018 09:41 PM IST

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) बोर्ड मूल्यांकन, ग्रुप गवर्नेंस इकाइयों और भारतीय बाजार में खुलासा रणनीति जैसी प्रशासन अवधारणाओं का परीक्षण कर रहा है। इसकी शुरुआत करते हुए बाजार नियामक ने इन उपायों को बिना अनिवार्य आधार पर लागू किया है। विश्लेषकों का मानना है कि इन्हें प्रभावी साबित होने पर अनिवार्य किया जा सकता है। विकसित देशों में इनमें से कुछ अवधारणा पहले से ही लागू हैं और इन्हें अल्पांश निवेशकों के सशक्तिकरण का एक प्रमुख उपाय के तौर पर देखा जाता है।
 
सेबी ने गुरुवार को जारी एक परिपत्र में कहा है कि कंपनियां बोर्ड के मूल्यांकन के बाद खुलासा कर सकती हैं। साथ ही बाजार नियामक ने यह भी कहा है कि गैर-सूचीबद्ध सहायक इकाइयों वाली कंपनियों को समूह के लिए स्थापित प्रशासन नीति को लागू करने की जरूरत है। सबसे अहम बात यह है कि बाजार नियामक ने कहा है कि कंपनियां मध्यावधि एवं दीर्घावधि रणनीतियों का खुलासा कर सकती हैं। ये उपाय कंपनी प्रशासन पर उदय कोटक पैनल की सिफारिशों पर अधारित हैं। प्रॉक्सी सलाहकार फर्म एसईएस के मैनेजिंग पार्टनर जेएन गुप्ता ने कहा, 'कोटक समिति का नजरिया विकासवादी है न कि क्रांतिकारी। बड़े एवं जटिल मुद्दों को चरणबद्ध तरीके से निपटाने का निर्णय लिया गया है क्योंकि इस प्रकार के खुलासों को लागू करने में समय लगेगा।' 
 
सेबी ने कहा है कि वार्षिक रिपोर्ट के 'प्रबंधन चर्चा एवं विश्लेषण' भाग के तहत कंपनियां अपने प्रतिस्पर्धी दायरे में रहते हुए मध्यावधि एवं दीघावर्धि रणनीतियों का खुलासा कर सकती हैं जो उसके निदेशक मंडल द्वारा निर्धारित समय-सीमा पर आधारित हो। गुप्ता ने कहा कि रणनीति पर खुलासे के तहत आमतौर पर तीन से पांच साल की अवधि के लिए उद्देश्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक कदमों का विस्तृत विवरण होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'इससे बोर्ड को लक्ष्य तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करने में भी मदद मिलेगी।' बाजार नियामक ने कंपनियों को बोर्ड का मूल्यांकन करने के लिए भी कहा है जो निदेशकों के प्रदर्शन का एक तरीके से मूल्यांकन होगा।
 
नैशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी सूचकांक में शामिल एक कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, 'बोर्ड के प्रभावी संचालन में बोर्ड के मूल्यांकन की अहम भूमिका होती है। इस प्रकार के मूल्यांकन से बोर्ड उन बाधाओं को पहचानने में समर्थ होता है जो कंपनी के विकास के राह में आती हैं। अपने बोर्ड के मूल्यांकन के जरिये कंपनी अपनी ताकत और कमजोरियों को पहचान सकती है जिससे उसके प्रदर्शन एवं शेयरधारकों के मूल्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए नियमित तौर पर बोर्ड के मूल्यांकन की निगरानी के लिए कोई ढांचा होना चाहिए।'
कीवर्ड sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),

  
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