दलाल पथ पर जिनने किया मालामाल

राम प्रसाद साहू | मुंबई May 13, 2018 09:43 PM IST

देश की सबसे बड़ी टायर विनिर्माता कंपनी एमआरएफ का शेयर हाल ही में सर्वकालिक उच्च स्तर 81,423 रुपये पर पहुंच गया था। पांच से 15 साल के दौरान इस शेयर ने सालाना 30 फीसदी या इससे अधिक का रिटर्न दिया है। इस शेयर को बीते समय में खरीदने वाले निवेशक आज अच्छे मुनाफे में हैं। बेहतर रिटर्न देने के मामले में एमआरएफ अकेली कंपनी नहीं है। ऐसी 22 अन्य कंपनियां हैं, जिनके शेयरों ने इस दौरान 30 फीसदी से अधिक की सालाना चक्रवृद्घि दर से रिटर्न दिए हैं। दिलचस्प है कि इन शेयरों ने निवेशकों को बाजार से बेहतर रिटर्न दिया है। पिछले 15 वर्षों के दौरान इन शेयरों ने सबसे ज्यादा 30 फीसदी का सालाना रिटर्न दिया है जबकि सेंसेक्स या बीएसई 100, 200 और 500 सूचकांकों का सालाना रिटर्न 16 से 18 फीसदी रहा है। हालांकि शेयर बाजार का रिटर्न खराब नहीं है लेकिन मुद्रास्फीति और पूंजी की लगत को देखते हुए इसे अधिक नहीं कहा जा सकता।
 
एक अन्य टायर कंपनी बालकृष्ण इंडस्ट्रीज ने पिछले 15 वर्षों के दौरान सबसे अधिक सालाना 58.75 फीसदी की दर से रिटर्न दिया है। इसके बाद रिटर्न के मामले में अवंति फीड्स, रॉयल एनफील्ड की विनिर्माता आयशर मोटर्स और एचडीएफसी की सहायक इकाई गृह फाइनैंस है। पिछले 15 साल में सबसे ज्यादा संपत्ति सृजित करने वाली कंपनियां तीन श्रेणियों की हैं - खपत आधारित शेयर, जिंस आधारित और अप्रत्याशित बढऩेे वाले शेयर। अधिकतर विश्लेषकों और बाजार के विशेषज्ञ इस सूची में खपत आधारित कंपनियों को लेकर चकित नहीं हैं। 30 फीसदी से अधिक सालाना रिटर्न वाली 23 कंपनियों में 40 फीसदी कंपनियां इसी श्रेणी की हैं। रेनेसंस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के पंकज मोरारका ने कहा, 'उपभोक्ता आधारित कंपनियों का कारोबार ज्यादा टिकाऊ होता है।'
 
शीर्ष प्रदर्शन करने वाली कंपनियों की सूची में पेंट्स क्षेत्र की ज्यादा फर्में हैं। कन्साई नेरोलैक और बर्जर पेंट्स ने पिछले 15 साल में 38 फीसदी सालाना की दर से रिटर्न दिया है। इसी तरह एशियन पेंट्स ने 10 और 15 साल के दौरान 31 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में प्राइवेट क्लाइंट ग्रुप के प्रमुख वीके शर्मा ने कहा, 'असंगठित से संगठित क्षेत्र में जाने वाली कंपनियों और अपने क्षेत्र में शुरू में आने वाली कंपनियां जैसे एशियन पेंट्स को ज्यादा फायदा मिला है।' बर्जर और नेरोलैक ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है और हर साल करीब 20 से 22 फीसदी का मुनाफा कमा रही हैं।
 
जिंस आधारित कंपनियों को लेकर विश्लेषकों की राय मिली-जुली है। शर्मा ने कहा, 'जिंस में जोखिम जुड़ा होता है और वे लंबे समय तक स्थायी रिटर्न नहीं दे पाती हैं।' हालांकि श्री सीमेंट ने अप्रत्याशित रिटर्न दिया है। विशेषज्ञों ने इसकी वजह कारोबार की तुलना में उच्च गुणवत्ता का प्रबंधन बताया।  वर्तमान में 21 कंपनियों की इस सूची में 100 अरब रुपये या इससे अधिक बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियां शामिल हैं। अगर बाजार पूंजीकरण की सीमा में ढील दी जाए तो इस सूची में 66 कंपनियां शामिल हो सकती हैं। 
 
इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के जी चोकालिंगम ने कहा, 'अगर आप चक्रीय शेयरों में निवेश करते हैं तो आपको सतर्क रहने की जरूरत है।' उनका मानना है कि निवेशकों को प्रबंधन गुणवत्ता और कंपनियों की मजबूत बैलेंस शीट पर ध्यान देने की जरूरत है।विशेषज्ञों ने निवेशकों को सतर्क किया कि स्मॉल-कैप शेयरों को चुनते समय सावधानी बरतें। मोरारका ने कहा कि चढऩे वाले अधिकांश स्मॉलकैप शेयरों में 50 फीसदी में आगे गिरावट देखी गई है। कंपनी के आकार से इतर दो मानदंड पूंजी सृजित करने में अहम रहे हैं, जिनमें गुणवत्तापूर्ण कारोबार के साथ ही निरंतर उच्च वृद्घि शामिल है। इनमें से किसी एक की गैर-मौजूदगी से कंपनियां का रिटर्न घट सकता है। यही वजह है कि दो क्षेत्रों को इस सूची में जगह नहीं मिल पाई। इनमें से एक बुनियादी ढांचा क्षेत्र है और दूसरा सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र। आईटी कंपनियों ने कुछ साल पहले 155 से 20 फीसदी सालाना की दर से विकास किया जबकि अब इनकी वृद्घि दर 8 से 9 फीसदी के दायरे में है।
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