म्युचुअल फंडों में डायरेक्ट प्लान के योगदान में आई कमी

सचिन मामबटा | मुंबई May 14, 2018 10:17 PM IST

डायरेक्ट योजनाओं के तहत म्युचुअल फंडों के योगदान में 2017-18 के अंत में कमी दर्ज की गई। इन योजनाओं के योगदान में वर्ष 2013 के बाद से पहली बार गिरावट दर्ज की गई। 2013 में फंडों में डायरेक्ट श्रेणी को शुरू किया गया था। एमएफ ट्रैकर वैल्यू रिसर्च से प्राप्त आंकड़ों से पता चलता है कि डायरेक्ट योजनाओं की परिसंपत्तियों की भागीदारी वित्त वर्ष 2013 और वित्त वर्ष 2017 के बीच 15 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत हो गई थी। वहीं वित्त वर्ष 2017-18 के अंत में इसमें 38 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई।  यह गिरावट उन ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों के तेजी से बढऩे की वजह से आई है जो फंडों में बगैर शुल्क के प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति देते हैं। इन प्लेटफॉर्मों में कुवेरा, क्लियरफंड्ïस, कम्प्यूटर एज मैनेजमेंट सर्विसेज (सीएएमएस, रजिस्ट्रार एवं ट्रांसफर एजेंट), और कार्वी कम्प्यूटरशेयर मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके अलावा पेटीएम मनी भी अपना परिचालन शुरू करने के लिए तैयार है।
 
ऐसे प्लेटफॉर्म लोगों को परिसंपत्ति प्रबंधक के साथ प्रत्यक्ष रूप से निवेश करने की अनुमति देते हैं और साथ ही कोई वितरण शुल्क भी नहीं वसूलते हैं। इसकी वजह से इनमें कम लागत की वजह से प्रतिफल ज्यादा रहता है। इन फायदों के बावजूद, डायरेक्ट योजनाओं की भागीदारी में गिरावट आई है और इसके लिए तेजडिय़ों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। वैल्यू रिसर्च के मुख्य कार्याधिकारी धीरेंद्र कुमार का कहना है कि डेट योजनाओं की तुलना में इक्विटी योजनाओं की डायरेक्ट प्लांस में कम भागीदारी है। इक्विटी फंडों ने मजबूत प्रवाह और मौजूदा परिसंपत्तियों पर दो अंक के प्रतिफल की वजह से वित्त वर्ष 2018 में अपनी प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) में 48 प्रतिशत की वृद्घि दर्ज की। डेट सेगमेंट इस अवधि में 6.31 प्रतिशत बढ़ा। मजबूत संस्थागत निवेशकों की अच्छी उपस्थिति की वजह से डायरेक्ट योजनाएं डेट सेगमेंट में अधिक महत्वपूर्ण हैं। इस वजह से गैर-डायरेक्ट निवेशकों के दबदबे में इक्विटी परिसंपत्तियों में तेजी से डायरेक्ट प्लांस की परिसंपत्ति भागीदारी में गिरावट को बढ़ावा मिला है।
 
ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों का जिक्र करते हुए कुमार कहते हैं, 'वे तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।'  वह कहते हैं कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म मुख्त डायरेक्ट प्लांस मुहैया कराते हैं। हालांकि उनका कहना है कि यह अस्पष्टï है कि इनमें से कितने प्लान दीर्घावधि में प्रतिफल कमाने में सक्षम होंगे। एमएफ यूटिलिटी जैसे विकल्प मौजूद हैं जो निवेशकों को नि:शुल्क लेनदेन की अनुमति देते हैं। वह कहते हैं कि यह उद्योग द्वारा स्थापित एडेड ट्रस्ट-फैक्टर के साथ काम करता है।
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