प्रवर्तक इक्विटी छूट मामले में सेबी से संपर्क करेंगे बैंक

नम्रता आचार्य | कोलकाता May 15, 2018 09:52 PM IST

सरकार की बहुलांश शेयर हिस्सेदारी वाले सार्वजनिक क्षेत्र के अधिक अधिकतर बैंक जल्द ही प्रवर्तक इक्विटी संबंधी नियमों में छूट के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से संपर्क कर सकते हैं। वे ऐसी एक रियायत पहले भी ले चुके हैं। जरूरत के मुताबिक शेयरधारिता घटाने के लिए वे पात्र संस्थागत निवेश (क्यूआईपी) अथवा एम्प्लॉयी स्टॉक ऑप्शन प्लान्स (ईसॉप्स) पर विचार कर सकते हैं। हालांकि इन दो उपायों के बावजूद अत्यधिक सरकारी हिस्सेदारी वाले बैंकों में प्रवर्तक हिस्सेदारी निर्धारित स्तर से अधिक हो सकती है।

 
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अगस्त 2017 तक सरकारी शेयरधारिता को घटाकर कम से कम 75 फीसदी के स्तर तक लाना अनिवार्य किया गया था ताकि संशोधित प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) नियमों का अनुपालन सुनिश्चित हो सके। पिछले साल इन नियमों के अनुपालन के लिए अंतिम समय-सीमा को एक साल बढ़ाकर अगस्त 2018 कर दिया गया था। हालांकि हालिया पूंजी निवेश के साथ ही इन बैंकों में सरकारी शेयर हिस्सेदारी और बढ़ गई। जबकि विपरीत बाजार परिदृश्य के मद्देनजर उन्होंने सरकारी शेयर हिस्सेदारी घटाने के लिए पूंजी बाजार में उतरने से परहेज किया। 
 
मार्च के अंत तक सार्वजनिक क्षेत्र के 13 बैंकों में सरकारी शेयर हिस्सेदारी 75 फीसदी से अधिक थी। कोलकाता के सरकारी बैंक यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (यूबीआई) में सबसे अधिक 93.13 फीसदी सरकारी हिस्सेदारी है। ईसॉप्स और क्यूआईपी दोनों के लिए उसे बोर्ड से मंजूरी मिल चुकी है। यूबीआई के प्रबंध निदेशक पवन बजाज ने कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि इन मानदंडों पर अमल करने के लिए बैंकों को सरकार अतिरिक्त समय देगी। ईसॉप्स जारी करने से पहले हम प्राधिकृत पूंजी में बढ़ोतरी का भी इंतजार कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि ईसॉप्स जारी होने से इस बैंक में सरकारी हिस्सेदारी में करीब 3 फीसदी की कमी आएगी। 
 
यूको बैंक ने सरकारी शेयरधारिता घटाने के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से अतिरिक्त समय मांगा है। यूको बैंक में सरकार की शेयर हिस्सेदारी फिलहाल 84.23 फीसदी है।  बैंक के प्रबंध निदेशक आरके टक्कर ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, 'साथ ही, क्यूआईपी के लिए हमें बोर्ड से मंजूरी पहले ही मिल चुकी है लेकिन विपरीत बाजार परिदृश्य के मद्देनजर हमें फिलहाल उपयुक्त समय नहीं दिख रहा है।' इससे पहले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बीच सबसे पहले इलाहाबाद बैंक ने ईसॉप्स जारी की थी लेकिन उसमें कर्मचारियों की अधिक दिलचस्पी नहीं दिखी थी। 
कीवर्ड sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),

  
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