सस्ते ब्रांड के जरिए आगे बढ़ रही सैमसोनाइट

पवन लाल | मुंबई May 17, 2018 09:48 PM IST

बैग, सुटकेस आदि बनाने वाली विश्व की सबसे बड़ी निर्माता सैमसोनाइट की भारतीय सहायक कंपनी धीरे-धीरे बाजार की अग्रणी वीआईपी इंडस्ट्रीज और खुद के बीच का अंतर काफी कर चुकी है। एक्सेसरीज, ई-कॉमर्स के जरिए बिक्री और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने के लिए सस्ते ब्रांड के जरिए कंपनी ऐसा कर पाई है। सैमसोनाइट की कार्यकारी निदेशक अनुश्री टेनवाला ने कहा कि हमारी बढ़त अनुमान के मुताबिक है। कैलेंडर वर्ष 2008 में भारत में कंपनी का राजस्व 2.2 अरब रुपये रहा था जबकि वीआईपी का 5 अरब रुपये। आज यह करीब 12 अरब रुपये है। वीआईपी का राजस्व 2017 के आखिर में करीब 13 अरब रुपये था।
 
सैमसोनाइट की भारतीय बिक्री में ई-कॉमर्स 10 फीसदी योगदान कर रहा है और वीआईपी के लिए भी यह इतना ही है। विश्लेषकों का कहना है कि इससे कंपनी आगे बढ़ रही है। सैमसोनाइट हमेशा से ही ज्यादा प्रीमियम वाला ब्रांड रहा है और यह ज्यादा आय वाले लोगों को अपनी ओर खींचती रही है जबकि वीआईपी के पास बेहतर वितरण के अलावा कम कीमत का फायदा है ताकि इसके उत्पाद ज्यादा से ज्यादा लोग खरीद सकें। सैमसोनाइट के उत्पादों की कीमतें 4,000 रुपये से 12,000 रुपये के दायरे में हैं, वहींं वीआईपी के उत्पाद 2,500 रुपये से लेकर 8,000 रुपये तक में उपलब्ध होते हैं।
 
लेकिन यह धीरे-धीरे बदल रहा है क्योंकि सैमसोनाइट प्रतिस्पर्धा से संकेत ले रही है। वीआईपी की अग्रणी स्थिति के लिए विश्लेषक स्काईबैग को वजह बताते हैं और यह कंपनी के राजस्व में 35 से 40 फीसदी का योगदान करता है और यह कंपनी की बढ़त का मुख्य इंजन है। इसी कदम पर चलते हुए सैमसोनाइट ने कम कीमत वाले उत्पादों मसलन अमेरिकन टूरिस्टर (जो मूल रूप से स्काईबैग के लिए सैमसोनाइट का जवाब है) की बिक्री पर जोर दिया और 2016 में 3,500 रुपये से कम कीमत वाला लगेज कमिलिएंट पेश किया।
 
सैमसोनाइट के अधिकारियों ने कहा, पेशकश के बाद के 18 महीनों में कमिलिएंट की बिक्री से 1 अरब रुपये का राजस्व मिला। इन्होंने संकेत दिया कि यह कीमत देश भर के छोटे व मझोले शहरों में गैर-ब्रांडेड क्षेत्र के लगेज को देखते हुए रखी गई है। साथ ही हाइपरमार्केट, डिस्ट्रिब्यूशन आउटलेट्स व कैंटीन आदि के जरिए करीब 2000 पाइंट ऑफ सेल के जरिए इसका वितरण हुआ। कुल मिलाकर सैमसोनाइट ने तीन सालों में पाइंट ऑफ सेल में 50 फीसदी का इजाफा किया है और यह 5,000 से ज्यादा जगहों पर है।
 
अभी सैमसोनाइट की नासिक फैक्टरी में हर महीने करीब 80,000 यूनिट का उत्पादन होता है और टेनवाला का कहना है इसे बढ़ाकर एक लाख यूनिट मासिक करने का है औक कुछ सालों में इसे दो लाख किया जाना है। उन्होंने कहा कि 70 फीसदी का निर्यात हो जाता है। इतना होते हुए भी भारत वैश्विक कंपनी के लिए पांचवां बड़ा बाजार है। 
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