फंडों की बिकवाली से मुश्किल में पीएमएस

जयदीप घोष | मुंबई May 18, 2018 09:38 PM IST

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के इक्विटी म्युचुअल फंड के नए सिरे से वर्गीकरण करने से कई मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भारी गिरावट आ सकती है। इससे उन पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा (पीएमएस) क्षेत्र के कोष प्रबंधकों को भी मुश्किलों का समाना करना पड़ रहा है, जिन्होंने इन शेयरों पर दांव लगाया है। एक फंड हाउस के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, 'कई योजनाओं ने थोक सौदे में चुनिंदा शेयरों की बिकवाली शुरू कर दी है। और कई पीएमएस जिन्होंने इन शेयरों में निवेश किया है, उन्हें नुकसान हो रहा है।' 
 
सूत्रों के अनुसार 10 अरब रुपये के पीएमएस का प्रबंधन करने वाले इक्विटी इंटैलिजेंस के संस्थापक पोरिंजू वेलियथ ने अपने निवेशकों को इस हफ्ते पत्र लिखकर स्वीकार किया है कि जनवरी से ही उनके शेयरों का प्रदर्शन कमतर रहा है। वेलियथ ने कहा, 'राजनीतिक घटनाक्रम, बैंकिंग क्षेत्र में सुधार और म्युचुअल फंड के पुनर्गठन के कारण गैर-सूचकांक शेयरों, खास तौर पर मिड और स्मॉल-कैप में असमान्य बिकवाली देखी जा रही है।' निफ्टी मिड-कैप  जनवरी से अब तक 10.6 फीसदी गिरा है, वहीं स्मॉल कैप में 14.1 फीसदी की गिरावट आई है। 
 
जाने-माने निवेश सलाहकार एसपी तुलस्यान का पीएमएस भी दबाव में है। उन्होंने अपने निवेशकों को लिखा है कि उनके निवेशित शेयरों में गिरावट से नुकसान हो रहा है। हालांकि इसकी भरपाई के उपाय किए जाएंगे। उद्योग के सूत्रों के अनुसार चार से पांच पीएमएस योजनाओं पर मिड-कैप और स्मॉल-कैप में बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है।  सेबी ने अक्टूबर में म्युचुअल फंडों को नए सिरे से वर्गीकृत करने के लिए दिशानिर्देश जारी किया था। हालांकि म्युचुअल फंड उद्योग ने हाल में बिकवाली शुरू की है। इस दिशानिर्देश के तहत लॉर्ज-कैप वाले फंड लॉर्ज कैप कंपनियों या शीर्ष 100 कंपनियों में 80 फीसदी शेयर रख सकते हैं। मिड-कैप फंड मिड-कैप शेयरों में 65 फीसदी शेयर रख सकते हैं।
 
बिरला सन लाइफ म्युचुअल फंड के मुख्य कार्याधिकारी ए बालासुब्रमण्यन ने कहा, 'सेबी के दिशानिर्देश ने कई कोष प्रबंधकों का जीवन आसान बना दिया है क्योंकि उन्हें पता है कि किस मानदंड के तहत उन्हें परिचालन करना है।' बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए फंड मैनेजरों और पीएमएस भागीदारों के लिए निचले स्तर का पता लगाना कठिन हो गया है। निवेश सलाहकार अरुण केजरीवाल ने कहा, 'तेजी वाले बाजार में मिड-कैप और समॉल-कैप निवेशकों का पसंदीदा होते हैं। गिरावट वाले बाजार में इसके उलट होता है। सेबी के दिशानिर्देश से मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों पर असर दिख रहा है।'
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