इक्विटी के लिए खतरा है कच्चा तेल

पुनीत वाधवा | नई दिल्ली May 18, 2018 09:46 PM IST

सीएलएसए के प्रबंध निदेशक, इक्विटी रणनीतिकार क्रिस्टोफर वुड ने अपने साप्ताहिक लेख ग्रीड एंड फीयर में लिखा है कि भारतीय इक्विटी में निवेशकों के लिए मुख्य जोखिम अमेरिकी डॉलर प्रतिफल के जरिये से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है।  वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड के लिए कीमतें गुरुवार को 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं। अमेरिका द्वारा ईरान पर प्रतिबंध के निर्णय से तेल कीमतों में तेजी आई है जिससे बाजार 2014 के स्तर से अपने सर्वाधिक ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले एक साल में ब्रेंट तेल कीमत 56 प्रतिशत से अधिक चढ़ी है। 
 
वुड ने हाल में कहा कि रुपया एवं तेल के अलावा भारतीय बाजारों के लिए अन्य जोखिम म्युचुअल फंड प्रवाह में आई भारी गिरावट थी। हालांकि वह आम चुनाव से पहले राजकोषीय अंतर को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं हैं और खासकर मिड-कैप सेगमेंट में भारतीय इक्विटी के गहन मूल्यांकन पर सतर्क हैं। क्षेत्रों के संदर्भ में, भारत में निवेश किफायती आवास थीम में अहम बना हुआ है, लेकिन आवासीय संपत्ति बाजार रियल एस्टेट रेग्युलेशन ऐक्ट (रेरा) और नोटबंदी की दोहरी अनिश्चितता से प्रभावित हुआ। 
 
मोदी की जीत की भविष्यवाणी
 
कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के स्पष्टï जनादेश से दूर रहने के बावजूद वैश्विक ब्रोकरों ने उम्मीद जताई है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली पार्टी दूसरी बार देश की कमान संभालेगी।  अपने साप्ताहिक न्यूजलेटर में वुड ने कहा है कि वह इस बात पर कायम हैं कि नरेंद्र मोदी और भाजपा की फिर से जीत होगी, भले ही कम बहुमत के साथ हो। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारतीय प्रधानमंत्री एक दमदार प्रचारक हैं और उनकी नीतियों के कुछ सकारात्मक परिणाम तब तक जमीनी आधार पर स्पष्टï दिख सकते हैं। 
 
हालांकि वुड इसे लेकर सतर्क हैं कि चौथी तिमाही से पहले भारतीय राजनीति पर कोई टिप्पणी करना अभी जल्दबाजी है, क्योंकि आम चुनाव अप्रैल-मई 2019  में होंगे।  हाल में यूबीएस की एक रिपोर्ट में भी यह सुझाव दिया गया था कि वैश्विक निवेशक मोदी सरकार के 2019 में भी सत्ता में लौटने की उम्मीद कर रहे हैं और बाजार में मौजूदा स्तरों पर इस संभावना का असर पहले ही दिख चुका है। मोदी द्वारा अगले कार्यकाल के लिए भी जीत दर्ज किए जाने के पीछे वुड द्वारा भरोसा जताए जाने का एक अन्य कारण यह है कि प्रधानमंत्री ने ऐसी नीतियों के क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया है जो आम लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने में सफल रही हैं। वुड कहते हैं, 'आम चुनाव से पहले और अधिक लोकलुभावन नीतियों में भी तेजी आएगी। मोदी का ऐसी नीतियों पर ध्यान देने का रिकॉर्ड भी रहा है जो महिला मतदाताओं को आकर्षित करती हों।' 
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