एनएसई को अमेरिकी नियामक सीएफटीसी की मंजूरी मिली

बीएस संवाददाता | मुंबई May 18, 2018 09:47 PM IST

नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को अपने उत्पाद अमेरिकी निवेशकों को बेचने के लिए अमेरिकी डेरिवेटिव्स नियामक कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन (सीएफटीसी) से मंजूरी मिल गई है। अमेरिकी इक्विटी और जिंस डेरिवेटिव्स सीएफटीसी द्वारा विनियमित हैं और अमेरिका में स्थित संस्थागत निवेशकों को मौजूदा समय में सिर्फ उन्हीं डेरिवेटिव्स में निवेश की अनुमति हासिल है जो सीएफटीसी-स्वीकृत हैं। इस मंजूरी से अमेरिकी संस्थागत निवेशक बगैर किसी सीमा के एनएसई में सूचीबद्घ डेरिवेटिव्स में कारोबार करने में सक्षम होंगे। पिछले साल तक, ये फंड भारतीय वायदा में कारोबार के लिए पार्टिसिपेटरी नोट (पी-नोट) विकल्प का इस्तेमाल करते थे। हालांकि भारतीय बाजार नियामक सेबी द्वारा वायदा बाजार में गैर-हेजिंग पोजीशन लेने से पी-नोट कारोबारियों को प्रतिबंधित करने के निर्णय से इन फंडों और संस्थागत निवेशकों को भारतीय सिंगल-स्टॉक वायदा में कारोबार के लिहाज से कोई विकल्प नहीं रह गया। 
 
पीडब्ल्यूसी में पार्टनर (वित्तीय सेवा) सुरेश स्वामी ने कहा, 'मंजूरी के अभाव में, अमेरिकी फंडों को भारतीय सिंगल स्टॉक वायदा बाजार तक पहुंच बनाने में समस्या हो रही थी। यह समस्या सेबी द्वारा डेरिवेटिव्स के साथ पी-नोट के निर्गम पर प्रतिबंध से और अधिक बढ़ गई। कुछ निवेशक अब स्टॉक डेरिवेटिव्स में निवेश के लिए एफपीआई के तौर पर पंजीकृत होने पर विचार कर सकते हैं।' इसके अलावा इंडेक्स फ्यूचर्स में निवेश करने को इच्छुक निवेशक सिंगापुर एक्सचेंज (एसजीएक्स) जैसे विदेशी बाजारों का इस्तेमाल करते हैं। यह विकल्प भी अब बंद हो गया है क्योंकि भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों ने विदेशी शेयर बाजारों के साथ अपने डेटा-शेयरिंग समझौते समाप्त कर दिए हैं।
 
भारतीय बाजार में कारोबारी विदेशों के लिए भारतीय डेरिवेटिव बाजार के निर्यात को लेकर चिंतित रहे हैं। शेयर बाजारों के साथ हाल तक अच्छे संबंध की वजह से एसजीएक्स निफ्टी का इंडेक्स डेरिवेटिव्स कारोबार में 50 प्रतिशत से अधिक का योगदान रहा है।  भारतीय कारोबारियों का कहना है कि सीएफटीसी भारतीय बाजारों के लिए लाभदायक हो सकता है, क्योंकि यह ज्यादा हेज फंड आकर्षित करेगा। 
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